होली के दौरान गर्भवती महिलाओं हेतु सावधानियां : डॉ. ए. सुरेश कुमार

डॉ. ए. सुरेश कुमार, आईवीएफ विशेषज्ञ तथा डायरेक्टर, अशोका सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, रायपुर,

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01.03 .2018

होली का त्यौहार, परिजनों, मित्रों और अपनों के साथ उल्लास, उत्साह और आनंद मनाने का समय होता है. लेकिन रंग भरे त्यौहार के इस अवसर पर गर्भवती महिलाओं या वे दम्पत्ति जो इनफर्टिलिटी के ट्रीटमेंट बाद गर्भधारण कर बच्चे के आने की राह देख रहे हैं, उन्हें विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है.

 

हम इस  कड़ी में कुछ ऐसे बिंदुओं पर प्रकाश डाल रहे हैं जिन्हें ध्यान में रखकर भविष्य में बिना किसी समस्या की आशंका से परेशान हुए बिना त्यौहार का भरपूर आनंद उठाया जा सकता है।

गर्भावस्था में बिना सुरक्षा पर ध्यान दिए होली खेलना, आपके लिए कई सारी समस्यायों को आमंत्रण दे सकता है. ऐसे में आपकी और आपके होने वाले बच्चे की सेहत और सलामती के लिए यह सलाह है कि या तो इस वर्ष आप होली न खेलें या अगर खेलें तो बिना किसी समस्या के होली का त्योहार मनाने के लिए नीचे दिए सुझावों पर गौर करें-

’ गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन कर रहे लोगों से दूरी बनाकर रहना चाहिए। होलिका दहन के दौरान उन्हें सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचना चाहिए क्योंकि ये जल्दी आग पकड़ सकते हैं. इसकी बजाय कॉटन के कपड़े पहनने चाहिए। महिलाओं को आग से होने वाली किसी भी प्रकार की इंज्युरी से पूरी तरह बचने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के दौरान इस चोटों का उपचार कठिन होता है. चूँकि गर्भवती महिलाएं अधिक नाजुक स्थिति में होती हैं और उन्हें यूँही कोई भी दवाई नहीं दी जा सकती, ऐसे में गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुँचने का खतरा हो सकता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है.

’ होली, रंगों का त्यौहार है और अपने प्रियजनों के साथ रंग खेले बिना यह त्यौहार अधूरा सा महसूस होता है. यदि आप इसके घर पर सब्जियों या फलों या अन्य साधनों से बने प्राकृतिक रंगों का प्रयोग कर रही हैं तो यह आपके और आपके शिशु के लिए सुरक्षित होगा। आप हर्बल या वेजिटेबल डाय से बने रंगों का भी प्रयोग कर सकती हैं. हर्बल डाय जिनमें जड़ी-बूटियों या फूलों के सत्व का प्रयोग होता है, आपके लिए एंटीऑक्सीडेंट्स का भी काम करते हैं. यदि आप गुलाल का उपयोग कर रही हैं तो सावधान रहें क्योंकि इनमें विभिन्न रसायन (कैमिकल) होते हैं और ये सिंथेटिक होते हैं जिसके कारण ये आपके लिए त्वचा संबंधी समस्याओं से लेकर गर्भपात, जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने या प्रीमैच्योर बच्चे के होने तक की आशंका खड़ी कर सकते हैं. यही नहीं इन सिंथेटिक रंगों में लैड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, उद्योगों में काम आने वाली डाय और कांच के पिसे हुए टुकड़े भी होते हैं जो आपके रिप्रोडक्टिव सिस्टम, नर्वस सिस्टम और किडनी पर बुरा असर डाल सकते हैं. हर्बल गुलाल से खेली जाने वाली होली आपके लिए सर्वोत्तम विकल्प है.

’ यदि आप पानी से होली खेलने के बारे में सोच रही हैं तो इस विचार को फिलहाल स्थगित कर दें क्योंकि यह आपके फिसल कर गिरने की आशंका को बढ़ा सकता है. यह गर्भस्थ शिशु में ब्रेन इंज्युरी तथा उसे अपनी जगह से खिसकने से लेकर गर्भपात और अन्य शारीरिक विकृतियों जैसी स्थितियां पैदा कर सकता है, जिन्हें संभालना कठिन होता है. यदि आप आखिरी तिमाही (अंतिम तीन महीने) की शुरुआत में ऐसी किसी दुर्घटना की शिकार होती हैं तो सिजेरियन डिलीवरी की स्थिति पैदा हो सकती है जिसके अपने प्रभाव हैं. इसलिए सूखी होली आपको इन तमाम दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियों से दूर रख सकती है.्

