अमर के लिए (अ) जीत का रास्ता …बिलासपुर विधानसभा का राजनैतिक. विशलेषण :, नथमल शर्मा ,संपादक ईवनिंग टाईम्स बिलासपुर.

18.03.2018

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने कुछ और प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इसमें अपने सबसे पुराने और निष्ठावान साथी अनिल टाह को बिलासपुर से टिकट नही दी। बेलतरा भेज दिया। यहां से ब्रजेश साहू को प्रत्याशी बनाया गया है। जाहिर है अमर अग्रवाल के लिए जोगी की ओर से जीत आसान कर दी गई है। साहू की राजनीतिक सक्रियता बिलासपुर में कभी नहीं रही उनकी एक बिल्डर के रूप में पहचान है। 

         आज चैत्र नवरात्र के प्रथम दिवस छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस(जे) ने अपने नौ प्रत्याशी घोषित का दिए । यसें मिलाकर अब तक कुल 29 प्रत्याशियों की घोषणा की जा चुकी है। प्रदेश में चुनें इस वर्ष के अंत में होंगे। प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला होने की बात कही जाती है। इन दोनों ने चुनावी तैयारियां तो शुरू कर दी है, पर प्रत्याशियों के कोई अता-पता नहीं है। अन्य दल बसपा और आप पार्टी भी है। जोगी की कांग्रेस ने ही सबसे पहले प्रत्याशी घोषित किये हैं। खुद अजीत जोगी इस बार राजनांदगांव से चुनाव लड़ेंगे । यहाँ से मुख्यमंत्री रमन सिंह विधायक हैं। जाहिर है अगर इस बार फिर रमन सिंह वहीं से लड़ते हैं तो मुकाबला रोचक तो हो ही जायेगा.

          आज घोषित प्रत्याशियों में अनिल टाह का भी नाम है। इन्हें बेलतरा से प्रत्याशी बनाया गया है। बिलासपुर से लगा हुआ ही है यह विधानसभा क्षेत्र। इसमें शहर के भी कुछ वार्ड आते हैं, लेकिन अनिल टाह वहां कभी सक्रिय रहे ही नही। वे तो जीवन भर बिलासपुर में ही काम करते रहे।उनके सैकडों कार्यकर्ता और हजारों समर्थक है यहां । श्री टाह  ने ही सबसे तगड़ी टक्कर अमर अग्रवाल को दी है। पहले उनकी परम्परागत प्रतिद्वंद्वी वाणी राव थी। दोनों ने कांग्रेस में एक दूसरे को ‘निपटाने’ में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। यह बात जगजाहिर है। संयोग कुछ ऐसा हुआ कि आज दोनों ही कांग्रेस छोड़ जोगी के साथ हैं। यानी अनिल टाह अगर यहां से प्रत्याशी होते तो वाणी राव का पूरा सहयोग मिलता और वे बहुत ही सशक्त उम्मीदवार होते। वैसे टिकट की घोषणा आज हुई है पर पिछले कई महीनों से टाह ने बेलतरा में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। यानी बिलासपुर के सबसे मजबूत प्रत्याशी को पहले ही दूर करके अमर अग्रवाल की राह आसान कर दी गई ,कम से कम जोगी कांग्रेस की तरफ से । अनिल टाह की जीवन भर की मेहनत एक झटके में राजनीतिक ‘ दूरदर्शिता ‘ से खत्म कर दी गई। 

          बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र से ब्रजेश साहू को प्रत्याशी बनाया गया है। श्री साहू एक सफल बिल्डर रहे हैं। उनके टाह परिवार से भी बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। कांग्रेस के समय से ही वे टिकट मांगते रहे और उनके नेता अजित जोगी की ओर से तखतपुर से नाम चलाया जाते रहा क्योंकि बिलासपुर से टाह का नाम होता था। अपने नेता के साथ साहू भी कांग्रेस छोड़ चुके हैं और इनाम यह मिला कि आज वे बिलासपुर से टिकट हासिल करने में सफल हो गए । लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वे कभी यहां सक्रिय रहे ही नही, हां अपना व्यवसाय यहीं किया और खूब फले-फुले। वित्तीय रूप से वे सशक्त कहे जा सकते हैं, लेकिन मंत्री अमर अग्रवाल से वित्तीय रूप में भी बहुत कमजोर। सारे विवादों और अक्सर “जनता नाराज़ है ” की चर्चा के बावजूद अमर अग्रवाल लगातार चुनाव जीत रहे हैं।

