हिमांशु कुमार : राजघाट से सहारानपुर की पदयात्रा , दिन प्रतिदिन की कहानी हिमांशु की जुबानी : भिक्खुओं तुम चलते रहना , बहुजन के हित के लिये , बहुजन के सुख के लिये – बुध्द

हिमांशु कुमार : राजघाट से सहारानपुर की पदयात्रा , दिन प्रतिदिन की कहानी हिमांशु की जुबानी : भिक्खुओं तुम चलते रहना , बहुजन के हित के लिये , बहुजन के सुख के लिये – बुध्द

6 मार्च 2018

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आज सुबह राजघाट से पदयात्रा शुरू हुई

इस पदयात्रा में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ से जज श्री प्रभाकर ग्वाल और उनकी पत्नी प्रतिभा ग्वाल भी थी

जज प्रभाकर ग्वाल दलित है

और कानून का साथ देने के अपराध में उन्हें बर्खास्त किया गया है

वह हमारे सामने लोकतंत्र के संकट का एक जीता जागता सबूत है

तथा भारतीय न्याय व्यवस्था पर हमले का उदाहरण है

इसके अलावा पत्रकार प्रशांत टंडन, रजा हैदर, सय्यैदैन ज़ैदी भी शामिल हुए,

भाई आशुतोष कुमार भी आए

छत्तीसगढ़ से संजीत बर्मन ने पदयात्रा के बारे में सुना तो वह शामिल होने आ गए

कृष्णा चौधरी मयूर विहार से साथ में शामिल है

हरकेश बैरवा हमारे बहुत पुराने क्रांतिकारी जन गायक जिनके साथ हमने राजस्थान में 2010 में साइकिल यात्रा की थी वह शामिल हुए

गांधीवादी साथी रमेश शर्मा और मनोज पांडे साथ में आए

 

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पदयात्रा आज साहिबाबाद पहुंची

यहां हमें बौद्ध विहार में ठहराया गया है

शाम को युवाओं के साथ बैठक का कार्यक्रम है

कल सुबह यहां से गाजियाबाद के लिए पदयात्रा शुरू होगी*
बाबा साहब के पौत्र प्रकाश अंबेडकर ने

राजघाट से सहारनपुर जेल तक चलने वाली पदयात्रा के लिये शुभकामनाएं भेजी है

आदिवासी कार्यकर्ता सोनी सोरी ने भी पदयात्रा के साथ अपनी एकता का सन्देश भेजा है

सोनी सोरी का कहना है कि सहारनपुर में जैसे ही यह पदयात्रा समाप्त होगी

सोनी सोनी और उनके साथी बस्तर में पदयात्रा शुरू कर देंगे

चरथ भिक्खवै चारिकम
बहुजन हिताय बहुजन सुखाय
– गौतम बुद्ध

भिक्षुओं तुम चलते रहना
बहुजन के हित के लिये
बहुजन के सुख के लिये

 

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पदयात्रा का आज गाजियाबाद में पड़ाव है

पहले हम अंबेडकर पार्क में पहुंचे और फिर प्रसेनजीत भाई ने हमारे रुकने की व्यवस्था करी

कई सारे मित्र मिलने आए

हम लोगों ने जाति व्यवस्था पर चर्चा करी

हम लोगों ने गीत गाए

बहुत अच्छा दिन बीता

शाम को Facebook से दोस्त बने श्रीराय जी हमारे पास पहुंच गए हैं

कल से Shri Roy जी भी पदयात्रा में शामिल रहेंगे

हम जो दोस्त पहले से इस पद यात्रा में है

वह दूसरे के बारे में ज्यादा जान रहे हैं

दोस्ती ज्यादा प्रगाढ़ होती जा रही है

छत्तीसगढ़ से आए संजीत बर्मन इससे पहले सारे देश में मोटरसाइकिल से यात्रा कर चुके हैं

साथी कृष्णा चौधरी जी बहुत अच्छे खिलाड़ी और लेखक हैं

कल सुबह यहां से निकलकर हम लोग मोदीनगर पहुंचेंगे

कल मोदीनगर पड़ाव होगा

दिन में मुरादनगर में भी मीटिंग का कार्यक्रम है

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पदयात्रा दल मुरादनगर में थोड़ा समय रूका

बाबा साहेब अम्बेडकर की प्रतिमा के सामने सभा हुई

भीम आर्मी के साथियों को अदालत द्वारा जमानत दे दिए जाने के बाद भी रिहा ना करना

भारत की न्याय व्यवस्था और संविधान पर हमला है

तानाशाही दबे पांव नहीं डंके की चोट पर आ रही है इसे रोकना ही होगा.

ग्राम पबरसा जिला मेरठ में

युवाओं ने कहा संविधान और लोकतन्त्र की ज़िम्मेदारी हमारी है

यह काम सरकार के जिम्मे नहीं छोड़ा जा सकता

कल हम लोग दौराला पहुंचेंगे.

