गंगलूर,बीजापुर (बस्तर) की रहने वाली नाबालिग आदिवासी लड़की को बिलासपुर के सिविल लाइन थाना में पदस्थ ASI और शिक्षक पत्नी ने 2वर्षो से बनाया था बंधक, बालिका के पिता ASI के कब्ज़े में, दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है.- सामाजिक जनसंगठन और अधिवक्ता गण .

 

बिलासपुर / 7.5.2018

 

आज पत्रकारो से दिव्या जैसवाल, अधिवक्ता  ,  प्रियंका शुक्ला,अधिवक्ता,निकिता,अधिवक्ता , नन्द कश्यप, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन और नीलोत्पल शुक्ल,PUCL ने चर्चा की .

3/05/2018 को पता चला कि शैलेन्द्र सिंह, ASI, सिविल लाइन्स, और उसकी पत्नी, शशि सिंह ( शिक्षिका,चकरभाठा) द्वारा लगभग 2 वर्ष पूर्व बीजापुर से एक आदिवासी लड़की को,जिसकी उम्र उस वक्त 16 वर्ष थी, अपने घर में नौकरी का वादा करके अपने साथ ले आये. दम्पत्त्ती द्वारा बालिका के माता पिटा को यह वादा किया गया कि वह लोग बालिका को बिलासपुर में  काम करने के लिए वेतन देंगे और साथ ही उसे पढ़ाएंगे,अच्छे से रखेंगे, कपडे भी देंगे। बच्ची के माता पिता ने जो की काफी गरीब हैं ने दंपत्ति पर विश्वास करके अपनी बेटी को उनके साथ बिलासपुर भेज दिया । लेकिन लाने के बाद हालत कुछ और ही हो गए. बच्ची के अनुसार, इन दो वर्षों में शैलेन्द्र सिंह और शशि सिंह ने बालिका के साथ अत्याचार करना शुरू कर दिया. उसे अपने घर में बंदक बनाकर रखा करते थे. उसे कहीं भी आने जाने नहीं देते और जब खुद कहीं जाते तो उसे घर में बंद करके जाते थे. उससे घर का सारा काम करते थे लेकिन आज तक उस काम का उसे एक रुपैया भी नहीं दिया गया है. यहाँ तक की इन दो वर्षों में उसे कभी भी अपने परिवार वालों से मिलने दिया गया, न उसे बीजापुर जाने दिया और फ़ोन पर कभी बात तक नहीं करने दी.  बच्ची दके साथ इस दंपत्ति का व्यवहार भायावयी था.

बच्ची ने यह भी बताया की उसे बिलासपुर लाने के कुछ दिन बाद से ही दंपत्ति द्वारा उसके साथ मार पिट करने लगे. वह उसे हर छोटी छोटी बात पर मारते पिटते । बच्ची ने बताया की एक बार, सफाई करते समय कहीं थोड़ी धुल रह गयी थी तो शशि सिंह के उसके चेहरे पर लात से मारा.

यह खबर तब सामने आई जब बच्ची के साथ हो रहे अत्याचार की सूचना हेमलता नाम की एक महिला द्वारा महिला हेल्पलाइन को दी गयी, जिसके बाद महिला हेल्प लाइन ने सखी केंद्र के लोगो को संपर्क करके बच्ची को ASI शैलेंद्र सिंह के घर से ताला तोड़कर छुड़वाया। छुड़वाने पर बच्ची की हालत बेहद गंभीर पाई गई। उसकी बायें आँख खून के थक्के से भरी हुई थी, आंखों के नीचे-ऊपर काला हो गया था, और दायां गाल भी काला पड़ा हुआ था । दाएं हाथ की छोटी उँगली सूजी व टेढ़ी पड़ी थी और बच्ची लगातार रोये जा रही थी। लड़की का MLC भी काराया गया है जिसमें इन चोटों का साफ़ साफ़ वीरान किया गया है और कारण भी अंकित है की यह छोटे मारने के कारन आई है.

 

