जनपक्षधरता रचनाकार को बड़ा बनाती है प्रस्तुति: अनुपम भट्ट

16 अप्रैल, 2018

बिजूका .कॉम से  आभार सहित 
”अल्पना मिश्र अपनी कहानियों में पाठक के लिए स्पेस बनाती हैं. मतलब यह कि उनकी कहानियों में ऐसे बिंदु तेजी से आते हैं जो पाठक से उम्मीद करते हैं कि वह लेखक द्वारा छोड़ी गई जगहों को खुद भरेगा. यह अपने आप में पाठक को जोड़ने और उसकी कल्पना शक्ति को सक्रिय करने का जतन है…. ।

अल्पना मिश्र का रचना संसार काफी फैला हुआ है, उसे केवल नारी अस्मिता का रचना संसार कहना उचित नहीं होगा….। कहानी के फार्म को लेकर भी उनकी कहानियों पर बात करनी चाहिए….”- असगर वज़ाहत

” जनपक्षधरता किसी भी रचनाकार को बड़ा बनती है जो अल्पना मिश्र के कथा संसार की बड़ी विशेषता है। उनके द्वारा हिंदी कथा संसार को दिये गए एक नए कथा शिल्प, एक नई कथा संरचना के लिए मैंने एक शब्द दिया है- ‘निओ
एसरडीटी’…. ”-कथाकार संजीव

”दुनिया का हर बड़ा रचनाकार अनकन्वेंशनल होता है…. असंबद्धता ब्रेख्त, सैमुअल बैकेट को अलग और विशेष बनाती है, हिंदी में यह विशेषता अल्पना मिश्र के कथा साहित्य में बड़े गहरे रूप में दिखाई पड़ती है, जो उन्हें
अपने दौर के अन्य लेखकों से अलहदा करती है. शिल्प के साथ साथ उनके यहाँ कथा संरचना में भी तोड़ फोड़ दिखाई पड़ती है….” – प्रेम भारद्वाज

”दुनिया के बड़े लेखकों ने अपने अनुभवों को बड़ा कैनवास दिया है, अल्पना मिश्र का निरंतर बेहतर लिखते रहना बेहद सुखद है। इनकी कथा भूमि व्यापक
है।इन्होंने अपने अनुभवों को लगातार बड़ा कैनवास दिया है…” – वैभव सिंह

”किसी अच्छी कहानी की विशेषता यह होती है कि वह पाठकों की स्मृति में अटक जाती है.अल्पना मिश्र की भी कई कहानियां हम पाठकों की स्मृति में अंकित हैं.वे किसी घटना पर फोकस नहीं करतीं बल्कि उनकी कहानियां अपने समय पर फोकस करती हैं…. मौन और अनुपस्थित की उपस्थिति को लिखना सबसे कठिन है, अल्पना मिश्र मौन और अनुपस्थित की उपस्थिति को मजबूती के साथ अभिव्यक्त करती हैं, यह उनके कथा साहित्य की खास विशेषता है…” – विवेक मिश्र

”लिखना दरअसल लड़ना है… हमें एक साथ कई बुलडोज़र रौंद रहे हैं….बिना माचिस और आग के तक्षशीला ज्ञान केंद्र को नष्ट करने की तैयारी अंतिम दौर में है । लेकिन गनीमत है कि सत्ता की क्रूरता के आगे साहित्य, संवेदना,
सरोकार, विचार और पहचान को बचा ले जाने की ज़िद अभी भी चंद लोगों में बची हुई है…. ” – अल्पना मिश्र

ये सभी कथन कथाकार अल्पना मिश्र की किताब दस प्रतिनिधि कहानियों के लोकार्पण और उस पर चर्चा के दौरान सामने आये। किताबघर द्वारा आयोजित इस
चर्चा का विषय था ‘नयी सदी का कथा संसार और अल्पना मिश्र’ आयोजन 31 मार्च को दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित हुवा। संचालन सुशील तिवारी ने किया और एक परचा भी पढ़ा जिसका लब्बो लुआब ये था कि भूमंडलीकरण के बाद समाज में हुए बदलावों को अल्पना मिश्र ने अपनी खास शैली और अंदाज़
में पकड़ने की कोशिश की है। नवीन नीरज ने अपने वक्तव्य में अल्पना मिश्र की भाषा शैली को रेखांकित किया। आरम्भ में ही नाट्य कलाकारों ने इनकी कहानियों के कुछ अंश भी पढ़े। इस आयोजन में कई रचनाकार मौजूद रहे जिनमे मंगलेश डबराल, प्रियदर्शन, योगेन्द्र आहूजा,मदन कश्यप, दिविक
रमेश,ज्योतिष जोशी, निखिल आनन्द गिरी, विवेकानंद , आकांक्षा पारे, रूपा सिंह, स्मिता आदि तथा बड़ी संख्या में अकादमिक वर्ग के बुद्धिजीवी व साहित्यप्रेमी युवा मैजूद थे।
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आभार  सहित 

 

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