सरकारों को भी संविधान के मुख्यधारा में आकर कार्य नहीं करना चाहिए ? : हिमांशु कुमार

25.03.2018

 

आदिवासियों को मुख्यधारा में लाना चाहिये ,

मुसलमानों को मुख्यधारा में लाना चाहिये ,

दलितों को मुख्यधारा में लाना चाहिये ,

कश्मीरियों को मुख्यधारा में लाना चाहिये ,

पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को मुख्यधारा में लाना चाहिये ,

दक्षिण भारतीयों को मुख्यधारा में लाना चाहिये ,

ऊपर लिखे गये ये सारे लोग मिला लिये जायें तो यह पूरा भारत हो गया ,

इसमे उत्तर भारत के कुछ अमीर मर्द शामिल नहीं हैं ,

जो सुबह खाकी नेकर पहन कर पार्क मे लाठी लेकर जमा होते हैं ,

यही मुट्ठीभर मर्द भारत की मुख्यधारा तय करते हैं ,

यही पतली सी नाली ही मुख्यधारा घोषित कर दी गई है ,

तो भारत सरकार चाहती है कि भारत के सभी लोगों को इस मुख्यधारा में शामिल किया जाये ,

यानी मुसलमान औरतें अपने बच्चों को कृष्ण बनाती है तो वो मुख्यधारा मे हो जाती हैं ,

लेकिन जो मुसलमान सच्चर कमेटी की रिपोर्ट लागू करने की मांग करते हैं वो मुख्यधारा के मुसलमान नहीं हैं ,

जो आदिवासी सेना मे शामिल होकर कश्मीर मे मारा जाता है वह आदिवासी तो मुख्यधारा का आदिवासी मान लिया जाता है ,

लेकिन जो आदिवासी ज़मीन और जंगल को अपना कहता है और उस जंगल पर किसी कंपनी के कब्ज़े के विरोध की लड़ाई लड़ता है , वह आदिवासी मुख्यधारा में नहीं है ,

तो भारत की मुख्यधारा का मतलब है ,

भारत की आर्थिक सत्ता जिन अमीर पूंजीपतियों की मुट्ठी में है उनका समर्थन करना ,

इन अमीरों के लिये देश के आदिवासियों , किसानों की ज़मीनों पर कब्ज़े का समर्थन करना ,

इन अमीरों के लिये देश की बहुसंख्य आबादी यानी किसानों , मजदूरों , आदिवासियों , छात्रों , औरतों पर लाठी चलाने वाली , गोली चलाने वाली और जेलों में ठूंसने वाले सशस्त्र सैनिकों को समर्थन देना ,

नागरिक होने का अर्थ यह भी मान लिया गया है कि व्यक्ति सरकार के आदेशों का पालन करे ,

सरकार कहे कि अपना खेत अडानी को दे दो ,

तो किसान अपने खेत अडानी को दे दें ,

तब वह अच्छे नागरिक मान लिये जायेंगे ,

और अगर किसान कहें कि आपने मेरी ज़मीन छीनने के लिये मेरी बेटी के गुप्तांगों में पत्थर क्यों भरे ?

और किसान सरकार के खिलाफ अदालत मे मुकदमा दायर कर दे ,

तो वह किसान अच्छा नागरिक नहीं माना जायेगा ,

यानी संविधान मे दिये गये ” हम भारत के लोग ” के अधिकार के अनुसार भारत मे रहने की कोशिश करोगे तो मारे जाओगे ,

पूँजीपतियों की जेब में पड़ी हुई सरकार की हाँ में हॉ मिलाओगे तो अच्छे भारतीय माने जाओगे ,

संविधान मे वर्णित ” हम भारत के लोग ” बनने की कोशिश करोगे तो देशद्रोही घोषित कर दिये जाओगे ,

मुख्यधारा का अर्थ है इन चन्द मुट्टी भर लोगों के धर्म को पूरे देश का धर्म मानना ,

इन चन्द मुट्टी भर लोगों की संस्कृति , घूंघट, पैर छूना आदि को भारतीय संस्कृति मानना ,

बस्तर की लड़कियाँ अपनी उम्र के लड़के लड़कियों के साथ रात रात भर घूमती हैं ,

शादियों में बिना माता पिता को साथ लिये नाचने जाती हैं ,

बस्तर की युवतियां मेले मे रात भर नाचती हैं ,

सिर नहीं ढकतीं , पैर नहीं छूतीं , करवा चौथ का व्रत नहीं रखतीं ,

देश की ज़्यादातर औरतें करवा चौथ का नाम तक नहीं जानतीं ,

लेकिन करवा चौथ को भारतीय संस्कृति मान लिया गया है , हद है ,

भारत की कोई मुख्यधारा नहीं है ,
करवा चौथ , पैर छूना , घूंघट करना भारत की मुख्य संस्कृति नहीं है ,

लड़कियों का शाम से पहले घर के भीतर घुस जाना भी भारतीय संस्कृति नहीं है ,

भगवान को मानना भी भारतीय संस्कृति नहीं है ,

करोड़ो आदिवासी, भगवान जैसे किसी जन्तु को नहीं जानते ,

साड़ी, बिंदी, राम, कृष्ण , पीपल की पूजा, भी भारतीय संस्कृति नहीं है ,

इस देश मे हज़ारों संस्कृतियां हैं ,

कोई मुख्यधारा नहीं है ,

मुख्यधारा के नाम पर संघ के सांस्कृतिक साम्राज्यवाद का पर्दा फाश करने की ज़रूरत है ၊

हमें खुद को सरकार से डरने वाला नागरिक नहीं बनाना है ,

हम संविधान के वह जन्म दाता हैं जो संविधान को आत्मार्पित करते है यानी खुद ही संविधान निर्माता और संरक्षक है ၊

हम भारत के लोग हैं

Leave a Reply