“हिन्दुस्तान में हत्यारों की भीड़ रैपिड एक्शन फोर्स की तरह तैयार खड़ी है!” – रवीश कुमार

NDTV

13.04.2018

क्या बात है कोई मुझे कठुआ और उन्नाव रेप केस के लिए ललकार नहीं रहा है, जैसे बंगाल और केरल को लेकर ललकारते हैं? सारा तिरंगा जम्मू चला गया है क्या? एक सड़ी हुई राजनीति के बीमार लोगों से पूछता हूं कि वे कब तक यहां और वहां का मैच खेलेंगे।

कई महीनों से कह रहा हूं कि हिन्दू मुस्लिम डिबेट के नाम पर नफ़रत और ज़हर से लैस एक भीड़ तैयार है। ये आपके पड़ोस में पेड़ के कटे तने की तरह सूख कर पड़ी हुई है। ज़रा सी चिंगारी से ये भीड़ आग की तरह भभक उठती है। उत्तराखंड के अगस्त्यमुनि में तो बलात्कार की अफ़वाह उड़ी थी, भीड़ आग बन गई। अफवाह की कहानी बनाई गई कि मुस्लिम लड़के ने हिन्दू लड़की का बलात्कार किया है। झूठी कहानी। फिर भी लोग निकल गए और सलून, फोटोशॉप, हार्डवेयर और सब्जी वाले की दुकान जला आए क्योंकि दुकानदार मुसलमान थे।

जम्मू में तो आठ साल की मुस्लिम लड़की से बलात्कार हुआ, मंदिर में देवताओं के समक्ष हुआ, उनके सामने वो मार दी गई। उसकी लाश सबको दिखी। भीड़ यहां भी बनी लेकिन बलात्कार की शिकार बेटी के लिए नहीं, आरोपी हिन्दुओं के पक्ष में। उनके लिए तिरंगा लहराया गया, जय श्री राम के नारे लगे और भारत माता की जय बोला गया।

यह भीड़ मुसलमान खोजती है। मुसलमान के नाम पर आपको केरल बंगाल के किस्से दिखाकर ललकारती है। इसका इंसाफ से कोई ताल्लुक नहीं है। दिल्ली में दो लड़के बस में जा रहे एक इमाम की दाढ़ी पकड़ लेते हैं, उससे जय माता दी और जय श्री राम बोलने के लिए कहते हैं। कहानी साफ है। हिन्दू मुस्लिम डिबेट से एक ऐसी भीड़ तैयार कर दो जो किसी मुसलमान को देखते ही ट्रिगर हो जाए। एक बटन दबाते ही उसके भीतर से कई गोलियां निकल पड़े।

मैं इसी नफ़रत के ख़िलाफ़ लगातार बोल रहा हूं। हिन्दुओं से कह रहा हूं कि आपके बच्चों को दंगाई बना दिया गया है। वे कभी भी दंगा कर सकते हैं, कभी किसी को मुसलमान के नाम पर मार सकते हैं। वो एक दिन किसी हिन्दू को भी मुसलमान समझ कर मार देंगे। जैसे आज राजपूत की बेटी मुसलमान हो गई है। आरोपी विधायक हिन्दुओं का चेहरा हो गया है।

अब बहुत देर हो चुकी है। इस भीड़ से अब कोई नहीं बच पाएगा। जो शामिल है वो भी नहीं, जो नहीं है, वो भी नहीं। अब या तो ये भीड़ आपको मार देगी या फिर किसी को मारने के लिए अपने साथ खींच कर ले जाएगी। या तो आप हत्या करेंगे या फिर आप हत्या का समर्थन करेंगे। यह भीड़ अब खुद को संविधान से ऊपर समझती है क्योंकि जय श्रीराम का नाम लेती है।

जिन मां बाप ने मेरी बात हल्के में ली, एक दिन उनके बच्चे किसी आठ साल की बच्ची का रेप कर लौटेंगे या फिर रेप होने की अफवाह पर किसी की दुकान जला कर लौटेंगे। एक आदमी के राज करने के शौक़ के पीछे हिन्दुस्तान में हत्यारों की भीड़ हर जगह रैपिड एक्शन फोर्स की तरह खड़ी कर दी गई है। जनता घर में मरी पड़ी, टीवी के एंकरों के हिसाब से सोच रही है। जनता को भी बेहोशी की दवा खिला दी गई है। वो कहां जाए।

एक छोले भटूरे खाने के बाद उपवास कर रहा है, एक बलात्कारियों को बचा कर उपवास कर रहा है। आप तराजू लेकर तौलते रहिए। दो दिन पहले गांधी के नाम पर करोड़ों की रैली करने वाले गांधी के नाम पर उपवास की सादगी पेश कर रहे हैं। महान नेतृत्व की क्षमता से लैस जिस आदमी से अपने दो मंत्रियों के ख़िलाफ़ नहीं बोला गया जो बलात्कार के आरोपियों के साथ खड़े हैं, वह उपवास के क्षणों में किस पर हंसता होगा। उसकी हंसी में छोले की मिलावट होगी या भटूरे का स्वाद होगा। पूछिए तो उपवास के क्षणों में वह किसका साक्षात्कार कर रहा होगा।

और आप क्या कर रहे हैं। अब आप कुछ नहीं कर सकते, तभी तो चुप है। आप धीरे धीरे अपने भीतर क्रूरताओं को सामान की तरह भरते जा रहे हैं। जैसे हिला हिला कर टिन में आटे के लिए जगह बनाते हैं, वैसे ही आप अपने भीतर एक और क्रूरता, एक और हत्या के लिए जगह बना रहे हैं।

आप सिर्फ मुस्लिम बेटी के लिए ही चुप नहीं है, आपसे राजपूत की बेटी के लिए भी नहीं बोला जा रहा है। आपके भीतर भी बेहोशी की वही दवा है जो उस आठ साल की बेटी को दी गई। केरल बंगाल क्या करना, वहां की हिंसा और यहां की हिंसा कब तक तौलिएगा।

हिंसा से घर घर भर दिया गया है। किसी के हाथ में तलवार है, किसी के दिमाग़ में नफ़रत । एक हत्या करता है, एक हत्यारे को बचाता है। मरे हुए समय में तिरंगा आसमान में नहीं, “हत्यारों के हाथ में क्यों लहरा रहा है?

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