लेनिन की मूर्ति को तोडना : यह हमला भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रगतिशील साम्राज्यवाद विरोधी विरासत पर है. : दीपंकर_भट्टाचार्य, महासचिव, भाकपा-माले

6.02.2018

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भाजपा के महासचिव राम माधव ने ‘त्रिपुरा बदल दो’ नारे के साथ लेनिन की मूर्ति के विध्वंस का जश्न मनाया. आरएसएस कहता है कि भारत को लेनिन से क्या लेना देना है? भगत सिंह और उनके साथी लेनिन से प्रेरणा ग्रहण करते हुए अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ते हुए फांसी पर चढ़ गए, वहीं आरएसएस हिटलर व मुसोलिनी की पूजा करते तथा अंग्रेज शासकों के साथ सांठगांठ करते हुए ही पले बढ़े हैं. लिहाजा, यह हमला भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रगतिशील साम्राज्यवाद विरोधी विरासत पर है. किसान, झुग्गी झोपड़ीवासी, फुटपाथ दुकानदार, पकौड़ा विक्रेता आज ऐसे सारे लोग बुलडोजर की मार झेल रहे हैं. लेनिन अकेले नहीं हैं, वह उनलोगों के साथ हैं, जो आज भारत में जमीन, जीविका और मर्यादा के लिए संघर्ष कर रहे हैं. दरअसल, यह लड़ाई आरएसएस व सावरकर (जिसने अंग्रेजों से माफी मांगी और शहीदों का माखौल उड़ाया) बनाम भगत सिंह (जिन्होंने आजादी के लिए लड़ते हुए शहीदों की मौत धारण की) के बीच है. यह लड़ाई हिटलर बनाम लेनिन की है. यह लड़ाई कारपोरेट बुलडोजर बनाम मेहनतकश लोगों और उनके जीवन व जीविका की है.

 

#दीपंकर_भट्टाचार्य, महासचिव, भाकपा-माले
अंग्रेजी से अनूदित

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