न्याय व हक के लिए तरसते गरीब आदिवासी व किसान, खरसिया में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन : 10 अप्रेल तक करें मांगे पूरी नहीं तो आंदोलन और अनशन की घोषणा .

 जावेद अख्तर, सलाम छत्तीसगढ़...

रायगढ़ (06 अप्रैल 2018)।

 रायगढ़ जिले के खरसिया विधानसभा में व्याप्त विभिन्न जनहित की समस्याओं को लेकर 10 सूत्रीय मांग पत्र कलेक्टर रायगढ़ व अन्य को छत्तीसगढ़ मूलनिवासी संघर्ष समिति एवं सर्व आदिवासी समाज ने प्रस्तुत किया। ज्ञापन पर गौर करें तो एक बात साफतौर पर समझी जा सकती है कि छग में गरीब आदिवासी एवं किसान खुद का हक एवं मामलों में न्याय के लिए तरस रहें हैं। न्यायालयों एवं आयोगों से तो न्याय मिल जाता है किंतु हक अथवा कब्ज़े के लिए सालों साल पुलिस थाना और प्रशासनिक जिम्मेदार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं। ऐसा भी नहीं है कि सरकार के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री एवं विभागीय मंत्री से लेकर ब्यूरोक्रेसी इससे अनजान या बेखबर हों। ऐसे अधिकांश मामलों में पीड़ित द्वारा आदेश के साथ हक अथवा कब्ज़ा दिलाने वास्ते आवेदन, जनदर्शन से लेकर लोक सुराज समाधान शिविर तक में प्रस्तुत करते हैं किंतु सौ में से एकाध मामले में ही हक मिल रहा शेष पीड़ित इधर से उधर आदेश की प्रतियां लेकर परेशानी से घूम रहे या फिर खुद के मूल निवासी आदिवासी अथवा किसान होने को कोस रहे। भले चाहे एसी कक्ष में बैठे मंत्रियों, संत्रियों से लेकर धनाढ्य वर्ग को विश्वास ना हो लेकिन जमीनी हकीकत ऐसी ही भयावह है, या शायद भयावह से भी ज्यादा बदतर है। 

 

 

 

 

  आदिवासी व किसानों पर बढ़ते अत्याचार –

विदित हो कि विगत दो सालों से निरंतर रायगढ़ समेत खरसिया क्षेत्र में भू-माफिया, कंपनियों एवं दलालों द्वारा आदिवासियों की भूमियों पर जबरिया तथा कई सौ एकड़ भूमि पर फर्जी दस्तावेज़ बनाकर कब्ज़ा कर लिया गया। यहां तक कि दर्जनों कंपनियों ने भू अधिग्रहण का उल्लंघन कर एवं बिना मुआवज़ा दिए धन व राजनीतिक पहुंच के बल पर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से सांठगांठ कर वास्तविक भू-स्वामियों को जमीन से बेदखल कर दिया। यहां तक कि पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करवा कर वास्तविक भू स्वामियों की आवाज़ को दबाने का घृणित कृत्य किया गया। कई मामले राष्ट्रीय मानविधाकार, अजा व अजजा आयोग एवं हाईकोर्ट तक गये।

 आयोग व पीएमओ का आदेश भी रद्दी, नहीं किया आज तक पालन – 

राष्ट्रीय मानविधाकार, राजस्व मंडल एवं एससीएसटी आयोग, न्यायालय के समकक्ष माना गया है, द्वारा आदेश आदिवासियों के हक में आया और ये भी माना गया कि मूल निवासियों के अधिकारों का हनन करते हुए जबरिया जमीनों पर कब्ज़ा किया गया, भूअर्जन का पालन नहीं किया गया, मुआवज़ा नहीं दिया गया, अधिग्रहण नीति का पालन नहीं किया और यहां तक कि पूंजीपतियों के लिए पुलिस व प्रशासनिक अफसरों ने प्राप्त संवैधानिक अधिकारों का दुरूपयोग किया, बताया गया।

