बहुराष्ट्रीय संस्था वेदांता समूह द्वारा कैंसर हॉस्पिटल के नाम पर पूरे राज्य सरकार के साथ मिलीभगत कर छत्तीसगढ़ की जनता के साथ बहुत बड़ी धोखाधड़ी की जा रही है : आप छतीसगढ

  • रायपुर / 24.03.2018

कल 23 मार्च को मुख्यमंत्री निवास पर मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2009 में कैंसर हॉस्पिटल एवम अनुसंधान केंद्र को चैरिटी के स्तर पर निर्माण हेतु एमओयू किया गया था । जिसके तहत केंसर अस्पताल के अलावा 5 शहरों में क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का करार हुआ था । लेकिन तय सीमा में करार के अनुसार कार्य का निष्पादन नहीं कर पाने के कारण उस एमओयू को 17 जनवरी 2018 को निरस्त कर दिया गया । एमओयू निरस्त होने के बाद कल 23 मार्च को वेदांता फाउंडेशन पर 34 करोड रुपए का जुर्माना क्यों किया गया यह स्पष्ट नही किया गया । गौरतलब है कि वेदांता फाउंडेशन द्वारा अस्पताल का निर्माण उसी स्थल पर किया जा गया है जिसके लिए मात्र ₹1 पर 50 एकड़ भूमि आवंटित कर किया गया था । यही नहीं इस अस्पताल का उद्घाटन स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह 25 मार्च को करेंगे ।

 

मुख्यमंत्री द्वारा दोहरे मापदंड अपनाए जाने का यह सीधा-सीधा मामला प्रतीत होता है जिसमें एक ओर गरीब जनता के नाम पर चैरिटी के लिए जमीन का आवंटन किया गया और अस्पताल निर्माण कर उसी जमीन का विक्रय राज्य सरकार के द्वारा 34 करोड़ पर किया गया । साथ ही कहा यह गया कि हम वेदांता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हैं और जुर्माना तय करते हैं । दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के मुखिया एक तरफ वेदांता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हैं और दूसरी तरफ उसी अस्पताल के उद्घाटन के लिए हामी भरते हैं ।

आम आदमी पार्टी मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से जानना चाहती है कि राज्य सरकार की करोड़ों की भूमि की सौदेबाजी की गई है कि प्रदेश की आम जनता के साथ धोखा करते हुए प्रारंभ में एमओयू साइन करते वक्त कहा गया कि गरीबों के लिए चैरिटी अस्पताल कैंसर इलाज हेतु खोला जाएगा और गुपचुप ढंग से एक व्यवसायिक अस्पताल का निर्माण कर लिया गया । जिसमें वेदांता ने सीधे तौर पर चैरिटी या गरीबों को किसी तरह का राहत देने से इनकार करते हुए अपने अस्पताल को तैयार कर लिया । यह पूरा का पूरा मामला गंभीर भ्रष्टाचार का है जिसमें राज्य सरकार के पी पी पी मॉडल द्वारा स्वास्थ सेवाओं को संचालित करने की संपूर्ण योजना पर प्रश्न चिन्ह उठता है ।

 

आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक डॉक्टर संकेत ठाकुर और प्रदेश प्रवक्ता उचित शर्मा ने प्रश्न किया है कि मुख्यमंत्री कृपया स्पष्ट करें कि जिस संस्था के खिलाफ उनकी सरकार कड़ी कार्रवाई करती है उसी अस्पताल का उद्घाटन करने का फैसला माननीय मुख्यमंत्री कैसे कर लेते हैं ?

प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि क्या पीपीपी मॉडल के नाम पर चोर दरवाजे से राज्य सरकार की कीमती भूमि पर निजी संस्थाओं का इसी तरह कब्जा होता रहेगा ?
क्या आने वाले समय में जिन 6 नए अस्पतालों को पीपीपी मोड में चलाने की बात सरकार द्वारा कही जा रही है वह फिर से मालिकाना हक अपना जाहिर करेंगे ?

क्या राज्य सरकार ने मान लिया है कि वह आम जनता के स्वास्थ्य रक्षा में पूर्ण तरह निष्फल हो चुकी है ?
प्रदेश की ढाई करोड़ से अधिक जनता का स्वास्थ्य निजी हाथों में सौंप दिया गया है आम आदमी पार्टी इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग करती है जिसमें मुख्यमंत्री की भूमिका सबसे अधिक संदेहास्पद दिखाई दे रही है ।

**

Leave a Reply