बीजापुर भैरमगढ : दो दिन पहले 26 आदिवासियों को जबरिया थाने में बैठाया, तीसरे दिन उनमें से 13 नक्सली बन गये…बना दिए गये.? :- जावेद अख्तर की रिपोर्ट

सिंह साहब आपका प्रशासन ग्रेट है…

 सलाम छत्तीसगढ़…
रायपुर (23 मई 2018)
आदिवासियों को नक्सल का आरोपी बना देना इतना भी आसान हो सकता है, कोई सोच भी नहीं सकता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ये बेहद आसान है। एक घटना को देखें और समझें कि क्या वास्तविक रूप में ये आदिवासी नक्सली हैं या नहीं.?
नीचे दो लिस्ट दी गई है एक 19 मई 2018 को हिमांशु कुमार की फेसबुक वाल से और दूसरी लिस्ट 21 मई 2018 को पुलिस द्वारा प्रेस रिलीज़…
कल बीजापुर पुलिस ने जिन 13 आदिवासियों को नक्सली बताकर प्रेस विज्ञप्ति जारी की है, ये वही कथित नक्सली हैं जिनको लेकर विगत चार दिनों से सोशल मीडिया एवं अखबारों में खबरें प्रकाशित हो रही थीं कि ‘बारात में गये 26 आदिवासियों को जबरन पुलिस ने थाना में बैठा रखा है’ वहीं एसपी ने 20 मई 2018 को अखबारों द्वारा पूछे जाने पर ऐसी कोई जानकारी नहीं होना बता रहे थे। कमाल देखिए कि 21 तारीख को बकायदा प्रेस के सामने, उन 26 आदिवासियों में से ही 13 आदिवासी को नक्सली का जामा पहनाकर पेश कर दिया गया।
यानि कि 26 में से कथित तौर पर 13 आदिवासी को नक्सल का आरोपी बना दिए गए। शेष 13 आदिवासियों का अभी तक कुछ अता पता नहीं है।
संभवतः एकाध दो दिन में शेष सभी या कुछेक आदिवासियों को भी बतौर नक्सली बताकर पेश किए जाने अथवा मुठभेड़ में ढेर कर दिए जाने का प्लाट तैयार किया जा रहा होगा.?

लेकिन आप सभी बिल्कुल भी चिंतित नहीं होइए और अपने कामों में मस्त रहिए क्योंकि ये सभी जंगल में रहने वाले 
आदिवासी जो हैं, 
वीडियो में देखिए क्या वाकई में ये नक्सली हो सकतें हैं.?

छग में आदिवासियों को हक व अधिकार की मांग एवं जल जंगल जमीन की सुरक्षा करने का कुछ तो पुरूस्कार मिलना ही चाहिए, इसीलिए सरकार पुरूस्कार स्वरूप नक्सली का ताज या मुठभेड़ों के जरिए मौत दे रही है। 

 गिरफ्तार किये गये आदिवासीयों के वोटर कार्ड और आधार कार्ड .