’ एक और महत्वपूर्ण चीज जो गर्भवती महिलाओं को ध्यान में रखना चाहिए वह है उनकी श्डाइटश् यानि खान-पान. डॉ. ए. सुरेश अग्रवाल के अनुसार-श्चूँकि होली एक ऐसा त्यौहार है जब अधिकांश लोग मिठाइयों और तले हुए स्नैक्स का जमकर उपयोग करते हैं, ऐसे में गर्भवती महिलाओं को मीठे का इंटेक कम रखने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इस स्थिति में उनमें जेस्टेशनल डाइबिटीज होने की आशंका बढ़ सकती है. यह आगे उनके लिए और भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है.श् वे महिलायें जो पहले ही जेस्टेशनल डाइबिटीज से ग्रसित हैं उन्हें अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए क्योंकि मीठे का सेवन उनमें शुगर के स्तर को बढ़ा सकता है और फैटी फूड्स कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकते हैं. जेस्टेशनल
डाइबिटीज की वजह से बच्चे में जन्मगत विकृतियों के अलावा बच्चे के मोटापे से ग्रसित होने या मृत बच्चा पैदा होने जैसी आशंकाएं बढ़ सकती हैं. इसलिए यह सलाह दी जाती है कि गर्भवस्था के दौरान होली के समय बहुत अधिक मीठे और तले-गले भोजन से दूरी बनायें।

’ इस दौरान यह भी सलाह दी जाती है कि आप अपने बेवरेजेस यानी पेय पदार्थों के सेवन को लेकर सतर्कता रखें। कैफीन इंटेक पर नजर रखें। केवल चाय ही नहीं, बल्कि कॉफी, कोल्डड्रिंक या चॉकलेटयुक्त पेय पदार्थों में भी कैफीन होता है, इसका ध्यान रखें। इसी तरह होली के लोकप्रिय पेय भांग या भांगयुक्त लस्सी, ठंडाई को लेकर भी सतर्क रहें। भांग में नशा पैदा करने वाले गुण होते हैं जो आपको उनींदा या सुस्त बना सकते हैं. इसका सेवन आपके ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में इजाफा कर सकता है. भांग अजन्मे शिशु के दिमाग और नर्वस सिस्टम पर भी बुरा प्रभाव डाल सकती है.

’ होली की तैयारियों में घर और बाजार के कामों में व्यस्त महिलाओं को हर दो घंटे में थोड़ी मात्रा में हेल्दी फूड और लिक्विड की मात्रा के सेवन को ध्यान में रखना चाहिए। यह उन्हें कमजोरी से बचाने के साथ ही चक्कर आने या शिथिल महसूस करने से भी बचाता है.

’ हालाँकि गर्भवती महिलाओं को इस त्यौहार के दौरान घर पर ही रहने की सलाह दी जाती है लेकिन यदि घर से निकलना आवश्यक ही हो तो अपने साथ एक छाता लेकर निकलें ताकि पानी या गुब्बारों से आपका बचाव हो सके. खासतौर पर व्यस्त बाजारों को पार करने और रहवासी इलाकों से गुजरते समय बहुत सतर्कता रखें।

’ अच्छा होगा यदि आप इस दौरान अपनी त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए लम्बी बाहों के कुर्ते और सलवार या ढीली फिटिंग वाली पैंट्स पहनें।

’ शरीर पर खुली त्वचा वाले हिस्सों पर अच्छी तरह से तेल, पेट्रोलियम जैली या मॉइश्चराइजर लगाएं ताकि त्वचा द्वारा रंगों को सोखने की प्रक्रिया से बचाव हो सके. यह होली खेलने के बाद रंगों को त्वचा से हटाने में भी बहुत मददगार होगा।

’ घर पर इमरजेंसी किट (फर्स्ट एड के लिए) तथा डॉक्टर्स के नंबर हमेशा सही जगह पर सुरक्षित तैयार रखें ताकि कोई समस्या आने या अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर गर्भवती महिला को हॉस्पिटल ले जाने या मदद करने के लिए सभी सम्भव सहायता उपलब्ध हो सके.

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डॉ. ए. सुरेश कुमार, आईवीएफ विशेषज्ञ तथा डायरेक्टर, अशोका सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, रायपुर,

 

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