  सरकार व अफसरों को शर्म क्यों नहीं आती? –

हालात इस कदर बदहाल है कि मूल निवासियों के पक्ष में आए आयोग, हाईकोर्ट एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेशों का पालन सरकार द्वारा नहीं किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण एवं अत्यंत शर्मनाक है। क्या रमन सरकार इसी आधार पर खुद को आदिवासी समुदाय का हितैषी बताती है, क्या इसी आधार पर चौदह साल बेमिसाल का नारा देती है कि हजारों आदिवासियों के पास खुदखुशी के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचता है।सरकार का ये कृत्य निंदनीय है।
पीड़ित भू स्वामियों के पास खेती किसानी के अलावा आय का कोई अन्य स्त्रोत नहीं होने से परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच चुका है।

वहीं पीड़ितों का कहना है कि हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि हम कोर्ट में हाजरी लगाने पहुंच सके। वैसे भी जब प्रधानमंत्री कार्यालय, हाईकोर्ट, राजस्व मंडल और एससीएसटी आयोग द्वारा स्पष्ट रूप से आदेशित करने के बाद भी आज तक कारवाई नहीं होने से हम सभी इस कदर त्रस्त और बेहाल हो चुकें हैं कि अगर जल्द ही हमें हमारी भूमि वापस नहीं की गई या अधिग्रहण व भूअर्जन का पालन कर मुआवज़ा एवं नीतिगत निर्णय नहीं किया गया, तो हम सभी के पास सामूहिक रूप से आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। 

  हजारों आदिवासियों द्वारा आत्महत्या करने पर शायद सरकार सुने फरियाद – 

इससे पीड़ित आदिवासी एवं गरीब किसानों के पास उग्र आंदोलन अथवा आत्महत्या के सिवाए कोई भी विकल्प नहीं है। सीएम हाउस और राज्यपाल भवन के सामने हजारों आदिवासी एवं गरीब किसानों द्वारा एकसाथ आत्महत्या करने पर शायद सरकार को हमारी परेशानियों एवं कठिनाइयों का अंदाज़ा हो जाए, हम वर्षों से किस पीड़ा में जी रहे, अहसास हो सके और शायद हम सबकी खुदखुशी के बाद हमें न्याय मिल जाए। या फिर शायद पूंजीपतियों को खुशी मिल जाए।

    प्रतिलिपियां भेजी गई – 

उक्त मांग पत्र की कॉपी रायगढ़ पुलिस अधीक्षक, एसडीएम खरसिया, एसडीओपी खरसिया को भी दिया गया, साथ ही उक्त मांग पत्र की प्रतिलिपि महामहिम राज्यपाल छग शासन, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह छग शासन, अजजा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकुमार साय, केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी, पूर्व मुख्यमंत्री छग अजीत जोगी, रायगढ़ सांसद एवं केंद्रीय इस्पात राज्यमंत्री विष्णुदेव साय, खरसिया विधायक उमेश पटेल सहित विधि विधायी विभाग छत्तीसगढ़ शासन को भी प्रेषित किया गया है।

    लोकसुराज में दिया मांग पत्र – 

लोकसुराज समाधान शिविर खैरपाली खरसिया कैम्प में भी उक्त मांगपत्र सौंपते हुए समस्याओं के निराकरण का मांग किया गया था।

उक्त मांग पत्र में लिखा गया है कि वर्षों से खरसिया विधानसभा क्षेत्र के नागरिक विभिन्न समस्याओं से पीड़ित है जिनके निराकरण के सम्बंध में भी तहसील एवं जिलास्तर स्तर के अधिकारियों को अनेकों बार ध्यानाकर्षण कराते हुए जनहित के विभिन्न समस्याओं के निराकरण का निवेदन करने के बाद भी किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं होने से, जहां आरोपियों के हौसले बुलंद है वहीं आम आदमी अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भी अनेको बार विभिन्न समस्याओं के निराकरण हेतु निवेदन करने पर भी मात्र कोरा आश्वासन ही मिला है इसलिए छत्तीसगढ़ मूलनिवासी संघर्ष समिति एवं सर्व आदिवासी समाज के कार्यकर्ताओं के द्वारा हजारों क्षेत्रवासियों से सलाह मशविरा के बाद क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण हेतु स्वयं आंदोलन करने का निर्णय लिया है। 

