राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने माना कि वंजामी हिडमा को सुकमा पुलिस ने गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा . ः छतीसगढ पुलिस से कार्यवाही करने को कहा , क्यों न पीड़ित को मुआवजा दिया जाये .

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने माना कि वंजामी हिडमा को सुकमा पुलिस ने गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा . ः छतीसगढ पुलिस से कार्यवाही करने को कहा , क्यों न पीड़ित को मुआवजा दिया जाये .

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने माना कि वंजामी हिडमा को सुकमा पुलिस ने गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा . ः छतीसगढ पुलिस से कार्यवाही करने को कहा , क्यों न पीड़ित को मुआवजा दिया जाये .

5.03.2018

 

यह एक पुराना केस है जिसमें जगदलपुर लीगल एड़ ग्रुप ने शिकायत की थी कि सुकमा पुलिस द्वारा एक आदिवासी युवक को गैर कानूनी हिरासत में रखा है . तीन सालों से केस के बारे में में क्या हो रहा है इसकी कोई जानकारी भी नहीं थी .पीड़ित परिवार भी शायद भी शायद न्याय की आस खो चुका होगा .
आज मानव अधिकार आयोग का फैसला आया है कि वास्तविक रूप में वंजामी हिडमा को कम से कम तीन दिन तक गैर कानूनी हिरासत में रखा गया था।
इस आदेश से आशा बढती है कि शायद मानवाधिकार आयोग में गिने चुने लोग अभी भी अपनी ज़िम्मेदारी को गंभीरता से ले रहे हैं।

आयोग ने पुलिस से 4 सप्ताह में 3.5.2018 तक कार्यवाही करने का आदेश दिया है .

शिकायत में कहा गया था कि पुलिस ने वंजामी हडमा पि. जोगा नि. नीलावरम, सुकमा को दिनांक 27.7.2014 की सुबह 4 बजे घर से उठाया और उसके परिवार को कोई सूचना नहीं दी गई कि उसे कहाँ ले जा रहे है।

अगले दिन दिनांक 28.7.2014 को शिकायतकर्ता और जगदलपुर लीगल एड ग्रुप ने तीन बार पुलिस अधीक्षक सुकमा से हडमा के बारे मे जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की परन्तु पुलिस अधीक्षक ने उनको कोई जानकारी नहीं दी .

कानूनन पुलिस 24 घंटो से ज्यादा किसी को अपनी हिरासत में नहीं रख सकती है – उसे न्यायालय में 24 घंटो के भीतर ही हर बंदी को मैजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना होता है। साथ ही पुलिस को अनिवार्य रूप से 24 घंटो के भीतर हर हिरासती बंदी के परिवार को भी सूचना देनी होती है कि वह कहाँ और किस आरोप में हिरासत में लिया गया है।

जब अगले दिन, दिनांक 29.7.2014 तक भी हडमा की कोई जानकारी नहीं मिली. और उसे किसी न्यायालय में पेश नहीं किया गया, तो जगदलपुर लीगल एड ग्रुप ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को ईमेल के जरिये सूचित किया कि वंजामी हडमा पुलिस की गैर कानूनी हिरासत में है।

मानवाधिकार आयोग ने पुलिस अधीक्षक से उनकी रिपोर्ट मांगी जिसमे लिखा गया कि वंजामी हडमा को विधिपूर्ण रूप से 30-31.7.2014 के मध्य रात्रि में पकड़ा गया है, और वह गम्भीर अपराधों में आरोपी है. मानवाधिकार आयोग ने ध्यान दिया कि शिकायतकर्ता ने शिकायत 29.7.2014 को ही भेज दी थी और वह आयोग के आफिस में 30.7.14 की दोपहर 2.20 pm को प्राप्त भी हो गई थी, जबकी पुलिस कह रही है कि 30-31 की रात्री को हडमा को पकड़ा है, और उसकी औपचारिक गिरफ्तारी 31.7.2014 की रात को दिखा रही है। इससे यह स्पष्ट है कि पुलिस ने उसको पहले से ही पकड़ा हूआ था, और वह 3 दिन की गैर कानूनी हिरासत में था, जो कि हडमा के मौलिक अधिकारों का हनन है।

अब आयोग ने मुख्य सचिव छग शासन को जवाब देने के लिये कहा है कि वंजामी हडमा को छग पुलिस द्वारा उनके मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिये मुआवजा राशि क्यों नही प्रदान की जाये.