 

कांग्रेस को ही सोचना पड़ रहा है कि उनके मुकाबले किसे उतारा जाए। शुरू में शैलेश पांडे को मन जा रहा था पर वे कोटा छेत्र में भी सक्रिय हैं। ऐसे में जोगी की ओर से साहू को प्रत्याशी बनाये जाने के कई मायने हैं। यह यूँ ही नहीं है कि बिलासपुर में जोगी कांग्रेस ने अमर अग्रवाल के खिलाफ कोई बड़ा आंदोलन नही किया। इस ‘साफ्ट’ रुख की चर्चा राजनीतिक गलियारों में होते रहती है। दीवार पर लिखी इबारत की तरह मतलब साफ है कि एक दल की ओर से रास्ता साफ मिल ही गया अमर अग्रवाल को। अब ब्रजेश साहू घूमते रहे बिलासपुर के वार्डों में और अपनी जमानत बचाने  के लिए समर्थन मांगते रहें। हां उनके पास ख़र्च करने का माद्दा है इसलिए भीड़ और समर्थक तो जुटे ही रहेंगे पर बिलासपुर के एक – एक बूथ से वाक़िफ अनिल टाह का सक्रिय साथ तो मिलने से रहा। अजीत जोगी खुद चुनाव लड़ेंगे तो यहां कितनी सभाएं ले पाएंगे ? तो फिर ब्रजेश साहू के लिए कौन बड़ा नेता आएगा ? यानी यह तय है कि बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय मुकाबला नहीं अपितु सीधे सीधे भाजपा और कांग्रेस के बीच ही संघर्ष होना है। हां, इतना समय मिल है और साहू कोई रणनीति बनाकर खुद को मुकाबले में ला सके तो चमत्कार ही माना जाएगा। 

        जिस अनिल के लिए…

       एक समय था जब छत्तीसगढ़ में अनिल टाह ही अजीत जोगी के सबसे प्रमुख फालोवर थे। उस समय जोगी नए नए कांग्रेस में आये थे। अनिल टाह ने यहां जैसा स्वागत किया जैसी विशाल रैली निकाली,वैसी फिर देखने में नहीं आई। तब से ही अनिल हर कदम पर साथ हैं। रायगढ़ से लेकर महासमुंद तक के हर चुनाव में अनिल ही सबसे प्रमुख सिपहसालार रहे। जोगी ने भी हमेशा ही अनिल का समर्थन किया । कांग्रेस से टिकट दिलाने की भी कोशिश की। सिर्फ एक बार सफलता मिली। कांग्रेस से अनिल टाह ने ही सबसे पहले बगावत की और बी आर यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा। फलतः यादव चुनाव हार गए ।टाह को कांग्रेस से निकाल दिया गया पर अपने नेता की मदद से वे फिर कांग्रेस में । और फिर हर बार कांग्रेस में भितरघात नही खुलाघात होते रहा। कांग्रेस हारते रही , भाजपा जीतते रही। 

            इस बार तो टिकट बंटवारा दिल्ली से नहीं रायपुर से हो रहा है। खुद जोगी ही हाईकमान है फिर भी अनिल टाह को बिलासपुर से टिकट नहीं मिल सकी। इसके अपने राजनीतिक मायने तो है ही। 

     वाणी राव और शहज़ादी के लिए…

         यह तो साफ दिख रहा है कि अब पूर्व महापौर वाणी राव के लिए विधानसभा चुनाव में कोई अवसर नहीं है। बिलासपुर ही उनका क्षेत्र था/है। ज्यादा हुआ तो बिल्हा के लिए भी उपयुक्त थीं, पर वहां से तो सियाराम कौशिक हैं। बेलतरा भी रास्ता बंद है, वहां से अनिल टाह टिकट ले आये हैं। इसके अलावा और कोई क्षेत्र है नहीं। हां, लोकसभा चुनाव में उन्हें आश्वासन मिला हो तो कहा नहीं जा सकता। यानी इस बार वाणी राव स्टार प्रचारक राह सकती हैं। इसी तरह जुझारू नेत्री शहज़ादी कुरैशी को भी टिकट नहीं दी गई । आम जनता से जुड़ी वे यहां से सशक्त प्रत्याशी हो सकती थी । अब उन्हें पांच बरस इंतज़ार ही करना होगा । 

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