कांग्रेस हिन्दू उदारवाद के चक्कर में कही की नहीं रही

कांग्रेस हिन्दू उदारवाद के चक्कर में कही की नहीं रही


क्या आपने कभी कांग्रेस को साम्प्रदायिकता के खिलाफ झंडा उठाये देखा है ?
क्या आपने कभी दलितों आदिवासियों की प्रताड़ना के खिलाफ झंडा उठाये देखा ?
क्या आपने कभी फर्जी मुठभेड़ या मनावाधिकार के हनन पे झंडा उठाये देखा ?
क्या आपने कभी दंगो ,मुस्लिम या इसाई की प्रताड़ना के खिलाफ खडे देखा ?
और तो और धर्मिक उन्माद के खिलाफ भी कभी निकलते नहीं देखा .
कलबुर्गी ,दाभोलकर या पनसरे की हत्या के खिलाफ भी कभी सडक पे उतरते नहीं देखा होगा.
उदार हिन्दू की राजनीति करते करते वे कही के नही रहे .
न हिन्दुओ ने उन्हें अपना माना और न अकलियत के लोगो ने ,
जब भी उन्हें तीसरा विकल्प मिला वे उधर ही चले गएदेहली में आप ने दोनो को एक सा मान के ललकारा तो दोनों साफ हो गये .
कांग्रेसियों में एक बड़ा वर्ग अन्दर से भाजपाई ही होता है ,अर्थात उसकी समझ धर्म को लेके उन जैसे ही होती है
कांग्रेस चाहती तो इतने सालो के सत्तासीन होने के बाद भी संघ ,दुसरे धर्म के सेनाएं या ज़हर फ़ैलाने१ वाले संघटन आज इतने मजबूत नहीं होते .
गुजरात में जनसंघार के दोषी आज सत्ता में न आके वे सब जेल में होते , लेकिन कांग्रेस हमेशा उदार हिन्दू होने के दंभ में उन्हें यहाँ तक पंहुचा दिया .
इसके एक नहीं हजार उदहारण है
चलो एक बता देता हूँ
घोर सांप्रदायिक और आतंकवादी संघटन सनातन संस्था के खिलाफ 1100 पेज का डोजियर महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र को भेजा की इस पे प्रतिबन्ध लगाया जाये.
केंद्र में भी कांग्रेस की सरकार थी , लेकिन उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं करनी थी और नहीं की .
कारण ?
शिवसेना और भाजपा उनके खिलाफ हिन्दू विरोधी होने का तमगा फिट कर देते .
यही सनातन संस्था कई बुद्धजीवियो की हत्या और विस्फोट के काम में व्यस्त है.
आज की स्थितियों के लिये कांग्रेस की उदार हिन्दू वादी नीतिया भी जिम्मेदार है .

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