छतीसगढ  प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा रायपुर में 29 व 30 मार्च 2018 को आयोजित शताब्दी समारोह का सफल आयोजन .: छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, विदर्भ, ओडिशा और दिल्ली से आये 400 से अधिक प्रतिनिधियों व अतिथियों ने शिरकत की.

3.04.2018

रायपुर 

छतीसगढ  प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा रायपुर में 29 व 30 मार्च 2018 को आयोजित शताब्दी समारोह अत्यंत सफलतापूर्वक एवं सुचारु संपन्न हुआ। इसमें मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन व विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की। स्मरणीय है कि 30 मार्च 1918 को रायपुर में ही तत्कालीन मध्यप्रांत हिंदी साहित्य सम्मेलन का पहला अधिवेशन हुआ था जिसकी अध्यक्षता बैरिस्टर प्यारेलाल मिश्रा ने की थी। वे मूलतः मालथोन, सागर के निवासी थे। आगे चलकर वे छिंदवाड़ा के नगर अध्यक्ष और प्रांतीय धारासभा के सदस्य भी रहे।

इस दो दिवसीय शताब्दी समारोह में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, विदर्भ, ओडिशा और दिल्ली, इस तरह पांच प्रांतों से आये 400 से अधिक प्रतिनिधियों व अतिथियों ने शिरकत की। इनमें एक सौ से अधिक महिला प्रतिनिधि थीं जबकि युवाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। लगभग 50 स्थानों से साथी पधारे और एक रिकॉर्ड स्थापित किया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, शिक्षक, चिंतक प्रभाकर चौबे थे जिन्होंने सम्मेलन की ऐतिहासिक भूमिका पर विशेषकर प्रकाश डाला। वरिष्ठ लेखक, चिंतक, बहुभाषाविद, रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य महेंद्र मिश्र ने इस अवसर पर अध्यक्ष थे। उन्होंने व्यापक सन्दर्भों में हिंदी विषय पर सारगर्भित विचार व्यक्त किये। वरिष्ठ कवि, कहानीकार, उपन्यास लेखक प्रभात त्रिपाठी, रायगढ़; वरिष्ठ पत्रकार-लेखक व विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष उमेश चौबे तथा मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष पलाश सुरजन विशिष्ट अतिथि थे। सम्मेलन के अध्यक्ष ललित सुरजन ने स्वागत भाषण दिया जबकि महामंत्री रवि श्रीवास्तव ने सञ्चालन किया। उपाध्यक्ष वरिष्ठ लेखिका श्रीमती संतोष झांझी ने अमीर खुसरो का पद गाकर मंगलाचरण किया।

उद्घाटन सत्र के अलावा पांच विचार सत्रों व काव्य पाठ को मिलाकर सात सत्र आयोजित हुए। विचार सत्रों में सवा नौ घंटे की गहन चर्चाएं हुईं। इनके विषय और विवरण निम्नानुसार हैं-

साहित्य परिषद- हिंदी का लोकतान्त्रिक चरित्र

अध्यक्ष- तेजिंदर, रायपुर
आधार वक्तव्य- वेदप्रकाश अग्रवाल, सरगुजा
संचालक- डॉ उषा आठले, रायगढ़

समाजशास्त्र परिषद- हिंदी और रोज़गार के अवसर

अध्यक्ष- डॉ इंदिरा मिश्र, रायपुर
आधार वक्तव्य- डॉ समीर वाजपेयी, एन आई टी, रायपुर
संचालक- संजय शाम, रायपुर

भाषा परिषद- वाचिक परंपरा का ह्रास और विलुप्त होती भाषाएँ

अध्यक्ष- डॉ गोरेलाल चंदेल, खैरागढ़
आधार वक्तव्य- डॉ चित्तरंजन कर, रायपुर
संचालक- डॉ विक्रम सिंघल, रायपुर

वृहत्तर विचार सत्र 1 – हिंदी साहित्य: इक्कीसवीं सदी- कहानी विधा

अध्यक्ष- डॉ रमाकांत श्रीवास्तव, भोपाल
आधार वक्तव्य- डॉ सियाराम शर्मा, उतई, दुर्ग
संचालक- डॉ राकेश तिवारी, रायपुर

वृहत्तर विचार सत्र 2 – हिंदी साहित्य: इक्कीसवीं सदी- काव्य विधा

अध्यक्ष- डॉ दिनेश कुशवाह, रीवाँ
आधार वक्तव्य- डॉ विजय गुप्त, अंबिकापुर
संचालक- डॉ उर्मिला शुक्ल, रायपुर

काव्य पाठ –

अध्यक्ष मंडल- ओमप्रकाश मिश्र, नागपुर; डॉ जीवन यदु, खैरागढ़;श्रीमती संतोष झांझी, भिलाई
संचालक- रवि श्रीवास्तव, भिलाई
55 कवियों को अपनी रचना प्रस्तुत करने का अवसर मिला। समय सीमा के कारण अनेक कवि काव्य पाठ से वंचित रह गए।

रायपुर में एयरपोर्ट रोड पर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित रामस्वरूपदास निरंजनलाल धर्मशाला में सारे कार्यक्रम हुए। आवास व्यवस्था भी वहीं थी। यह परिसर नाममात्र के शुल्क पर उपलब्ध होता है।

आयोजन की सुचारु व्यवस्था के लिए डॉ राकेश तिवारी के मार्गदर्शन में अनेक शिक्षकों तथा विद्यार्थियों ने अथक परिश्रम किया। सम्मेलन के प्रबंध मंत्री राजेंद्र चांडक व उनके साथी निरंतर दौड़-धूप करते रहे। युवा साथी विक्रम सिंघल, नीला आचार्य, विनय शील के अलावा रमेश अनुपम, रायपुर; गणेश शंकर शर्मा, राजनादगाँव; अरुण काठोटे, रायपुर; डॉ राधेश्याम दुबे, भोपाल ; तथा रीमा दीवान चड्ढा, नागपुर का उल्लेखनीय सहयोग मिला।

डॉ सरिता दोषी, डॉ विश्वासी एक्का, नन्द कंसारी, संजय शाम, डुम्मन लाल ध्रुव आदि ने विभिन्न सत्रों के प्रतिवेदन तैयार करने का दायित्व लिया। छत्तीसगढ़ की विभिन्न जिला इकाइयों व सम्बद्ध संस्थाओं के साथी भी उत्साहपूर्वक सामने आये।

इस तरह यह समारोह हर दृष्टि से एक ऐतिहासिक आयोजन बन गया।

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