हर व्यक्ति को अपना धर्म मानने और गरिमा के साथ जीने का अधिकार . छतीसगढ हाईकोर्ट . जगदलपुर ,सुकमा ,कोंडागांव इलाके के मसीही लोगों की याचिका पर कोर्ट के आदेश .

4.04.2018

बिलासपुर 

 

.्छतीसगढ हाईकोर्ट ने एक आदेश मे कहा कि हर व्यक्ति को अपना धर्म मानने ,प्रचार करने और आचरण करने के लिये संविधान में कुछ अपवाद के साथ जीने का हक है.हर व्यक्ति को गरिमा के साथ रहने के हक़ है .

भारत का सामाजिक तानाबाना विविध धर्म को मानने के आधार पर बना है , किसी भी धर्म विशेष को अपना प्रभाव दिखा कर इसे प्रभावित करने का हक़ नहीं है । बस्तर ,कोण्डागांव सुकमा के मसीहीय़ों की एक विशेष याचिका पर कोर्ट ने यह कहा.और छतीसगढ शासन को नीयम के तहत कार्यवाही के निर्देश दिये .

कांकेर के रहने वाले दुकालू राम ,ललित राम सलाम कोंडागांव के धन्नू राम आदि की याचिका लगाई थी कि सब मसीही धर्म को मानने वाले हैं ,गांव मे दूसरे धर्म को मानने वाले परेशान करते हैं उनके धर्म स्थल को तोड़फोड़ करते है ,मारपीट करते है .लेकिन पुलिस को रिपोर्ट करने पर कोई कार्यवाही नहीं होती .प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य शाशन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जबाब मांगा था .

जबाब मे बताया गया था कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था . याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस गौतम भादुड़ी की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा ललित कुमारी के मामले में दिये गए गाईड लाईन के अनुसार मामले मे जांच कर सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिये . हाईकोर्ट ने कहा हर व्यक्ति को गरिमा के साथ रहने का अधिकार है इससे कोई उन्हे वंचित नहीं कर सकता .
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