पत्थरगढ़ी पर टूटा कहर : जय श्री राम , भारत माता की जय ,वन्दे मातरम के नारे लगाते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने आदिवासियो की परंपरागत पत्थल गढ़ी को तोड़ दिया .आदिवासियो ने अधिकारीयों को घेरा .स्थिति बन गई थी तनावपूर्ण .

 

समाज को तोड़ने की कोशिश करोगे तो हम दल बल सहित आक्रमण कर देंगे .: भाजपा नेता का बयान 

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29.04.2018
जशपुर नगर {. छतीसगढ }

 

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कल जशपुर के बटुंगा गांव मे अजीव स्थिति पैदा हो गई ,जब भाजपा की बच्छरांव से निकाली गई सद्भभावना यात्रा के लोग जय श्री राम और वन्देमातरम ,भारत माता की जय के नारे लगाते हुये कुछ दिन पहले गाँव के आदिवासीयों द्वारा लगाई गई पत्थल गढ़ी को तोड़ दिया और लोगों के साथ मारपीट भी किया ,पत्थलगढ़ी पर हमले को देखते हुए बडी संख्या में आदिवासी एकत्रित हो गए और अप्रिय स्थिति बन गई ,पुलिस मौके पर पहले से ही मौजूद थी ,तो गम्भीर स्थिति बनने से बची .लेकिन आदावासीयों ने पुलिस एसडीओपी ,एसडीएम तथा अन्य कर्मचारियों को तीन घण्टे रोके रखा और माँग की ,कि कलेक्टर यहां आकर अपराधियों पर कार्यवाही करें. भारी तनाव पैदा हो गया . दो जगह पत्थरगढ़ी को तोड़ा गया.

ऐसा  कहा जाता हैं कि रैली में मौजूद केन्द्रिय मंत्री  के मुंह से पत्थरगडी के संदर्भ में निकला
“यह सब असंवैधानिक है, हटाओ इसको”
और इसके ठीक बाद मंच से एक महिला नेत्री ने ऐलान किया
“हम ये पत्थलगढी तोड़ेंगे”

पत्थर गड़ी तोड़कर जश्न मनाते भाजपाई 

अधिकारीयों को देर रात तक रोके रखा और तीन मांग रखी .

आकोशित आदिवासीयों ने प्रशासन के लोगों को रात दो बजे तक गांव में ही रोके रखा ,कलेक्टर तो नही पहुची लेकिन सीएसपी आदि ने पहुच कर मांगो को पूरा करने का आश्वासन दिया तब जाकर पुलिस और अन्य अधिकारी गांव से बाहर निकल सके.

आदवासियों की मांग थी .
1 पत्थर गड़ी को तोड़ने वालों के खिलाफ अपराध दर्ज किया जाये और अपराधियों को गिरफ्तार किया जाये.
2. पत्थर को दुबारा उसी स्थिति मे गाड़ा जाये

3. जिला शासन ने पत्थर को गाड़ने के खिलाफ जो नोटिस दिया है उसे तुरंत वापस लिया जाये .

सद्भावना यात्रा या तोड़ने के लिए लोगों का हुजूम .

भाजपा ने जशपुर के पत्थलगढ़ी वाले बच्छरांव और आसपास के पन्द्रह गाँव मे सद्भवना यात्रा आयोजित की थी ,जिसमे केंद्रीय मंत्री विष्णु देव ,राज्यसभा सदस्य रणविजय. सिंह जूदेव , दिवगंत सांसद दिलीप सिंह जू देव के बेटे प्रबल प्रताप सिंह ,स्थानीय भाजपा के तीन विधायक और अन्य भाजपा के लोग बडी संख्या मे शामिल थे . यात्रा के पहले ही भाजपा के नेताओं ने पत्थल गढ़ी की मुहिम को नक्सली और मिशनरी की पहल के रूप में प्रचारित कर दिया था जिसे मीडिया ने हवा देकर इसे विवादस्पद बना दिया ,कांग्रेस सहित विभिन्न जन संघठनो ने बयान देना शुरू कर दिया था. इसके बाद ही यह झग़डे की आशंका बन गई थी .

अभी कुछ दिन पहले जशपुर और सरगुजा के कुछ गांव में आदिवासियों ने अपनी परंपरागत पत्थरगढ़ी के रूप में संविधान के प्रावधानों को लिख कर गाड़ दिया था ,यद्यपि लिखे गये कुछ शब्दों पर भाजपा के नेताओ को आपत्ति थी वे इसे संविधान के खिलाफ बता रहे थे , छतीसगढ कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल इसे सरकार की विफलताओं के खिलाफ विद्रोह जैसी बात कह रहे थे , वहीं भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष खुद पत्थर गाड़ रहे थे और घोषणा कर रहे थे कि सरगुजा के कई गांवों मे एसे पत्थर गाड़ेगे ., मीडिया ने इसे सनसनी बनाने में प्रमुख भूमिका अपनाई और उसे ईसाइयों तथा माओवादीयों से जोड दिया,कहा गया कि माओवादियों के लिये खाद तैयार किया जा रहा हैं .

सबसे प्रमुख भूमिका जशपुर महल के जू देव परिवार ने इसे ईसाइयों की धर्म परिवर्तन से9o जोड दी और आदिवासीयों के संवैधानिक पहल को विवादास्पद बना दिया ,कभी कहा गया लातों के भूत बातो से नही मानते तो कभी कहा कि ” समाज को तोडने की कोशिश करोगे तो हम दलबल सहित आक्रमण कर देंगे “

 

पत्थर गडी को तोड़ते हुये भाजपाई 

छतीसगढ के मुख्यमंत्री से लेकर ग्रहमन्त्रि तक ने बयान दिये ,उन्होंने भी यही कहा कि आदिवासियों की भड़काया जा रहा है ,उनके वक्तब्य ने भी स्थिति को नियन्त्रण करने की जगह विरोधियों को ही हवा दी .

वीडियो देखकर एसा लगता हैं जैसे पत्थर गड़ी को तोड़ कर् उन्माद में नाच रहे हैं और उत्तेजक नारे लगा रहे हैं .
स्थिति बेहद गम्भीर है आदवासी बहुत नाराज़ है ,सरकार को चाहिये कि तोड़ी गई पत्थर को दुबारा लगाया जाए उसमे जो लिखा गया है यदी कुछ संविधान के विरूद्व है तो उसे हटाया जाये,लेकिन पांचवी अनुसूचित ,पेसा और वनाधिकार कानून की धाराओं को बना रखा जाये .

आदिवासीयों का सिर्फ यह कहना हैं कि जो अधिकार संविधान ने उन्हें दिये हैं उनका पालन सरकार करे ताकि उनके जल जंगल जमीन सुरक्षित रह सकें.

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