कांकेर के स्थानीय बेरोजगारों के साथ एक बार फिर छलवा : चतुर्थ श्रेणी तक के अवसर बाहर के लोगों को .

कांकेर के स्थानीय बेरोजगारों के साथ एक बार फिर छलवा : चतुर्थ श्रेणी तक के अवसर बाहर के लोगों को .

28.03.2018

रिपोर्ट ,नियत श्रीवास कोयलीबेड़ा से

**

कांकेर जिले में छले गए स्थानीय बेरोजगार । स्थानीय भर्ती के नाम पर आज तक नही हो पायी चतुर्थ वर्ग के 6000 पदों की आवेदित रिक्त स्थान, कांकेर जिले में यूं ही खेला जा रहा ,संविदा कर्मियों का खेल और दिया जा रहा अन्य जिला के लोगों को नियुक्ति कांकेर में अधिकतर अधिकारी वर्ग धमतरी या दुर्ग से हैं, जो अपने चहेतों को लाभ देने के उद्देश्य से स्थानीय बेरोजगारों को अनदेखा कर अपने सगे सम्बन्धियों को नौकरी दिला रहे हैं।

 

आज बस्तर संभाग के कांकेर जिला में बेरोजगारी सबसे ज्यादा बढ़ी है सम्भाग के अन्य जिलों के तुलना में बेरोजगारी का आलम ये है कि प्यून की भर्ती में भी एम ए और एम एस सी के आवेदक नजर आ रहे हैं तो 5 वी 8 वी की तो दूर की बात । जब से नवीन जिला का गठन हुआ अन्य जिलों के तर्ज पर स्थानीय भर्ती के सपने देखते रहे बेरोजगार चतुर्थ वर्ग की सबसे बड़ी भर्ती के आवेदन भी मंगाए गए थे परंतु ठंडे बस्ते में भेज दिया गया जबकि सम्भाग के अन्य जिलों में वही चतुर्थ वर्ग की भर्ती सम्पन्न हो गयी और स्थानीयों को रोजगार मिला । उत्तर बस्तर होने का नुकसान झेल रहा है कांकेर जिला यहां से सामान्य सम्भाग लगे हुए होने के दुष्परिणाम झेल रहा है कांकेर जिला ।

रॉवघाट परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के शिकारों को आज तक रोजगार नही दिया गया जबकी रेल का ट्रायल हो गया और भूमि के मालिक जिनको नौकरी का सपना दिखाए आज भी बेरोजगार हैं। इससे बड़ी व्यथा और क्या होगी कि जमीन भी छीन गयी और नौकरी भी नही मिली, कांकेर जिले के बेरोजगारों के बढ़ते संख्या से एक बात तो स्पष्ट है कि स्थानीय भर्ती की सरकार की योजना यहां साफ तौर पर फेल है और एक छलावे से कम नही, जितनी नौकरी नये जिला बनने पर बस्तर के अन्य जिलों सुकमा ,नारायणपुर, कोंडागांव के स्थानीय लोगों की लगी कांकेर के बेरोजगारों की नही लगी।
***

CG Basket

Related Posts

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account