   दस सूत्रीय मांग इस प्रकार है –

1). आदिमजाति विकासखंड खरसिया के अंतर्गत ग्राम कुनकुनी के बहुचर्चित 300 एकड़ आदिवासी जमीन घोटाला में प्रधानमंत्री कार्यालय से कार्यवाही हेतु आदेश एवं  जिला प्रशासन द्वारा राज्य सरकार को कार्यवाही हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत होने एवं तात्कालिक एसडीएम द्वारा स्थगन आदेश के वर्षों बाद भी आजतक न तो आदिवासी किसानों को 170 ख अथवा बेनामी अंतरण अंतर्गत उनकी भूमि वापस की गई है, बल्कि उल्टे उद्योगों द्वारा धड़ल्ले से कार्य जारी है, जिस पर कार्यवाही किया जाए।

2). खरसिया से धरमजयगढ़ तक प्रस्तावित विशेष रेल-कारीडोर परियोजना में भुर्जन, मुआवज़ा, बोनस वितरण में किये गए गड़बड़ी एवं नवीन भुर्जन अधिनियम 2013 का पालन नहीं किया गया है, जिससे वास्तविक भूमिस्वामियों को मुआवजा एवं बोनस के लिए दर-दर की ठोकर खाना पड़ रहा है, जिससे किसानों के सामने आत्महत्या जैसी स्थिति उतपन्न हो गया है’ जिसकी सीबीआई से जांच किया जाए, दोषी अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए पीड़ित किसानों को मुआवज़ा एवं बोनस का भुगतान करते हुए आदर्श पुनर्वास नियम शीघ्र लागू किया जाए।

3). पलगड़ा खरसिया से ओड़िसा बार्डर तक निर्माणाधीन नेशनल हाइवे में स्वीकृत प्राक्कलन के विपरीत पेटी कांट्रेक्टरों द्वारा कार्य किया जा रहा है, जिससे केंद्र सरकार को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। उक्त नेशनल हाइवे में भुर्जन के दौरान भी व्यापक गड़बड़ी किया गया है। नेशनल हाइवे क्रमांक-49 में डीबी पॉवर से सांठगांठ करते हुए ग्राम कुनकुनी के ढोलपहरी पी.एफ. क्रमांक-1189 को काटकर सुरंगनुमा सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जहां एप्रोच रोड भी नहीं बनाया गया है जिससे आये दिन दुर्घटना घटित हो रही है। जिससे सरकार को करोड़ों की आर्थिक क्षति हो रही है, मामले की सीबीआई जांच कराया जाए एवं दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही किया जाए।

4). डीबी पॉवर कम्पनी द्वारा रजघट्टा, कुनकुनी से बाड़ादरहा डभरा तक हजारों पेड़ो की बलि दी गई है, पर्यावरणीय जनसुनवाई भी नहीं कराई गई, जिसकी जांच कर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही किया जाए।

5). खरसिया विधानसभा क्षेत्र में हजारों एकड़ आवंटन एवं कोटवारी भूमि की खरीदी-बिक्री माफियाओं द्वारा किया गया है, जिसको शून्य घोषित कर उक्त भूमि को शासकीय घांस भूमि मद में शामिल किया जाए।

6). खरसिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आदिमजाति सेवा सहकारी समितियों में प्रबंधकों एवं राजस्व अधिकारियों के मिलीभगत से हजारों एकड़ कृषि भूमि का रकबा बोगस तरीके से बढ़ाकर उक्त भूमि के कोचियों एवं राइसमिलरों का धान खरीदी-बिक्री कर करोड़ों की राशि प्राप्त करने के साथ  करोड़ों रूपये की राशि बोनस के रूप में आहरण कर, राज्य सरकार को राजस्व क्षति पहुंचातें हुए धोखाधड़ी किया गया है, जिसके दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए आपराधिक मामला दर्ज किया जाए एवं आहरित राशि को वसूल किया जाए। 