शुरुवात में पुलिस इस केस में मदद कर रही थी, लेकिन शाम होते होते पुलिस विभाग द्वारा मामले को रफा दफा किये जाने की कोशिश होने लगी। अगले दिन तक एफ.आई.आर दर्ज नही हुई थी। 4.5.2018  को जब हममें से कुछ लोग लड़की के साथ थाना गए , तब काफी मशक्कत के बाद रात 9 बजे के आस पास कार्यवाही के तौर पर एक FIR दर्ज हो सकी। आवेदन में साफ लिखा था कि ये मामला मानव तस्करी का है और आरोपी सरकारी कर्मचारी है तो 370(7) IPC के अलावा चुकी बच्ची की उम्र उस वक्त 16साल थी, जब उसको झूठ बोलकर बिलासपुर लाया गया, इसलिए Juvenile Justice Act 2015 की धारा 75, 79भी लगेगा, SC ST Atrocities Act भी लगेगा . तो सिरगिट्टी (घटना क्षेत्र का थाना) थाने का थानेदार बोले कि मानव तस्करी का मामला नही बनता है, फिर जब उनसे काफी बहस हुई तो वो बोले कि माँ बाप के बयान के बाद ही ये धारा जुड़ सकेगी। दूसरा कि जब तक राडियोलोजिस्ट वाली रिपोर्ट नही आती,तब तक J J act वाली धारा भी नही लग सकती। अंत मे 342, 294, 506,504,34 IPC व SC-ST act के अंतर्गत FIR दर्ज हो सकी है। FIR दर्ज होने के बाद से हमारे द्वारा लगातार युवती के परिजनों से सम्पर्क करने का प्रयास जारी था, परंतु संपर्क नही हो पा रहा था। परसो तक कुछ भी पता नही चल सका था। कल जाकर हमें सूत्रों के द्वारा पता चला कि युवती के पिता को कोई झूठ बोलकर ले गया है, उन्हें किसी व्यक्ति द्वारा कहा  गया कि चलो अपनी बेटी को ले आओ, और घर वालो के सामने ये झूठ बोला कि युवती ( पीड़िता) को दंतेवाड़ा लेकर आ गए है जबकि युवती उस समय और आज तक बिलासपुर में है।

 

यह भी पता चला कि युवती के पिता परसो से ही बिलासपुर के लिए निकल गए है, और साथ के व्यक्ति का नाम और नम्बर बताने को मना भी किया है। युवती के पिता चन्नू पुनेम से किसी तरह सम्पर्क करने पर युवती के पिता व उनके साथ एक अन्य व्यक्ति लछु हेमला ने बताया कि वो साहब(ASI ) के घर पर है, और बातचीत से दबाव में लगे और कहने लगे कि हमे साहब से दुश्मनी नही चाहिए। जिसके बाद उनके द्वारा फोन काट दिया गया और फोन बंद कर दिया।

इस घटना से साफ पता चलता है कि आरोपी दंपत्ति को सम्बंधित थाना और उसका विभाग बचाने में जुटा हुआ है। हमें डर है कि घर वालो को धमका कर उन पर दबाव बनाकर मामले जो रफा दफा करा जा सकता है।

 

यह एक अकेली घटना नहीं है,  यह भी सुनने में आ रहा है कि शैलेन्द्र सिंह व उसकी पत्नी शशि सिंह के खिलाफ दंतेवाड़ा में पदस्थ रहने के दौरान भी कई मामले सामने आए थे। जिनमे से एक मामले की जांच तो खुद दंतेवाड़ा के पदस्थ अपर कलेक्टर लीना मंडावी जी के द्वारा की गई थी। जिस वक्त दंतेवाड़ा में यह सब घटनाये शैलेन्द्र सिंह व उनकी पत्नी शशि सिंह के द्वारा घट रही थी, उस वक्त ये दोनों सुरभी कॉलोनी, क़वार्टर नम्बर 97,दंतेवाड़ा में रहते थे। कई मामलों में से एक मामले में इन दोनों ने एक आदिवासी के बच्चे को अपने पिता के पास बंधुआ के तरह रखा था व एक अन्य युवती जिसका नाम सविता हेमला है, उसको अपने पास कई साल तक रखा था, मामला सामने आने पर क्षेत्रीय लोगो द्वारा शिकायत करी गयी थी। दंपत्ति के खिलाफ ये शिकायते लगातार चलते आ रही है। 

इस तरह की लगातार घटना को अंजाम देना और आरोपी का बच निकलना पूरे के पूरे व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

ये घटनाएं गरीब व आदिवासियों शोषण की एक कड़ी मात्र है, जिसमे आदिवासियों की आर्थिक कठिनाइयों का फायदा उठाकर शैलेन्द्र सिंह व शशि सिंह जैसे न जाने कितने शहरी लोग आदिवासियों के सिधाई व गरीबी का फायदा उठाते हुए,एक अच्छे जीवन की झूठी तस्वीर बनाकर आदिवासियों को अपने घरों में नौकरी के नाम पर उनके अधिकारों का हनन व प्रताड़ना करते है।

इस पूरे मामले में हम पहले दिन से आज तक नजर बनाए रखे हुए है, जिसके बाद यह महससू हुआ कि मामला सिर्फ एक बच्ची का नही, बल्कि कई बच्चियों का है और सीधा सीधा मानव तस्करी व बंधुआ मजदूरी का भी है।

जिसके चलते हम इस मामले को बतौर मानवाधिकार कार्यकर्ता राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करने जा रहे हैं। साथ ही हम इस मामले की शिकायत हम राष्ट्रीय जनजाति आयोग और “छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकार” में करेंगे।

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