सायलेंट किलर है ग्लूकोमा : विश्व ग्लूकोमा सप्ताह’ (वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक) के अंतर्गत विशेष आयोजन किया. :  छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल.

 


रायपुर, 16 मार्च 2018

छतिसगढ में करीब 40 वर्षों से नेत्र चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर सेवाएं प्रदान कर रहे ‘छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल’ ने 11 से 16 मार्च तक मनाये जाने वाले ‘विश्व ग्लूकोमा सप्ताह’ (वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक) के अंतर्गत विशेष आयोजन किया.

इसके तहत ‘ग्लूकोमा है दृष्टि का चोर: आँखों की जांच कराएं, सौ (100) काम छोड़’ के नारे के साथ विभिन्न स्थानों पर निशुल्क परामर्श और जाँच कैम्प आयोजित किये गए. ग्लूकोमा सप्ताह के आखिरी दिन छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल की टीम ने लोगों में ग्लूकोमा के प्रति जानकारी का प्रसार करने के उद्देश्य से विभिन्न व्यस्त चौराहों पर एक विशेष *’नुक्क्ड़ नाटक’* का आयोजन भी किया। जानकारी का प्रसार-प्रचार करने के लिए नारे लगाकर लोगों को ग्लूकोमा को लेकर सावधानी रखने तथा जांच करवाने को कहा गया. इसी तरह नुक्क्ड़ नाटक में भी बहुत प्रभावी तरीके से सन्देश को प्रसारित किया गया.

 

*इसमें स्कूल जाने वाला एक बालक जब अपने स्कूल में ग्लूकोमा के बारे में जानकारी पाता है तो वह घर पर अक्सर सोशल साइट्स पर व्यस्त रहने वाले अपने माता-पिता से आँखों की नियमित जांच करवाने को कहता है*. सामान्य लोगों को भी इस बीमारी के लक्षणों और जुड़ी सावधानियों के बारे में शिक्षा दी गई. नुक्क्ड़ नाटक को शहर की व्यस्त सड़कों पर बहुत अच्छा प्रतिसाद मिला।

 

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन के अनुसार ग्लूकोमा दुनिया भर में आँखों की रौशनी के जाने के लिए दूसरा सबसे बड़ा कारण है. अब तक ग्लूकोमा के लिए कोई ठोस उपचार उपलब्ध नहीं है. कोई भी व्यक्ति इस रोग की चपेट में आ सकता है. यह बिना चेतावनी वाले लक्षणों के साथ आता है. इस बीमारी के संबंध में कुछ सावधानियां अवश्य अपनाई जा सकती हैं, जो ग्लूकोमा को विकसित होने से रोक सकती हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण है- 40 वर्ष से अधिक की उम्र में आँखों की नियमित जांच करवाना। अपनी आँखों के प्रेशर की जांच करवाते रहना। इस संदर्भ में इंट्राऑक्युलर प्रेशर को कम करना महत्वपूर्ण है. यह सुनिश्चित करें कि आँखों के विशेषज्ञ ने आपको जो आई ड्रॉप्स, जिस समय और जैसे डालने को कहा है, उन्हें नियमित तौर पर वैसे ही और समय पर उपयोग में लाएं। यह सावधानियां ग्लूकोमा के विकास पर रोक लगा सकती हैं.

ख्यात नेत्र विशेषज्ञ तथा छतीसगढ़ आई हॉस्पिटल के चीफ मेडिकल ऑफिसर, *डॉ. अभिषेक मेहरा ने मरीजों का परीक्षण करने के पश्चात् कहा की-‘आँखों के इलाज और जांचों को लेकर मरीज अक्सर बहुत ही लापरवाही बरतते हैं. आज जिन लोगों में ग्लूकोमा सामने आया है उनमें से 50 प्रतिशत से भी अधिक लोग लम्बे समय से लक्षणों को महसूस कर रहे थे लेकिन उन्होंने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। 40 वर्ष से ऊपर के प्रत्येक व्यक्ति को साल में एक बार आँखों की जांच करवानी ही चाहिए। चूँकि ग्लूकोमा सायलेंट किलर है, इसलिए इसका इलाज या जितनी जल्दी किया जाए, उतना अच्छा। इस बीमारी की शुरूआती अवस्था में ग्लूकोमा कोई खास नजर आने वाले लक्षण नहीं दर्शाता, इसलिए सावधान रखना और भी आवश्यक है.’*

श्रीमती रंजना मेहरा, डायरेक्टर, छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल, ने कैम्प के आयोजन के बारे में बात करते हुए बताया-‘हम पिछले 40 वर्षों से समाज और समुदाय की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं और हमारा प्रयास है कि उच्च दामों वाले गुणवत्तापूर्ण इलाज को आम आदमी की पहुँच में लाया जाए. इस वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक के अंतर्गत, हमने अधिक से अधिक लोगों को अंधत्व की रोकथाम के कारणों के साथ इस बीमारी से लड़ने के लिए जानकारी देने और मदद करने की कोशिश की है. हमने अपने विशेषज्ञ और अनुभवी डॉक्टरों के साथ समाज की सहायता करने के प्रयास किये हैं. हमारा लक्ष्य डायबिटीज से ग्रसित लोगों में दृष्टि खोने के खतरे को कम करना है.

**

Chhattisgarh Eye Hospital_
Pride of Chhattisgarh, a registered hospital since 1977 – Chhattisgarh Eye Hospital has established its name as one of the best centers for the treatment of eye.

Providing solution to all eye problem
Running successfully State’s first 24hrs functional emergency unit for eye, CG Eye hospital proudly possess an optical dispensing unit, contact lens unit, Medicine dispensing unit, contact lens unit , library and mess.
Examining around 45,000 patients and performing 3500-4000 surgery per year, the hospital masters in handling critical & rare eye diseases. Routine eye cases of cornea, cataract, occuloplasty, glaucoma, retina & paediatric care are handled exceptionally well with personalized care.

****

 

Leave a Reply