7). खरसिया विधानसभा अंतर्गत खरसिया रेलवे कोल साइडिंग, एसईसीएल कोल साइडिंग राबर्टसन, वेदांता कोल साइडिंग कुनकुनी, राजन कोलवाशरी छोटे डूमरपाली, स्काई एलयांज टेमटेमा, रूखमणी पॉवर रानीसागर, केएल एनर्जी देहजरी, एसकेएस दर्रामुड़ा, विमला साइडिंग भूपदेवपुर सहित अन्य कोल साइडिंग एवं कोल डिपो के द्वारा अवैधानिक रूप से जल दोहन, पर्यावरण प्रदूषण, ओवरलोड परिवहन किया जा रहा है, जिससे आम नागरिक परेशान है, आये दिन होने वाले दुर्घटना एवं उक्त उद्योगों द्वारा स्थानीय बेरोजगारों के साथ छलावा से स्थायी रोजगार नहीं देने से युवाओं में आक्रोश है इनके विरूद्ध कठोर कार्यवाही किया जाए।

8). खरसिया विधानसभा अंतर्गत संचालित विभिन्न क्रेशरों एवं गिट्टी खदानों द्वारा आदिवासियों की भूमि पर अवैध खनन एवं विस्फोटकों का भारी मात्रा में उपयोग किया जा रहा है, साथ ही पर्यवरण प्रदूषित करते हुए जानलेवा गड्डा खदान को छोड़ दिया गया है। जिनके विरूद्ध ठोस कार्यवाही किया जाए।

9). माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत खरसिया में विभिन्न स्थानों और तम्बाखू मिश्रित पदार्थ गुड़ाखु का निर्माण एवं विक्रय किया जा रहा है, जिससे लोगों में कैंसर की बीमारी हो रही है साथ ही उक्त फैक्ट्रियों के गंदे पानी से मृदा एवं जल प्रदूषण हो रहा है। जिस पर तत्काल रोक लगाते हुए कठोर कानूनी कार्यवाही किया जाए।

10). खरसिया शहर दैनिक सब्जी मार्केट के पास रेलवे फाटक में ओवरब्रिज या अंडरब्रिज बनाया जाए, जिससे प्रतिदिन पार होने वाले हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना न पड़े एवं साथ ही दुर्घटना पर भी रोक लगे।

 कलेक्टर ने दिया निराकरण का आश्वासन –

उक्त 10 सूत्रीय मांग को लेकर रायगढ़ कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक महोदय को मांग पत्र सौंपा गया। जिस पर कलेक्टर ने उक्त मांगों की गम्भीरता को देखते हुए तत्काल खरसिया एसडीए को पत्र लिखा एवं शीघ्र कार्यवाही का भरोसा दिया है।
पुलिस कप्तान ने भी सभी मांगों को जायज़ बताते हुए संवैधानिक तरीके से शांतिपूर्वक आंदोलन करने कहा।

10 अप्रैल तक निराकरण अन्यथा क्रमिक भूख हड़ताल एवं अनशन – 

ज्ञापन पर शीघ्र कार्यवाही नहीं होने पर 10 अप्रैल से क्रमिक भूख हड़ताल एवं आमरण अनशन करने की चेतावनी उक्त मांग पत्र में दिया गया है।
उक्त मांगों के समर्थन में विभिन्न सामाजिक संगठनों, किसान संगठनों सहित प्रभावित परिवारों से चर्चा किया जा रहा है।
गोरपार से कुनकुनी तक सैकड़ो की संख्या में ग्रामीणों एवं प्रभावित परिवारों द्वारा पदयात्रा करते हुए कुनकुनी तक आने की सूचना सभी को दे दिया गया है। हालांकि उक्त जनआंदोलन में दिग्गज आदिवासी नेताओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। फिलहाल उक्त मांग पत्र सौंपे जाने से गड़बड़ी करने वालों में हड़कम्प तो किसानों एवं प्रभावित परिवारों में खुशी का वातावरण है।

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( मुख्य फोट़ो प्रतीकात्मक )

जावेद अख्तर, सलाम छत्तीसगढ़...

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