होली पर रखें आँखों को सुरक्षित. : डा. अभिषेक मेहरा

01.03 .2018

रायपुर 

-डॉ. अभिषेक मेहरा, आई स्पेशलिस्ट और सीएमओ, छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल, रायपुर, छत्तीसगढ़

वो दिन गुजर गए जब होली खेलने के लिए केवल फूलों और सब्जियों से बने रंगों का उपयोग किया जाता था, अब बड़े पैमाने पर सिंथेटिक कैमिकल से बने रंगों का प्रयोग किया जाता है. हालाँकि अब भी प्राकृतिक रंगों से होली खेलने ओर लौटने के पक्ष में कुछ आवाजें उठाई जा रही हैं, लेकिन पूरी तरह उन सुरक्षित विकल्पों की लौटने में अभी बहुत समय है.

 

ऐसे में यह सुनिश्चित अवश्य करें कि पावडर या अन्य कोई पदार्थ आपकी आँखों में न जाए. होली के दौरान शरीर के नाजुक अंगों में से एक होने और आजकल रंगों में हानिकारक रसायनों का अधिक प्रयोग होने से आँखें बहुत संवेदनशील मामला बन जाती हैं. कृपया यह सुनिश्चित करें कि आपकी आँखें पूरे समय सुरक्षित रखें। शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से सबसे अधिक खुले रहने से आँखें क्षतिग्रस्त होने के मामले में सबसे अधिक असुरक्षित होती हैं. होली के दौरान रंगों से खेलते वक्त आँखों का ध्यान न रखने का परिणाम आँखों में इरिटेशन, एलर्जी, संभावित अस्थाई अंधत्व या त्वचा के संक्रमण के रूप में सामने आ सकता है. कुछ रंग कैंसरस भी हो सकते हैं. ऐसे में हर्बल रंगों से होली खेलने पर जोर देने के अलावा आप नीचे दिए गए कुछ टिप्स की भी मदद इस मामले में ले सकते हैं-

 

* जब कभी भी रंगों के आँखों के सम्पर्क में आने की आशंका हो, अपनी आँखों को पूरी तरह कवर करके रखें। सनग्लासेस या धूप के चश्मे इस मामले में सबसे अच्छा विकल्प हैं
* लोगों को हाथों अपने चेहरे पर रंग लगाने से रोकने की कोशिश करें। यदि आप ऐसा करने में सफल नहीं हो पाते हैं तो अपनी आँखों और ओठों को कसकर बंद रखने को लेकर खसतौर पर सावधान रहें। हमेशा कलर लगाने वाले से यह निवेदन करें कि वह आँखों के आस-पास रंग न लगाए।

* सर पर लगे हैट्स भी रंगीन पानी को आँखों तक पहुँचने से रोक सकते हैं

* यदि आप कार से सफर कर रहे हैं तो खिड़कियों को पूरी तरह बंद रखें। इस तरह से पानी या रंग भरे गुब्बारों से बचाव हो सकता है. पानी या रंग से भरे गुब्बारे आपकी आँखों के लिए सबसे अधिक नुकसानदाई हो सकते हैं क्योंकि ये आईबॉल या आँखों की पुतली को नुकसान पहुँचाने के साथ ही रेटिनल डिटैचमेंट की स्थिति भी पैदा कर सकते हैं.

* अपनी आँखों के आस-पास कोल्ड क्रीम लगायें और इसकी एक मोटी परत बना लें. यह इस बात को सुनिश्चित करेगा कि आँखें धोने पर रंग पूरी तरह निकल जायेंगे। जब आँखों के आस-पास से रंग छुड़ा रहे हों तो सामान्य गर्म पानी का उपयोग करें और आँखों को कसकर बंद रखें।

* होली पर बच्चों को सिर्फ नॉन-टॉक्सिक रंगों का ही उपयोग करना चाहिए |

* अपने ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट का नंबर हमेशा पास रखें ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में उनसे तुरंत सम्पर्क किया जा सके |

* होली के दौरान बड़े पैमाने पर होने वाली आई इंज्युरी में शामिल हैं-

– एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस
– कैमिकल बर्न्स
– कॉर्नियल एब्रेशन
– आँखों को होने वाला ब्लंट ट्रॉमा

यदि होली खेलते समय हानिकारक रंग आँखों के अंदर चले जाएँ तो वे हल्का लालपन या किरकिरी उत्पन्न कर सकते हैं जो आमतौर पर अच्छी तरह पानी से धोने से ठीक हो सकता है. लेकिन यदि आँखों में तेज दर्द या जलन हो तो पीड़ित को तुरंत ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट से सलाह लेना चाहिए। साथ ही यदि देखने में परेशानी हो तो आँखों के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

 

आपको विशेषकर रासायनिक रंगों के सूक्ष्म कणों से सावधान रखना चाहिए। ये विषैले होते हैं और कॉर्नियल एब्रेशन का कारण बन सकते हैं. आँखों की ये समस्या तेज दर्द पैदा कर सकती है और आगे इसको अल्सर या संक्रमण के रूप में बढ़ने से रोकने के लिए किसी विशेषज्ञ द्वारा इलाज किये जाने की जरूरत होती है.

 

पानी या रंग से भरे गुब्बारे सबसे खतरनाक हो सकते हैं और आँखों के लिए ब्लंट ट्रॉमा का कारण बन सकते हैं जो कि आगे जाकर आँखों में रक्तस्राव (ब्लीडिंग), आँखों के प्राकृतिक लैंस को नुकसान पहुँचने या उसके अपने स्थान से खिसक जाने, मैक्युलर इडिमा (सूजन) या रेटिनल डिटैचमेंट का कारण बन सकता है. यह दृष्टि खोने या आँखों के पूरी तरह खत्म हो जाने की और ले जा सकता है. ये सभी आँखों के लिहाज से इमरजेंसी हैं और इनकी तरफ तुरंत ध्यान देना आवश्यक होता है.

 

यह बात सहज समझ में आती है कि होली के दौरान क्यों सभी का पुनः प्राकृतिक रंगों के उपयोग की ओर लौटना आवश्यक है। आँखों के साथ ही सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए इस तरह के जोखिमों के साथ त्यौहार अपने असल स्वरुप से बहुत दूर हैं. कोई भी व्यक्ति हानिकारक रसायनों की बजाय आसानी से बेसन, पलाश के पत्तों, पानी में गलाकर रखी गईं बीटरूट यानी चुकंदर, मेहँदी पावडर, गुलमोहर, जासवंत या हिबिस्कस के फूलों तथा अन्य प्राकृतिक साधनों से सभी तरह के रंग बना सकता है. आजकल बाज़ार में हर्बल गुलाल भी आसानी से उपलब्ध है, उसका भी प्रयोग किया जा सकता है.

 

-डॉ. अभिषेक मेहरा, आई स्पेशलिस्ट और सीएमओ, छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल, रायपुर, छत्तीसगढ़

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