गुड इवनिंग बिलासपुर : चुप शहर में शोरगुल : ईवनिंग टाईम्स बिलासपुर

24.03.2018

बिलासपुर

 

पहले बोलने वाला अपना शहर बरसों से चुप है। व्यक्ति संतुष्ट होने पर,भयभीत होने पर या लालचवश ही तो चुप रहता है। पिछले कई सालों से सब सन्तुष्ट हैं, इसलिए चुप हैं। लालच किसी को नहीं क्योंकि सबको हैसियत से ज्यादा मिल गया/मिल रहा है। लोकतंत्र है इसलिए भयभीत भी कोई नही। इतनी सन्तुष्टि के बावजूद अपने शहर में कुछ दिनों से शोर ज्यादा ही हो रहा है। शहर के विधायक और प्रदेश के मंत्री लोगों से मेल- मुलाकात करने निकले हैं। यूँ तो वे हमेशा ही मिलते – जुलते रहते हैं । सबके लिए सहज उपलब्ध। पुराने मंत्री यादव जी (बी आर यादव) से यह बात सीखी है उन्होंने। लेकिन यह बरस जरा खास है। चुनाव जो होने हैं। इसलिए गली मोहल्लों में जाना जरूरी है। अब मंत्री जाए तो शोर तो होगा ही। हो रहा है। लोगों के सुख और संतोष में बढ़ोतरी भी हो रही है। मंत्री की लोकप्रियता और बढ़ रही है। 

            अब ये बात कांग्रेसियों को कहां हज़म होने वाली । वे भी निकल पड़े हैं। मंत्री की जनसम्पर्क यात्रा के जवाब में कांग्रेस की जान सम्मान यात्रा शुरू हो गई है। इसमें कोई एक नेता तो है नहीं। सब नेता हैं। मंत्री का तो हर मोहल्ले में स्वागत हो रहा है। लर इनका कौन करे ? लोग अपना वही साफ सफाई, पानी का रोना रो रहे हैं। कांग्रेसी बता रहे हैं ये सब मंत्री के कारण है, हमको लाओ हम सब ठीक कर देंगे । लोग भले ही बोलते नहीं पर समझते तो सब हैं कि कौन किस कारण आ रहा है। ये लोग पांच बरस कहाँ थे,और कैसे फल फूल रहे थे। पर लोग सब समझकर भी न समझी का इज़हार करते हुए इन्हें भी समस्याएं बता रहे हैं। एक बात जरूर है कि इस बार कांग्रेस में सब साथ दिख रहे हैं। कौन किस कारण से साथ है इसकी चर्चा भी खूब हो रही है।

                *अटल का दुख*

          जैसे – जैसे शोरगुल बढ़ रहा है

 वैसे- वैसे सुख दुख भी । पहले टिकट लेने में सबसे बड़ा रोड़ा अनिल टाह था तो अब अशोक अग्रवाल।अटल को लगता था इस बार तो टिकट पक्की है, पर शैलेष पांडेय बहुत ही दमदारी से आगे आ गए। अभी भी हैं और बहुत सक्रिय। पर कोटा में भी सक्रियता के कारण जरा राहत थी तो अशोक अग्रवाल अचानक फिर सक्रिय। बाकी सबसे तो बहुत आगे निकल गए थे अटल टिकट के लिए पर अब फिर मेहनत करनी पड़ेगी। एक बहुत पुराने नेता स्व.कन्हैया लाल शर्मा का एक वाक्य बहुत प्रसिद्ध हुआ था कि कांग्रेस की टिकट और मौत का कोई भरोसा नही। किसे मिल जाए या किस पर आ जाए। इसलिए अभी भी बहुत भीड़ है यहां से टिकट के दावेदारों की। 

   ■ आनंद कुमार

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