गुड इवनिंग बिलासपुर  3⃣  /   अभी सम्पर्क जारी है , ईवनिंग  टाईम्स बिलासपुर .

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27.03.2018

बिलासपुर

देवी पूजा हो गई। जवारा विसर्जित कर दिए गए। कन्या भोजन का पुण्य भी कम लिए। ये सब हुए अभी दो दिन भी नहीं बीते हैं। रात को एक माँ और उसके नवजात शिशु ने दम तोड़ दिया। ये सब सरकारी अस्पताल में हुआ। समय पर इलाज नही मिला। अब वो बेचारी कोई वी आई पी तो थी नहीं जो सरकारी अस्पताल में समय से इलाज मिल जाता। किसी पार्षद, विधायक, मंत्री से भी जान-पहचान नही थी ।

इस देश की साधारण नागरिक थी। हालांकि ऐसे साधारण नागरिकों की इन दिनों बड़ी पूछ-परख हो रही है। चुनाव जो आ रहे हैं। फिर भी वह तड़पती रही। इलाज नही हुआ। मर गए दोनों। ऐसी मौत पर कौन रोटा है भला ? अभी तो सरकार चला रहे लोग जनसम्पर्क में व्यस्त हैं। और सरकार बनाने का सपना देखने वाले स्वागत समारोह में। बहुत ही बड़ी माला थी ,जिसमें हजारों फूल गुंथे हुए थे। एक ही माला में कई नेता समा गए । पहनाने वालों के नम्बर बढ़ गये। और रात भर इस ‘सक्सेस’ की खुमारी रही। ऐसी ही रात में वह मर गई सरकारी अस्पताल में। अब इतने दिनों बाद तो इतनी भीड़ और ग्रेंड सक्सेस समारोह हुआ था। जश्न की रात। ऐसे में उस मरती हुई देवी मां को कौन बचाये ? सिम्स में सरकार ने आठ समाजसेवी भी नॉमिनेट किये हैं कि लोगों की मदद करें। फिर भी उसे मदद नहीं मिली ।

समाजसेवियों की इसमें क्या गलती ? उसे प्रसव के दर्द इतनी रात में नही उठना था । आखिर समाज सेवी भी इंसान है। रात को आराम करते हैं। क्या करे देवी ? भाजपाई, कांग्रेसी, समाजसेवियों सबके होते बच नहीं पाई और ना ही उसका नन्हा सा बच्चा ही बच सका। दोनों मर गए । किस्मत का ही दोष रहा होगा ? नहीं तो इतनी सारी योजनाएं है, इतने सारे डॉक्टर हैं, इतने सारे नेता और समाजसेवी हैं। कोई भी कम नही आया मतलब गलती मरने वाली की ही हुई ना। सब भाग्य की बात है। 

  ऐसे साधारण लोग मरते रहते हैं। इससे जनसंपर्क थोड़े ही रुकना चाहिए। आखिर ऐसे ही आम आदमी की भलाई के लिये ही तो गलियों, मोहल्लों में जा रहे हैं हमारे नेता। सबका भला होगा। और नाइ योजनाएं बनाएंगे। कुछ और समाज सेवियों को आगे लाएंगे। हमारी सरकार फिर से बन जाये कोई नही मरेगा बिना इलाज के । सब ठीक हो जाएगा । और वे लोग कह रहे हैं जिनको हटाओ हमको लाओ। हम करेंगे सेवा। किसी को मरने नहीं देंगे । इनके राज से अच्छा राज होगा हमारा। सब बदल जाएगा। अफसर मुस्कुरा रहें है। उन्हें पता है आये कोई भी राज तो हमें चलाना है। इस मुस्कान के पीछे किसी देवी का दर्द नहीं उर ना ही उस अजन्मे शिशु की चीख ही। इस मुस्कान के मायने किसी नोटशीट में नहीं लिखे होते । सत्ता की कुर्सी के पाए इसी मुस्कान से मज़बूत होते हैं। वहां बेमौत मरती देवी की आखिरी सांस या अजन्मे शिशु की सिसकियां किसी को सुनाई नहीं देती। देनी भी नही चाहिए आम आदमी और वीआईपी में इतना फर्क तो होना ही चाहिए ना। जनसंपर्क जारी है और जनता खुश है, बाकी सब चुप हैं क्योंकि बाकी सब ठीक है। 

  ■ आनन्द कुमार.

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