 

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आज पदयात्रा दल सहारनपुर से पिछले पड़ाव नांगल पहुंचा

भीम आर्मी के साथी मेहर दास और टिंकू कपिल आकर मिले

यह साथी आज सुबह सहारनपुर जेल में साथी चंद्रशेखर रावण से मुलाकात करने गए थे

मेहर दास जी ने जब चंद्रशेखर भाई को बताया कि आपके लिए हिमांशु कुमार और उनके साथी दिल्ली से पदयात्रा करते हुए कल सहारनपुर पहुंचने वाले हैं

तो चंद्रशेखर भाई ने कहा कि देखिए हमारे लिए लोग कितनी तकलीफ उठा रहे है

और उन्होंने मेहर दास जी से कहा कि जाकर पदयात्रा दल के सदस्यों से मिलकर आइए

और पूछिए उन्हें कोई तकलीफ तो नहीं है

आज मुजफ्फरनगर से देवबंद के लिए जब हम निकले

तो रास्ते में रामपुर तिराहे पर लोगों ने चर्चा करने के लिए रोक लिया

वैसे रोज हम सुबह 5:00 बजे निकल पड़ते थे और अगले पड़ाव तक 12 या 1 बजे तक पहुंच जाते थे

लेकिन आज हम 11 बजे तक मीटिंग करते रहे

मुजफ्फरनगर से सहारनपुर तक पूरी सड़क पर कोई पेड़ नहीं है

कड़ी धूप और किसी दरख़्त का कोई साया तक नहीं

पांव में छाले भी हैं

तभी रास्ते में एक ट्यूबवेल चलता दिखाई दिया

 


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दौराला, यूपी, दिल्ली से 6 तारीख को पदयात्रा शुरू करके साहिबाबाद, गाजियाबाद, मुरादनगर, मोदीनगर, मेरठ होते हुए दौराला तक आ पहुंचे हैं।
रोज नए घर में ठहरना, नए लोगों से मिलना, देश-समाज-जाति-सांप्रदायिकता-राजनीति पर खूब लंबी चौड़ी चर्चाएं हो रही हैं।

महिलाएं, युवा, वरिष्ठ नागरिक सभी तरह के लोग बात कर रहे हैं। यह यात्रा जेल में बंद भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं चंद्रशेखर, शिवकुमार और सोनू की रिहाई की मांग को लेकर है।

इन लोगों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। लेकिन सरकार ने न्यायालय के आदेश को नहीं माना। हमने इसे न्यायपालिका पर और संविधान पर हमला माना। हमारे मन में बेचैनी थी कि इतने बड़े मुद्दे पर इस देश में बेचैनी क्यों नहीं है। लोग संविधान और न्यायपालिका पर हमले के प्रश्न को उठा क्यों नहीं रहे हैं।

इसलिए अपने स्तर पर विरोध करने के लिए पैदल चल पड़ने के अलावा कोई उपाय नहीं सूझा तो अंततः 6 तारीख को हम निकल पड़े।

Facebook पर मेरे लिखने के बाद दिल्ली से कृष्णा चौधरी जो वकील हैं वह अपना बैग लेकर साथ चलने के लिए आ गए। छत्तीसगढ़ के शिक्षक संजीत वर्मा ने अपना बैग पैक किया और यात्रा में शामिल हो गए। जेएनयू में पढ़े राजस्थान के क्रांतिकारी गायक हरकेश बैरवा ने भी अपना बैग कंधे पर टांगा और मेरे साथ आ गए। शुरुआत में काफिला काफी बड़ा था। पत्रकार प्रशांत टंडन, हैदर रजा, हरियाणा से धर्मेश प्रेम, दिल्ली से गांधीवादी रमेश शर्मा, उत्तराखंड से मनोज पांडे और रंजन, दिल्ली से सौरभ सिंह, आशुतोष कुमार, मोहर भाई और उनका परिवार, छत्तीसगढ़ से जज प्रभाकर ग्वाल और उनकी पत्नी प्रतिभा ग्वाल शामिल थे। बाकी के साथी धीरे-धीरे विदा हुए और हम 5 लोग यात्रा करते रहे।

उत्तर प्रदेश का यह बहुजन समाज पार्टी के प्रभाव वाला इलाका है। शुरू में मेरे मन में डर था कि बहुजन समाज पार्टी और चंद्रशेखर के बीच जो मतभेद हैं शायद उसका असर हमें मिलने वाले समर्थन और हमारी मीटिंग में संख्या पर पड़ सकता है। लेकिन मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि दलित समुदाय ने चंद्रशेखर के मामले को राजनीति से परे रखकर इसे अपने समुदाय की अस्मिता और उस पर होने वाले हमले से जोड़कर देखा है और मायावती जी के वोटर होने के बावजूद दलित समुदाय चंद्रशेखर का भी समर्थन कर रहा है।