आदिवासी होने का दंश तो झेलना ही होगा, ऊपर से तुर्रा ये कि जल जंगल जमीन की रक्षा व सुरक्षा के लिए पूंजीपतियों उद्योगपतियों व सरकार की खिलाफत करने की हिमाकत भी करतें हैं।
यहां देखिए सरकार ने विकास की ऐसी नदी बहाई कि सारा कचरा गंगा में जमा हो गया, ऐसे पुल बनाए कि बनने के पहले ही गिर गये और अज्ञात ठेकेदार के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर दिया गया, सड़कें ऐसी बनाई कि साल भर में पांच बार थूकपालिश से इज्जत बचा रहे, इतने ज्यादा पेड़ लगाए कागज़ों में कि प्रदेश से छः प्रतिशत जंगल कम हो गया, इतना ज्यादा बोनस किसानों की दिया कि मारे खुशी के फंदे पर झूल गए। ऐसे कितने ही उदाहरण व प्रमाण है विकास के!
तर्क वितर्क को छोड़कर कुतर्क पर ज्यादा ध्याना दिया जाना नये व आधुनिक भारत का एक विचित्र व हास्यापद हथियार हो चुका है और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तो जमकर खुलेआम उपयोग हो रहा है।
पुलिस अधीक्षक से जिन नामों के बारे में सवाल किया गया था, उन्हीं नाम को दो दिन बाद नक्सली बना दिया जाना स्पष्ट करता है कि सरकार जल्द से जल्द आदिवासियों का सफाया करना चाहती है और इसके लिए कथित ‘नक्सली जामा’ कुतर्क व धोखाधड़ी व वाचाल रूपी गुप्त शस्त्र है,हालांकि गुप्त शस्त्र पहले था अब तो प्रत्यक्ष अथवा साक्षात शस्त्र है जिसे मानवाधिकार, संविधान और कानून तीनों की सुनने, देखने, समझने और महसूस करने की सभी नाड़ियों को काटकर अलग कर दिया है। वैसे भी मानवाधिकार तो बड़े रईस नेताओं व मंत्रियों के होतें हैं, गरीबों के लिए पुलिस की लाठी और जेल ही सबसे बड़ा मानवाधिकार है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार जिस तरह से पूंजीपतियों के लिए समर्पित होकर मूल निवासियों का सर्वनाश करने पर आमादा रही है, वो तो सबके सामने है ही, किंतु फिलहाल विगत छः महीने में अचानक अघोषित आदिवासियों के सफाई में तेज़ी आ गई है, पिछले छः महीने के आंकड़े देखकर खुजली मिटा सकते हैं।
इस तेज़ी आने का कारण, निकट आता चुनाव है। चूंकि इस बार रमन सरकार के हाथों से सत्ता की कुर्सी सरकती प्रतीत हो रही, ऐसे में मंशा यही होगी कि जो भी समय है उसका सदुपयोग करते हुए ज्यादा से ज्यादा आदिवासियों को निपटा दें ताकि सत्ता अगर इस बार ना भी मिले’ तब भी पूंजीपतियों व उद्योगपतियों एवं माफियाओं का सहयोग व समर्थन बना रहे। इसीलिए इस तरह की फर्जी गिरफ्तारियां एवं मुठभेड़ अधिक होते जा रहे। इस बीच में वास्तविक नक्सली मौका पाकर जवानों को मार दे रहे, सरकार चाहती भी ऐसा ही है ताकि जवाबी कारवाई के नाम पर आदिवासियों को, नक्सलियों को नहीं, ढेर किया जा सके।
 
वैसे देश का तथाकथित शिक्षित, उच्च स्तरीय जीवनशैली जीने वाले एवं सरकार के समर्थकों की नज़र में आदिवासी समुदाय, पिछड़ा अशिक्षित एवं आधुनिक समाज में अडजेस्ड करने लायक ही नहीं है। इन कथित नागरिकों की नज़र में प्रत्येक आदिवासी नक्सली या नक्सल समर्थक है,जो सरकार के कथित विकास का विरोधी है यानि देश के विकास में बाधक है। इनके लिए कोई भी तर्क वितर्क प्रमाण यथार्थ नहीं सिर्फ बकवास है, जिससे इन कथित आधुनीकियों को कोई मतलब नहीं है और ना ही कोई लेना देना।्
देश के नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा आदिवासियों को अपराधी व अभिशाप के रूप में देखता है। जब तथाकथित मानसिक विकारी नागरिक इन्हें मानव ही नहीं मानते अथवा समझतें तो फिर काहें का मानवाधिकार और कैसा अधिकार। सरकार ने इसीलिए तबके के ऐसे एक हिस्से को तैयार किया है, ये तैयारी आज की या चंद महीनों की नहीं है बल्कि बीस से पच्चीस सालों में तैयार की गई है, अब फसल पक चुकी है। देश की अंदरूनी हालात व सौहार्द बिगाड़ने का प्रपंच पिछले दसियों सालों से चल रहा, लेकिन इस हिस्से ने ऐसा माहौल तैयार किया कि सभी भयभीत हो गये और मुगालते में फसल के मालिकों के हाथ में सत्ता दे दी। तब से कैसा चल रहा है, ये आज सबके सामने है।
 
  घटना के बारे में एक बाराती का बयान –

फुल्लोड़ के एक ग्रामीण युवक ने बताया कि बारात वापस भैरमगढ़ थाने के पास तकरीबन 10 बजे पहुंची जहां बारातियों को उतार कर उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया। लगभग 2 बजे आसपास वर-वधु को छोड़ दिया गया। बाराती लगभग 50 की संख्या में थे बाकी लोग को छोड़ कर लगभग 26 बारातियों को थाने में ही रख लिया गया। जिसमें अधिकतर युवतियां शामिल हैं। 
 
