अठेने  तिकड़ी और गर्द ओ ग़ुबार के बीच से गुजरता बचपन : शब्द चित्र नवल शर्मा 

 

5.03.2018

सीपत बिलासपुर  संदर्भ 

चालीस साल पहले एक बस चला करती थी ; नाम था “लाला बस सर्विस ” , बिलासपुर से सीपत आते जाते लोगों का इकलौता परिवहन और उस का तीसरा स्टाप होता था – लिंगियाडीह । ऐय्याश ठाकुर की रखैलों की तरह लिंगियाडीह ने भी बिलासपुर ठाकुर के नाम की चूड़ी पहन ली , अब लिंगियाडीह छोटी ठकुराइन की हैसियत पा गया और नया नाम मिला – राज किशोर नगर ( वाली ) । बिलासपुर ठाकुर ने वादा किया होगा राजकिशोर नगर वाली छुटकी ठकुराइन से – तेरे को नौलखा पहनाऊंगा । ठाकुर के लड़के हुए – आधे ठाकुर कहलाने लगे । मां लिंगियाडीह – नौलखा की आस में और आधे ठाकुर – अठन्नी की आस में बुढ़ाए जा रहे हैं ।

बूढ़ी ठकुराइन की दो औलाद – बड़का का नाम ‘ लोयेला स्कूल ‘ , छोटका का नाम – स्टेडियम । अभी छोटका का नाम करण नहीं हुआ है , बचपन में ही पोलियो हो गया सो स्टेडियम दिव्यांग है , लचक – लचक के चलता है फिर हंपर के बैठ जाता है । छोटका अद्धा ठाकुर – मां बाप पर भारी पड़ गया , किस्मत – अपनी अपनी ।

 

बड़का लोयेला स्कूल है तो हैसियत वाला , पर है तो अद्धा ठकुर । बिल्डिंग शानदार है पर आने जाने का रास्ता , ठाकुर बाप ने दिया तो – पर उबड़ खाबड़ और कच्चा । रास्ता सुधारने का काम ठाकुर ने शुरू तो करवा दिया पर काम का जिम्मा सौंप दिया – ” अठेने ” को । अब पूछिये ये अठेने कौन , तो बसंती तांगे वाली ने बताया , अधिकारी – ठेकेदार – नेता यानी ‘अठेने’ । इन लोगों ने क़सम खायी थी कि , * 31मार्च ’18 * के पहले , बसंती के गाल जैसी चिकनी सड़क बनवा देंगे , तो लो – देख लो ये फ़ोटो , ऐसी सड़क पर ‘ धन्नो ‘ चले तो लंगड़ी हो जायेगी ।

 

ठाकुरों के बारे में और भी बहुत जानती है – बसंती – तांगेवाली , कभी और कुछ बतलायेगी तो सामने आयेगा ही । फ़िलहाल इतना कि – अठेनों ने सड़क बनाने की बजाय बिगाड़ कर रख दी है । बच्चे बेचारे – मुंह बांध कर सांसें रोक कर स्कूल आ जा रहे हैं । परीक्षा सर पर है और गर्द ओ ग़ुबार इतना की बीमार होना तय है ।

अद्धा ठाकुर का अद्धा विकास – बच्चों पर भारी ।
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नवल शर्मा 

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