छतीसगढ : एट्रोसिटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ भारत बंद के आव्हान पर कल 2 अप्रेल को सम्पूर्ण छतिसगढ बन्द की तैयारी .जगह जगह बंद के लिये बैठक प्रदर्शन रैली .बलरामपुर से कोंटा तक बंद की खबरें.

 

1.04.2018
रायपुर

सर्वोच्च न्यायलय द्वारा एट्रोसिटी एक्ट को कमजोर करने और प्रभावहीन बनाने के खिलाफ 2 अक्टूम्बर को भारत बंद का आव्हान किया गया है ,छतीसगढ में अनुसूचित जाति ,जनजाति ,पिछडा वर्ग ,अल्पसंख्यक मोर्चा के आव्हान पर पर सभी जिलों मे तैयारी की खबरें है ,बिलसपुर से पदयात्रा कल रायपुर पहुच रही है ,सूरजपुर मे आदिवासी संगठनों ने रैली और बंद का आव्हान किया है ,अम्बिकापुर ,रायगढ ,जशपुर ,बस्तर के जिले ,रायपुर , बिलासपुर , दुर्ग ,धमतरी , गरियाबंद और राजनांदगांव में विभिन्न संगठन बंद की तैयारी जोर शोर से कर ली है.

भारत बंद के समर्थन में अनुसूचित जाति ,जन जाति ,पिछडा वर्ग संगठन ,अल्पसंख्यक संघठन सभी वामपंथी दल , सांस्कृतिक ,लेखक संगठन , विभिन्न जनसंगठनों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता ,सोनी सोरी एवं छतीसगढ पीयूसीएल ने शांतिपूर्वक बंद का समर्थन किया है .
सरकारी कार्यालय मे बंद के समर्थन मे एक दिन का अवकाश लेने के लिये आवेदन दिये गये है. आंदोलनकारी संगठनों ने सभी दुकानों ,इंस्टीट्यूशन बंद रखने की अपील की है.कहीं कहीं चक्का जाम का सामना भी करना पड़ सकता है .

रायपुर ओर बिलासपुर के अंबेडकर चौक पर मुख्य कार्यक्रम होंगे .

भारत के सर्वोच्च न्यायलय द्वारा 20 मार्च को एट्रोसिटी एक्ट में भारी और निर्णायक बदलाव ने इस कानून को प्रभावहीन कर दिया है . यह सर्वोच्च न्यायलय में आ रहे विवादस्पद बदलाव का नतीजा है कि इस कानून के अन्तर्गत किसी शिकातय पर पुलिस के अधिकारी की जांच के बिद अनुमति प्राप्त करनी होगी और शासकीय मामले मे एफ आई आर दर्ज करने के पहले शासन की अनुमति की आवश्यकता होगी .
भारत के दूसरे कानून मे भी इस अनुमति को सरकारें जानबूझकर कर सिलेक्टिब होकर देने के हजारों प्रकरण लंबित है .
संविधान ने अनुसूचित जाति ,जनजाति केलिये विशेष संरक्षण किये है जो कब इस के वजह से खतम हो जायेंगे .
शायद ही कोई दिन बीतता हो जब इस वंचित वर्ग के साथ अमानवीय और आपराधिक हमले न होते हों ,जिसकी शिकायक करना भी मुश्किल होता है ,समाज के स्वर्ण वर्ग के अत्यचार आम घटना है ,इसी लिए यह प्रावधान औकिया गया था कि पीड़ित वर्ग की तुरंत रिपोर्ट दर्ज ही और आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की जाये ,अब यदि जांच और अनुमति की शर्त लगा दी गई तो कभी न्याय मिलेगा ही नहीं .

***

Leave a Reply

You may have missed