मोदीनगर में महिलाओं ने गीत गाया की बहन जी ने कॉलेज बनवाया जिसमें बहुत सारी टीचर और बहुत सारे बच्चे हैं। अंबेडकर साहब का गीत गाया और चंद्रशेखर के समर्थन में भी नारे लगाए।

इसी तरह मेरठ जिले के गांव पबरसा में भी लोगों ने कहा कि हम मायावती बहन जी और चंद्रशेखर के विवाद में नहीं पड़ना चाहते। हम भीम आर्मी का समर्थन करते हैं और मायावती बहन जी को वोट देते हैं।

मेरठ में मेरे पास एक फोन आया जो एक अनजान व्यक्ति का था। मैंने उनसे नाम पूछा उनका सरनेम राजपूत वाला था। मुझे थोड़ा डर लगा, क्योंकि भीम आर्मी और राजपूतों के बीच झगड़ा हुआ था। लेकिन जब वह युवा मिले तो पता चला कि वह तो प्रगतिशील विचारधारा से बहुत प्रभावित हैं। उनके पास बहुत सारे प्रगतिशील उपन्यास और पुस्तकें हैं। उनसे बात करके मैं बहुत प्रभावित हुआ। उनकी समझदारी और समाज को बदलने की उनकी तड़प, दलितों के साथ होने वाले अन्याय के विरुद्ध उनकी समझ और उसे बदलने का जज्बा देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा।

मुझे हमेशा से लगता है कि भारत में सामाजिक न्याय की लड़ाई सिर्फ दलितों की लड़ाई नहीं है। जब तक इस लड़ाई में और सभी जातियों के लोग नहीं शामिल होंगे यह लड़ाई मुकम्मल नहीं हो सकती।

इसी तरह से संविधान और कानून को बचाने की लड़ाई भी सिर्फ दलितों को नहीं लड़नी है। यह देश के हर वर्ग, हर जाति, हर संप्रदाय की लड़ाई है। अन्याय के मुद्दे को व्यापक मुद्दा बनाने के लिए की जा रही यह पदयात्रा 17 मार्च को सहारनपुर पहुंचेगी।

 

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पदयात्रा आज खतौली में पहुंची

बहुत अच्छी मीटिंग हुई

कल पदयात्रा मुज़फ्फरनगर पहुंचेगी*
तो खुद को ठंडा करने का लालच नहीं रोक पाए

आज शाम तक देवबंद पहुंच जाएंगे*
भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं को अदालत के आदेश के बावजूद भी रिहा ना करने के खिलाफ की जा रही पदयात्रा दल आज देवबंद पहुंचा*
चंद्रशेखर भाई की इस सज्जनता ने मुझे बहुत प्रभावित किया

कल हमारी मुलाकात जेल में अवैध रूप से बंद साथी चंद्रशेखर से होगी
भीम आर्मी के नौजवानों ने अपने साथियों को अदालत के आदेश के बावजूद रिहा ना करने के खिलाफ जेल भरो आंदोलन किया था

उसके बाद भीम आर्मी से जुड़े युवाओं को सरकार ने परेशान करने का अभियान चला दिया है

सैकड़ो दलित नौजवानों को शांति भंग से जुड़ी धाराएं में फंसाकर उन्हें हर हफ्ते अदालत के चक्कर कटवाए जा रहे हैं

सैंकड़ों दलित नौजवानों के ऊपर 107/ 16 के मुकदमे लगा दिए गए हैं

हालांकि इस धारा में एक ही बार में मुचलका देने पर मामला समाप्त हो जाता है

लेकिन सहारनपुर के आसपास के अनेकों गांव में दलित नौजवानों पर मुकदमे समाप्त नहीं किए जा रहे हैं

बल्कि हर हफ्ते दलित युवकों को तारीख पर तारीख दी जा रही है

उन्हें बार-बार कोर्ट बुलाया जा रहा है

यह उत्तर प्रदेश सरकार के जातिवादी और दमनकारी तौर-तरीके हैं

योगी आदित्यनाथ, भीम आर्मी से डरे हुए हैं

उन्हें डर है कि कहीं दलित भीम आर्मी के साथ जुड़कर भाजपा के लिए मुसीबत ना खड़ी कर दे

हम सब को जातिपाति भूल कर भाजपा द्वारा दलितों के इस दमन के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलन्द करनी चाहिये
ग्राम भाटखेड़ी जिला सहारनपुर में युवाओं के साथ संविधान पर हमला और उसे बचाने की हमारी जवाबी राजनीति को लेकर चर्चा हुई

 

 

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यात्रा जारी है …….

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