कोयला खदान का विरोध करने के कारण अदानी कंपनी के दवाब में फर्जी शिकायत के आधार पर की गई बालसाय की गिरफ़्तारी . छतीसगढ बचाओ आंदोलन.

रायपुर  12 मई 2018

वनाधिकारों को मान्यता देने की बजाये आदिवासियों से उनके जंगल–जमीन को छीन रही हैं राज्य सरकार
सरगुजा जिले के अन्दर अदानी कम्पनी के दवाब में लगातार ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा हैं l ग्राम हरिहरपुर जनपद सदस्य एवं ग्रामीणों के आन्दोलन को नेतृत्व दे रहे बालसाय कोर्राम की गिरफ़्तारी भी इसी दिशा में हुई हैं, ताकि कंपनी के गैरकानूनी खनन कार्यो के विरोध को कुचल कर जंगल-जमीन की लुट को सुनिश्चित किया जा सके l गलत तरीके से वनाधिकार पत्र बनाकर मुवावजा हासिल करने की जिस शिकायत पर यह गिरफ़्तारी हुई हैं वह स्वयं ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षर के द्वारा कूटरचित दस्तावेज के आधार पर तैयार की गई थी जिसका ग्रामीणों द्वारा सरगुजा एस पी के यहाँ अपराध दर्ज करवाया हैं, परन्तु उस शिकायत पर कोई भी कार्यवाही नहीं हुई बल्कि उस झूठी शिकायत पर बालसाय की गिरफ़्तारी की गईं l

परसा कोयला खदान जिसमे 3 गाँव पुर्णतः विस्थापित किये जाने हैं उसके लिए कंपनी द्वरा बिना ग्रामसभा आयोजित किये ही भूमि अधिग्रहण किया जा रहा हैं, जबकि पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में बिना ग्रामसभा की सहमती के भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू भी नहीं की जा सकती l इसके पूर्व भी इस परियोजना के लिए वन भूमि के डायवर्सन हेतु जिला प्रशासन के आदेश पर बार बार ग्रामसभा आयोजित कर गाँव से प्रस्ताव हासिल किये गए इसका विरोध भी ग्रामीणों द्वारा व्यापक रूप से किया हैं l गिरफ़्तारी के दो दिन पूर्व ही ग्रामीणों ने बालसाय के नेतृत्व में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लिखित आपतियां दर्ज करवाई थी l स्पष्टरूप से यह गिरफ़्तारी ग्रामीणों के इस विरोध को समाप्त करने और संवैधानिक प्रावधानों को दरकिनार कर भूमि अधिग्रहण सम्पादित करने के उदेश्य से ही यह गिरफ़्तारी की गई हैं l

आज पुरे प्रदेश में वनाधिकार मान्यता कानून की स्थिति बहुत ही निराशाजनक हैं l बहुत ही कम लोगो को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र दिए गए हैं एवं सामुदायिक वनाधिकारों को तो मान्यता ही प्रदान नही की गई l खनन प्रभावित क्षेत्रों में तो वनाधिकार कानून के प्रावधानों की खुले आम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं l सरगुजा के ही परसा ईस्ट केते बासन खनन परियोजना के लिए राज्य सरकार ने ग्राम घटबर्रा गाँव के सामुदायिक अधिकार को कानून के विरुद्ध जाकर निरस्त कर दिया l राज्य सरकार मन मुताबिक इस कानून की व्याख्या कर लोगों को उनके वनाधिकार से वंचित कर रही हैं या जारी किये गए वनाधिकार पत्रकों को नियम विरुद्ध बिना किसी कारण के निरस्त कर रही हैं l वनाधिकार मान्यता कानून 2006 के अनुसार वनाधिकारों की मान्यता की प्रक्रिया की एक विधि हैं जिसका पालन प्रशासन को करना हैं l इसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपने हक़ की भूमि का दावा जमा करता हैं तो सर्वप्रथम वनाधिकार समिति के द्वारा वन विभाग और राजस्व अमले की उपस्थिति में उसकी जाँच होती हैं l जाँच उपरांत ग्रामसभा से प्रस्ताव पारित कर उपखंडस्तरीय समिति जिसके अध्यक्ष स्वयं एस डी एम् हैं, वह दावे का अनुमोदन करती हैं उसके बाद जिला स्तरीय समिति जिसके अध्यक्ष स्वयं कलेक्टर हैं तथा डी एफ ओं और आदिवासी विकास विभाग के परियोजना अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से अधिकार पत्र जारी होता हैं l इस प्रकार विधि के पालन और सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी हुए वनाधिकार पत्र फर्जी कैसे बन सकते हैं ? इसलिए छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन मांग करता हैं कि

1. इस सम्पूर्ण मामले की उच्चस्तरीय जाँच की जाये l
2. पूरे छत्तीसगढ़ में गैरकानूनी तरीके से निरस्त किये गए सभी वनाधिकार पत्रको को पुनः जारी किया जाये l
3. बालसाय कोर्राम सहित अन्य ग्रामीणों पर दर्ज सभी फर्जी केस वापिस लिए जाएँ l
4. परसा कोल ब्लाक हेतु गैरकानूनी भूमि अधिग्रहण को रद्द किया जाये l

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विजय भाई नंदकुमार कश्यप रमाकांत बंजारे रिनचिन आलोक शुक्ला
छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन

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