डा. अजय खरे – एक जुझारू जनविज्ञानी : 4 मार्च जन्म दिन पर उन्हें याद किया उनके सहकर्मी विश्वास मेश्राम ने .

डा. अजय खरे – एक जुझारू जनविज्ञानी : 4 मार्च जन्म दिन पर उन्हें याद किया उनके सहकर्मी विश्वास मेश्राम ने .

4 मार्च  2018 

रायपु

डॉ अजय खरे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देशभर में जन विज्ञान आंदोलनों के साथ गहराई से जुड़े हुए थे .आज 4 मार्च को उनके जन्मदिन और स्मृति दिवस पर उनके साथ बिताए दिनों को याद करते हुए उन्हें स्मृतियों के कुछ फूल अर्पित है.

 

डॉक्टर अजय खरे एक अच्छे नेत्र चिकित्सक थे मध्यप्रदेश विज्ञान सभा के कार्यकर्ता के रूप में तथा महासचिव के रूप में उन्होंने जन-जन तक विज्ञान फैलाने में अपनी गहरी अभिरुचि का प्रदर्शन किया था. डा0 अजय इतने सरल और जमीन से जुड़े थे कि हमेशा विज्ञान के प्रचार प्रसार के लिए सभी कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते नज़र आए. कितने ही बार मैंने उन्हें सम्मेलनों के तैयारियों में भोपाल की दीवारों पर रातों भर वालराइटिंग करते देखा . स्लम क्षेत्रों में अंध विश्वासो और चमत्कारो के खिलाफ कार्यक्रम, गैस दुर्घटना के बाद डॉक्टर हरेन्द्र अग्रवाल के साथ विज्ञान सभा क्लीनिक में रोगियों का उपचार, एड्स प्रभावितो के लिए जागरूकता अभियान, स्कूल, कालेजो में वैज्ञानिक सोच बढाने के लिए कार्यक्रमों में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रहती थी.

जन विज्ञान आंदोलन की दिशा तय करने में भी उन्होंने संघर्ष किया और उनके जुझारू संघर्ष के ही परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में जन विज्ञान आंदोलन आज यह मुकाम हासिल कर सका है.

उन्होने बैतूल जिले के प्रभातपट्टन में परंपरागत तरीके से भेलवा के बीजों से काला तेल निकालने के दौरान इस काम में लगी आदिवासी महिलाओं के हाथों में होने वाले घाव के उपचार और हाथों को ब्लेक आइल के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए दस्ताने, दवाइयों, बेहतर तकनीक हस्तांतरण के काम को पूरे मनोयोग से पूरा किया.

 

पातालकोट के भारिया आदिम जनजाति के बीच मध्यप्रदेश विज्ञान सभा के काम को हर जगह सराहना मिली. डॉक्टर अजय खरे डॉ हरेंद्र अग्रवाल , सुभाष चन्द्र शर्मा, एसआर आजाद ,प्रोफेसर एच एस यादव ,डॉक्टर शैलेंद्र पटने की टीम ने वहां दिल लगाकर काम किया . वहां भारिया आदिवासियों की खेती बाड़ी , उनका स्वास्थ शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आज दिख रही प्रगति डा0 अजय खरे की अगुवाई में, पहुंच विहीन पातालकोट में शुरू किए गए काम का नतीजा है. जिसमे डीएसटी के सलाहकार डा मलहोत्रा, सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एंड डेवलपमेंट के डा0 रघुनंदन तथा दिल्ली साइंस फोरम के साथियों का भी सहयोग मिला.

बस्तर के मुड़पार गांव में स्थापित किए गए जन विज्ञान केंद्र में डॉक्टर अजय खरे ने कई फेरे लगाए और वहां के ग्रामीणों के लिए बेहतर तकनीक के द्वारा आय बढ़ाने हेतु कार्यक्रम को गति दी . रेशम पालन के लिए छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्सों में स्थित कोसा पालन केंद्रों को विकसित करने के लिए भी डॉक्टर अजय खरे ने लगातार कई बार इन केंद्रों का भ्रमण कर इन्हें बेहतर बनाने में योगदान दिया.

1990 में शुरू हुए साक्षरता आंदोलन बहुत सक्रिय भूमिका रही .कई सारे स्वास्थ और साक्षरता पर लिखे गए गीत औऱ नाटक तैयार करने औऱ उनके मंचन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई. इसके अलावा भारत जन विज्ञान जत्था भारत ज्ञान विज्ञान जत्था हमारा देश कार्यक्रम ज्वाय ऑफ़ लर्निंग और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन आदि अनेक कार्यक्रम हमें उनकी याद दिलाते रहेंगे .वह विज्ञान आंदोलन के माध्यम से सामाजिक परिस्थितियों को बदलना चाहते थे और उन्होंने अपनी जिंदगी भर पूरी ताकत के साथ यथास्थिति को बदलने के लिए काम किया .अब यह जन विज्ञान आंदोलन की जिम्मेदारी है की उनके अधूरे सपने को पूरा करने में अपनी प्रतिबद्धता दोहराए.

विश्वास मेश्राम

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