आप ‘ जो बताए भाजपा के मन को भाए :   नथमल शर्मा , संपादक ईवनिंग टाईम्स बिलासपुर.

12.03.2018

बिलासपुर 

्  जिस समय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह बस्तर के जंगल की एक सड़क पर बाइक पर घूम रहे थे उस समय आप पार्टी के सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कह रहे थे कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस तो रमन सिंह की गोद में बैठी है। इसी समय  नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंहदेव बिलासपुर के हाट – बाज़ार में धूल फांकते, तो एक गांव में जमीन पर बैठकर दाल – भात खा रहे थे और लोगों से पूछ रहे थे कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में क्या क्या जोड़ा जाए। और हाँ, ठीक इसी समय प्रदेश के कद्दावर मंत्री और अब फिर से डॉ रमन सिंह के सबसे करीबी अमर अग्रवाल भी बिलासपुर की गलियों में घूम रहे थे। कल ये वो भी समय था जब भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक गम में डूबे हुए थे .

          नवरात्रि जे एक सप्ताह पहले का यह रविवार इतनी सारी बातें लेकर आया। इसका एक खास मतलब यह भी है कि चुनाव के दिन आ रहे हैं। सत्ता में बैठे डॉ रमन सिंह को कुर्सी सम्हाले रखना है तो पन्द्रह बरस से इंतज़ार करती कांग्रेस को सत्ता हासिल करना है। छत्तीसगढ़ में दो ही राजनीतिक दल जनाधार बनाये हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपना नया दल बनाकर जमीन तलाश रहे हैं तो अब आप के सुप्रीमो केजरीवाल भी आकर खुद को सबसे श्रेष्ठ बता रहे हैं। 

              दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कल राजधानी रायपुर में एक आम सभा ली। भाजपा सरकार पर कुछ आरोप लगाए । भ्र्ष्टाचार की बात भी की।हां, केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। दिल्ली की अपनी सरकार को छत्तीसगढ़ सरकार से बहुत अच्छी बताया। इसके साथ ही कह गए कि यहां की कांग्रेस पार्टी तो रमन सिंह की गोद में बैठी है ।इसका त्वरित जवाब भी कांग्रेस की तरफ से आया और आप पार्टी को भाजपा की बी टीम बताया गया। यह तो सच है कि आप पार्टी छत्तीसगढ़ में कुछ समय से सक्रिय है। हालांकि आज तक नगर निगम,नगर पालिका या पंचायत का कोई चुनाव आप ने नहीं लड़ा। लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारे थे और सिवाय सोनी सोरी के कोई लड़ते दिखा ही नहीं।

बिलासपुर में तो सीपीएम ने भी निजी मित्रता के आधार पर समर्थन कर दिया था पर बेहद प्रतिभावान किसान नेता आनंद मिश्र जमानत भी नहीं बचा पाए। जिलों में आप की इकाइयां है और अपनी तरह से सक्रिय भी। दिल्ली में जिस तरह गुटबाजी और बिखराव है यहां की प्रदेश और जिला इकाइयां भी इससे अछूती नहीं है। रमन सरकार के खिलाफ अभी तक तो आप का कोई बड़ा और प्रभावी आंदोलन हुआ नहीं है। फिर भी केजरीवाल का आत्मविश्वास ग़ज़ब का है वे कह गए कि दिल्ली की तरह ही छत्तीसगढ़ में सरकार बनाएंगे क्योंकि कांग्रेस और भाजपा मिले हुए हैं। और कांग्रेस तो रमन सिंह की गोद में बैठी है। वैसे रमन सिंह की गोद इतनी कितनी बड़ी है कि उसमें कांग्रेस के लिए भी जगह है और कांग्रेस से बाहर गए लोगों के लिये भी ?

 

         केजरीवाल ने यह भी कहा कि वे राजनीति नहीं जानते और यह कहते हुए सबसे बड़ा राजनीतिक बयान देकर चले गए । ऐसा बयान तो अजीत जोगी भी नही दे पाए थे । कांग्रेस  के नेता जरूर कहते रहते है कि जोगी और रमन सिंह मिले हुए हैं। लोग किसी और कारण से इसे सुनते और मुस्कुराते हुए मतलब निकल लेते हैं। लेकिन केजरीवाल के बयान के निहितार्थ तो साफ है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का विरोध यानी भाजपा का समर्थन या फायदा । अब भले ही आप किसी की भी बी टीम ना हो पर केजरीवाल ने तो पहली ही सभा से भाजपा को भरपूर फायदा करा ही दिया । और अगर वे इसे नहीं मानते कि ऐसा किया तो सचमुच वे राजनीति नहीं जानते। याद रखना चाहिए कि वे देश के सबसे क़द्दावर राजनेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। फिर भी कह रहे हैं तो माना जाए कि उन्हें राजनीति नहीं आती। 

   छत्तीसगढ़ में चौथी पारी जीतने के लिए बेताब है भाजपा। और वह भी 65 सीटों के साथ। कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है कि इस बार सत्ता में आना ही है। अपने सबसे बड़े कांटे जोगी को वह बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। हालांकि फिर भी अपने अंतविरोधों से जूझ ही रही है। पर केजरीवाल ने बड़ा राजनीतिक बयान देकर कांग्रेस की स्थिति को संदेहास्पद करने की कोशिश तो की ही है। छोटे और मंझोले स्तर पर कांग्रेस पार्षदों और नेताओँ के पास ठेके , सप्लाई, जैसे सरकारी काम बरसों से है और बड़े नेताओं का कोई काम अटकता नहीं। सिर्फ भूपेश बघेल की ज़मीन ही तो अफसरों ने नापी है। बाकी सारे कांग्रेस नेता ठीक ठाक धंधे में लगे और भरपूर कमा ही रहे हैं। ऐसे में रमन सिंह की गोद वाले बयान के मायने तो है हीं। कांग्रेस नेताओं के गांव शहरों में पसीना बहाने की मेहनत पर केजरीवाल के इस राजनीतिक बयान ने पानी तो फेरा ही है ,जाहिर है फायदा भाजपा को ही पहुचाया है। तो क्या बी टीम का काम कर रहे हैं केजरीवाल ? वैसे आप पार्टी के प्रारम्भिक उभार के दिनों में कई राजनीतिक विश्लेषकों और प्रमुख पत्रकारों ने भी कहा था कि आप को कारपोरेट का समर्थन प्राप्त है। इसके अपने निहितार्थ हैं क्योंकि आप पार्टी किसी राजनीतिक विचारधारा के साथ नहीं है। जब सुप्रीमो ही कहे कि उन्हें राजनीति नहीं आती तो….तो साफ है कि राजनीति नहीं जानने की बात करना भी सबसे बड़ी राजनीति है। 

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