लेकिन सवाल तो यह है कि आयोग धनराशी देने की बात कर रहा है किन्तु संबंधित पुलिस अधीक्षक या किसी पुलिस अधिकारी के विरुद्ध कोई कदम उठाने की बात नहीं है .

और यह भी कि यह वही सुकमा के एसपी डी. श्रवण हैं, जो आज के दिन बस्तर के एस पी हैं।

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आयोग का संपूर्ण आदेश इस प्रकार है :

 

http://nhrc.nic.in/display.asp?fno=748/33/0/2014

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124787/CR/2014

Name of the ComplainantJAGDALPUR LEGAL AID GROUPAddressVRINDAVAN COLONY (NEAR MASJID), JAGDALPUR,BASTAR , CHHATTISGARHName of the VictimVANJAMI HADMA S/O JOGAAddressVILLAGE. NEELAVARAM, PS. SUKMA,CHATTISGARH , CHHATTISGARHPlace of IncidentVILLAGE. NEELAVARAMCHATTISGARH , CHHATTISGARHDate of Incident7/27/2014Direction issued by the CommissionThese proceedings shall be read in continuation of the earlier proceedings of the Commission dated 4.4.2016. Commission directed that the report received from the concerned authorities be transmitted to the complainant for comments, if any, within 4 weeks. Pursuant to the directions report of SP, Sukma, Chhattisgarh dated 8.11.2014 was sent to the complainant vide speed post dated 20.5.2016. No comments / objections received from the complainant. Commission had perused the complaint. It is alleged that Vanjami Hadma was picked up from his house in Village Nilavaram, PS Sukma on 27.7.2014 at around 4 A.M. by the police of PS Sukma. It is alleged that even after 55 hours of his being taken away by the police his family has not been informed about his whereabouts and the charge, he was picked up by the police. The complainant Jugdalpur Legal Aid Group had contacted 3 times SP, Sukma on 28.7.2014 at 8.37 a.m., 11.45 a.m. and 4.36 p.m. for seeking information about Hadma detention. But no information was given. According to SP, Sukma report Vanjami Hadma was arrested between the night of 30/31 July, 2014 from his Patelpara, Nilavaram house in crime No. 57/11 u/s 147/148/149/302 IPC and Sectrion 25/27 Arms Act and Crime No. 54/14 u/s 147/148/149/307 IPC and Section 25/26 Arms Act. The allegations that he was picked up on 27 July have been denied. Commission had perused the complaint which has been received in this Commission on 30 July, 2014 at 2.20 p.m. with specific allegation that Vanjami Hadma was picked up in the night of 27 July, 2014, on the contrary police claimed that he was arrested on 31.7.2014 at 11.30 p.m. On the basis of facts mentioned above it is clear that Vanjami Hadma was picked up as alleged by the complainant on 27.7.2014 and he was kept in illegal detention till his formal arrest on 31.7.2014 at 11.30 P.M. The complaint of the complainant dated 29.7.2014 was received on 30.7.2014 at 2.21 p.m. in Commission through e-mail. It is clear from the above facts that the police of Sukma had kept the Vanjami Hadma in illegal detention for more than 3 days and have violated his human rights of life and liberty. Commission thus directs that a notice u/s 18(a)(i) of the PHR Act, 1993 be issued to the Chief Secretary, Govt. of Chhattisgarh to file response as to why the Commission should not recommend monetary compensation to the victim for violation of his human rights by the State Police.
The response should be filed in 4 weeks.Action TakenStatus on 3/5/2018

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