  एसपी द्वारा 20 मई को दिया जवाब – 

ग्रामीण बारातियों को पकड़े जाने की खबर का बीजापुर पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग ने अफवाह बताते इस प्रकार की किसी भी घटना से इंकार कर दिया है। गर्ग कहते हैं कि किसी भी बाराती को पकड़ कर थाने में नहीं रखा गया है। 
 
… 19 मई 2018 हिमांशु कुमार की फेसबुक वाल से…

दो दिन पहले एक बारात शादी करने गदापाल गांव गई थी, कल सुबह बारात दुल्हन के साथ वापिस लौट रही थी। रास्ते में पुलिस ने बारात की गाड़ियों को रोक लिया। पुलिस ने छब्बीस बारातियों को पकड़ रखा है, इनमें 8 अविवाहित लड़कियां भी हैं। रात भर इन सब को थाने में सिपाहियों के कब्जे में रखा गया है। यह सभी लोग आदिवासी हैं, इनके गांव का नाम फुल्लोड़ हैं। इन्हें भैरमगढ़ थाने में कल सुबह 10 बजे पकड़ा गया था, रात भर इन्हें बीजापुर थाने में रखा गया है।
हो सकता है आपको बताया जाय कि पुलिस ने बड़ी बहादुरी के साथ हथियारबन्द माओवादियों को एक भयंकर मुठभेड़ में ढेर कर दिया, या मेरे लिखने के बाद मारना तो संभव ना हो तो खबर बनाई जा सकती है कि पुलिस ने बड़ी वीरता का परिचय देते हुए माओवादियों के एक बड़े ग्रुप को गिरफ्तार किया है। आजकल पुलिस वालों को इस तरह की फर्जी मुठभेड़ों और फर्जी गिरफ्तारियों पर बहुत बड़ा इनाम मिलता है। 

इसके अलावा छत्तीसगढ़ की सरकार भी आदिवासियों के दिलों में खौफ पैदा करने के लिए इस तरह के हरकतें कर रही है ताकि आदिवासियों की जमीनें छीनी जाए, आदिवासी विरोध ना कर सके। छत्तीसगढ़ सरकार बड़ी कंपनियों से पैसा खाकर बदले में आदिवासियों पर जुल्म कर रही है। भाजपा सरकार ने आदिवासियों की जिंदगी नर्क कर दी है।
पुलिस हिरासत में जो आदिवासी बंद है, उनके नाम नीचे दिए जा रहे हैं, उसके नीचे बीजापुर के एसपी का नंबर है, फोन करके पूछिए कि आखिर निर्दोष आदिवासियों को शादी ब्याह के मौके पर भी परेशान करने से पुलिस बाज क्यों नहीं आ रही.?
1. हिड्मु पिता दुला निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
2. मंगलू पिता आयतु निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
3. आयतु पिता चैतु निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
4. कोसा पिता जोगा निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
5. बामन पिता दुला निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
6. रमेश पिता पेद्दा निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला 
7. राजू पिता विज्जू निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
8. पडू पिता भीमा निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
9. कोसा पिता मडको निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
10. जोगी पिता बुदरू निवासी फुलोड़ थाना जंगला
11. मंगलू पिता चेटू निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
12. हिड्मु पिता उंगा निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
13. लिंगे पिता हिडमा निवासी पुटेनार पंचायत फुल्लोड़ थाना जंगला
14. बामन पिता पोद्या निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
15. बुधराम पिता बुरका निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
16. हिद्मु पिता भीमा निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
17. बोमरा पिता कुल्ला निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
18. मुन्ना पिता श्यामनाथ निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
19. बुधराम पिता सुकलू निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
20. जमली पिता बुरका निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
21. मंगलो पिता सन्तु निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
22. उंगो पिता कोसा निवासी पुटेनार पंचायत फुल्लोड़ थाना जंगला
23. मोती पिता हूंगा निवासी पुटेनार पंचायत फुल्लोड़ थाना जंगला
24. श्यामबती पति सुखराम वट्टी निवासी दरभा
25. कुमली पिता भीमा निवासी फुल्लोड़ थाना जंगला
26. 
लक्ष्मण पिता जग्गू निवासी फुलोड़ थाना जंगला
 
