🔴 उम्र के इस पड़ाव पर पीछे छूटा समय याद आता है, कुछ रह गई कसर आज भी कसक दे जाती है. मध्मम वर्गीय परिवार के साथ मोहल्लेनुमा बस्ती में रहना होता पर उस बस्ती की मस्ती की बात ही कुछ और थी. – डा. सत्यभामा अवस्थी

🔴 उम्र के इस पड़ाव पर पीछे छूटा समय याद आता है, कुछ रह गई कसर आज भी कसक दे जाती है. मध्मम वर्गीय परिवार के साथ मोहल्लेनुमा बस्ती में रहना होता पर उस बस्ती की मस्ती की बात ही कुछ और थी. – डा. सत्यभामा अवस्थी

 

3.03.2018

बिलासपुर

होली हमारे देश के प्रमुख त्योहारों में से एक है.,जिसे लगभग सभी धर्मों के लोग एक ही तरह से मनाते हैं. ये अवसर होता है देवर भाभी, नन्द भौजाई, पति पत्नी के साथ खुलकर मौज मस्ती करने का. प्रेमी प्रेमिका को तो आज भी मौके निकालने पड़ते हैं. उम्र के इस पड़ाव पर पीछे छूटा समय याद आता है, कुछ रह गई कसर आज भी कसक दे जाती है. मध्मम वर्गीय परिवार के साथ मोहल्लेनुमा बस्ती में रहना होता पर उस बस्ती की मस्ती की बात ही कुछ और थी. बसंत पंचमी से लकड़ियों की चोरी की योजना बननी शुरू हो जाती थी. देर रात लडकों के साथ बिंदास घूमा करते,, हाय रे,, छि रे,, जैसी कोई बात ही नही थी. नगाड़े की थाप के साथ अक्सर लगता, यार ये कोई लड़का छेड़ता क्यों नहीं,, चोरी छुपे देखता क्यों नहीं? बाद में उन्ही दोस्तों ने बताया,, टाम ब्वॉय बनी फिरती है,, चाहकर भी कुछ नही कह पाये. बाद में कुछ कुछ होता है फिल्म देख याद करने की कोशिश की,, कोई वैसा था क्या? पर कसम से वो कसक तो आज भी है. पहली नजर में में प्यार को तरस गए. जब परिपक्व प्यार हुआ तो सब गुणा भाग के साथ. फिर भी जीवन का बहुत लुत्फ़ उठाया. होली पर बडे मजे किये. भाभियों के साथ तो सौजन्य होली होती, सुबह सुबह टीका लगा पैर छू लो.. हां मिस्टर जी की सरहजों की होली मजेदार हुआ करती थी. आज किसी के पास समय नहीं है,, पता नही क्या करते रहते हैं लोग. नगाड़ों की थाप को कान तरस गये,, फाग की जगह होली के फिल्मी गीत सुबह से शाम तक सुनते रहो. गुझिया कचौरी तो रेडीमेड है भाई,, कई औरतों का गृह उद्योग हो गया है.

देवर भाभी, ननद भौजाई के बीच तलवार खींची हुई है, अदालतों में आमना सामना हो रहा है. देश के साथ मजाक चल रहा है, जनता जनार्दन का दिल दिमाग इधर उधर उलझा हुआ है. जीवन भर चकाचौंध की दुनिया में रहने वाली सिने तारिका दूर देश बर्फ की सिल्ली में अंधकार पर पडी है. फिर भी होली तो होली है कुछ यादें आज भी गुदगुदी करती हैं, वो रंग गुलाल, वो दौड़ा भागी,, मन मन भावे मुड़ हलावे वाली ना नुकूर आज भी तन मन भरा भरा सा हो जाता है. आइये सब छोड़ छाड़ कर परंपरागत होली मनायें. राग द्वेष भूल गले मिल जायें. आप सबको होलियाना मुबारक.

CG Basket

Related Posts

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account