तमिलनाडु में स्टरलाईट कंपनी के विरोध में आन्दोलनरत लोगों पर गोली चलाना, राज्य के क्रूर और बर्बर चरित्र को उजागर करता हैं. :  कार्पोरेट की असीमित लुट के लिए अपने ही नागरिकों को मार रही हैं सरकारें  ;.छतीसगढ बचाओ आदोलन 

23 मई 2028 रायपुर 

अनिल अग्रवाल की स्वामित्व वाली बेदान्ता कंपनी की तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्थित   स्टरलाईट कॉपर प्लांट से हो रहे गंभीर जल और वायु प्रदुषण के खिलाफ वहां के स्थानीय निवासी पिछले 100 दिनों से शांतिपूर्वक आन्दोलन करते हुए प्लांट के विस्तार योजना को  रोकने की मांग कर रहे थे l

कल आन्दोलनकारी कलेक्टर कार्यालय की ओर जा रहे थे उस समय तमिलनाडु की पुलिस ने पहले लाठीचार्ज कर आंसू गैस के गोले छोड़े गए तत्पश्चात स्नाइपर (निशाना लगाने वाले) के द्वारा चुन चुन के लोगों पर गोली चलाई गई, जिसमे 11 लोग मारे गए l यह अचानक घटी कोई घटना नहीं बल्कि बेदान्ता कंपनी के साथ मिलकर आन्दोलन को ख़त्म करने के उद्देश्य से राज्य के द्वारा अपने नही नागरिकों कि की गई बर्बर हत्या हैं l इस दमन और हत्याकांड ने एक बार पुनः राज्य और कार्पोरेट के घिनौने गठजोड़ को उजागर किया हैं l

छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन इस घटना की पुरजोर तरीके से भर्त्सना करता हैं और इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्याययिक जाँच की मांग करता हैं l साथ ही लोगों की जिन्दगी में भयानक जहर घोल रही प्रदुषणकारी कॉपर परियोजना को शीघ्र बंद करने की मांग करता हैं l

यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाता हैं की नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कंपनियों को पुर्णतः खुली छूट दे दी गई हैं lकेन्द्रीय वन पर्यावरण एवं क्लाइमेट चेंज मंत्रालय का कार्य सिर्फ कंपनियों को  बिना सोचे समझे पर्यावरण को नजरंदाज कर सिर्फ स्वीकृतियां देने तक रह गया हैं l गंभीर पर्यावरण प्रदुषण के मामलों में लगातार और जानबूझकर अनदेखी की जा रही हैं l स्टरलाईट कॉपर परियोजना के गंभीर प्रदुषण के कारण लोगों को अस्थमा से लेकर केंसर तक की बीमारी हो रही हैं l 

तमिलनाडु प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड और ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा परियोजना स्थल के 7 गाँव में  भूमिगत जल की जाँच में भी भारी तत्व पाए गए थे जो मानव स्वास्थ के लिए जानलेवा हैं l इतनी गंभीर शिकायतों और प्रभावितों के सतत आन्दोलन के बाद भी  तमिलनाडु सरकार के प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड और केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा लगातार न सिर्फ चुप्पी साधे रखी गई बल्कि परियोजना के विस्तार को भी सहमती प्रदान की गई l यह  स्पष्ट करता हैं की केंद्र व राज्य सरकारों को सिर्फ कार्पोरेट के मुनाफे और गैरकानूनी कार्यो को संरक्षण की चिंता हैं न की देश के नागरिकों के स्वास्थ और उनके जीवन की l   

यहाँ महत्वपूर्ण हैं कि बेदान्ता कंपनी अपने मुनाफे के लिए तमाम नियमो कानूनों की धज्जियाँ उड़ाकर राज्य के संरक्षण में लूट को सतत अंजाम दे रहा हैं, छत्तीसगढ़ राज्य में भी ऐसे तमाम उधारहण हैं l कोरबा जिले में स्थित बालकों प्लांट के लिए निर्माणाधीन चिमनी हादसे में 40 मजदूरों की मौत हुई थी जिन्हें आज तक न्याय नहीं मिला l इसी प्लांट के लिए निर्मित फ्लाई ऐश डेम के टूटने से सैकड़ो एकड़ जमीन और जल स्रोत बर्बाद हो चुके हैं l कवर्धा जिले में स्थित दलदली माइनिंग में भी लगातार नियम विरुद्ध और पर्यावरणीय नियमों को धता बताकर उत्खनन कार्य किया जा रहा हैं l इसी कंपनी के द्वारा छत्तीसगढ़ के मेनपाट को बाक्साईट माइनिंग के नाम पर ख़त्म किया जा रहा हैं l बेदान्ता कंपनी पर रमन सरकार की मेहरबानी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता हैं की नई राजधानी में निशुल्क केंसर के इलाज के लिए हॉस्पिटल बनाने हेतु कोड़ियो के भाव दी गई जमीन को गुपचुप तरीके से कमर्सियल उपयोग में बदल दिया गया l   

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