   बीजापुर एसपी का मोबाइल नंबर: +919479194400
… 20 मई 2018 को हिमांशु कुमार की फेसबुक वाल से…

कानून कहता है अगर पुलिस किसी को पकड़ेगी, तो 24 घन्टे के भीतर उस नागरिक को अदालत में पेश करेगी। जज उस व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दे सकता है या जेल मे रखने या फिर पूछताछ के लिये पुलिस को एक दो दिन के लिये सौंप सकता है।
अब छत्तीसगढ़ पुलिस की कहानी देखिये, पुलिस ने बारात में गये 26 आदिवासी लड़के लड़कियों को शुक्रवार को पकड़ा, इनमें आठ लड़कियां भी हैं। आज सोमवार है और आज तक पुलिस ने इन आदिवासियों को अदालत के सामने पेश नहीं किया है यानी तीन दिन से पुलिस ने इन 26 आदिवासियों को, जो अपनी हिरासत में रखा है, वह गैरकानूनी हरकत है और शुद्ध गुण्डागर्दी है। 

अखबार के पत्रकारों ने जब एसपी से इस बारे में पूछा तो एसपी ने कहा मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। साफ है एसपी झूठ बोल रहे है। 

इसका मतलब यह है कि छग की पुलिस न्यायालय को अपने जूते के तलवे के नीचे रखती है, कानून को अपने डंडे के नीचे रखती है और फिर देश के सामने दावा करती है कि पुलिस कानून की रक्षा कर रही है।
जो मूर्ख हैं वह पुलिस की बातों में आए, हम पुलिस को गुंडों का एक समूह मानते हैं, जो बड़े पूंजीपतियों की सेवा कर रही है और भारत के कानून को अगर किसी से खतरा है तो वह पुलिस ही है।
ऐ भारत के लोगों सरकार और पुलिस से अपने लोकतंत्र को बचाओ।
हिमांशु कुमार ने जो आशंका तीन दिन पहले फेसबुक पर पोस्ट कर जताई थी, वो काफी हद तक सही व सच साबित हुआ है। क्योंकि 21 मई को बीजापुर पुलिस द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी दी गई है।
 
21 मई 2018 बीजापुर पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति…

अलग-अलग घटनाओं में शामिल 13 नक्सली आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जिसमें जो जानकारियां दर्ज है वो असलियत बताने के लिए पर्याप्त है। 
 
– थाना कुटरू नैमेड़ एवं जांगला का मामला : 
थाना कुटरू अपराध क्रमांक 10/18
धारा 147, 148, 149, 395, 302, 506 ताहि…
दिनांक 24.04.2018 को दरभा सरपंच सोमारू माड़वी की हत्या एवं घर व दुकान से सामग्री व नगद राशि डकैती के मामले में शामिल 11 नक्सली आरोपियों को थाना कोतवाली बीजापुर, डीआरजी एवं कुटरू की टीम द्वारा पकड़ा गया।
   
 
थाना नैमेड़ अपराध क्रमांक 08/2018…
धारा 302, 307, 435, 431 ताहि, 3, 4 वि.प.अधि, 4 लो.स.क्ष. निवारण अधिनियम –
पकड़े गये आरोपी में हिडमों माड़वी पिता दुला उम्र 42 ग्राम तुमला नाला के पास दिनांक 09.04.2018 को मुव्हमेंट कर रही पुलिस पार्टी की बस को आईईडी ब्लास्ट करने की घटना में शामिल रहा है।
 
थाना जांगला अपराध क्रमांक 13/2018…
धारा 1947, 148, 149, 302, 120बी ताहि 25 आर्म्स एक्ट –
आरोपी हिडमो माड़वी, कोसा करटामी, मंगलू मड़काम, रमेश मड़कामी, आयतु माड़वी, राजू माड़वी दिनांक 26.04.2018 को जांगला के चौकीदार की हत्या में भी शामिल थे।
 
टीप : हिमांशु कुमार की लिस्ट के नाम, पुलिस द्वारा प्रेस रिलीज़ में कथित नक्सली बनाये गये नामों में एक ही हैं, हिमांशु कुमार द्वारा दी गई लिस्ट में उन नामों को लाल रंग में किया गया है ताकि आसानी से मिलान किया जा सकें!…
 
जावेद अख्तर ,सलाम छतिसगढ के लिये रिपोर्ट

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