छतीसगढ में भारत बंद का भारी असर ,दलित संगठन उतरे सडकों पर .14 जिलों में रहा बन्द का प्रभाव . कहीं पूरा बंद तो कहीं प्रतिरोध पर्दर्शन : कहीं कोई हिंसा की खबर नहीं .

 

 

2.04.2018

छतीसगढ के लगभग हर जिले मे दलित तथा उनके सहयोगी बंद समर्थक संगठन सुबह से ही सडक पर उतर गये थे .राष्ट्रव्यापी बंद के समर्थन मे सभी कम्युनिस्ट पार्टियां ,कांग्रेस , आम आदमी पार्टी ,बसपा , दलित आदिवासी संघठन ,पिछड़ा वर्ग संघठन ,मसीही समाज संघठन ,मुस्लिम ज़मात ,के साथ छतीसगढ बचाओ आंदोलन और मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने भागीदारी की .

 


सरकार इस आंदोलन की व्यापकता को भांपने में असफल रही . रायगढ मे बडी संख्या मे लोग सुबह से ही सभा के लिए एकत्रित हो गये थे ,उन्होंने हजारों की सँख्या में रैली निकाली ,बाजार पूरी तरह बन्द रहे .राजधानी रायपुर मे अंबेडकर चौक से विशाल मोटर सायकिल रैली निकली तो बाजार मे सन्नाटा बिखरा हुआ था ,बाद में अंबेडकर चौक पर सभा की गई.. बिलासपुर मे भी अंबेडकर चौक से रैली मुख्य सडकों से होती हुई वापस चौक पर आई .मुख्य बाजार ने बंद का समर्थन किया .इसी प्रकार भिलाई दुर्ग में दलित संगठनो के साथ मजदूर संगठन भी बंद के समर्थन मे बाहर आये ,मुख्य सडक और राजमार्ग पर 15 किलोमीटर का जाम लग गया ,रैली ,प्रदर्शन और आमसभि मे नेताओं ने एट्रोसिटी एक्ट में बदलाव पर विस्तार से अपनी बात रखी .सूरजपुर में आदिवासी संघठनो ने कलेक्ट्रेट में सभा की और पूरा बाजार बंद रहा ।.

बेमेतरा, बालोद, कोरबा, कोरिया, कवर्धा, मुंगेली, धमतरी, जांजगीर-चांपा, राजनांदगांव, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर, भानुप्रतापपुर, सुकमा, बलरामपुर, सूरजपुर, जशपुर, नारायनपुर, बीजापुर, महासमुंद, गरियाबंद, बलौदा बाज़ार-भाटापारा तक में दुकानें दोपहर बीतने तक बंद ही रही। राजधानी, बेमेतरा, बिलासपुर, रायगढ़ एवं सरगुजा व बस्तर संभाग में शत प्रतिशत बंदी रही। इस दौरान प्रदेश के किसी भी स्थान से किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है, छग बंद शांतिपूर्ण रहा.

जगदलपुर में व्यापारियों ने दुकान बंद करने से इंकार करने से थोड़ी असंतोष दिखा लेकिन बाद में बाजार बंद कर दिया गया .

 

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