चर्चा और आश्वासन के बाद बारनवापारा का धरना 37 वे दिन समाप्त .: जनसंगठनों ने पहुंच कर कहा एक महीने में मांग पूरी नहीं हुई तो संघर्ष आगे बढेगा .

28/2/2018

जन संघर्ष समिति और दलित आदिवासी मंच के बेनर तले अनिश्चित कालीन धरना का 37 वा दिन है जिसके ऐतिहासिक संघर्ष में पूरे छत्तीसगढ़ के जनसंगठनों व प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रानिक मीडिया व हाईकोर्ट के कानूनी मार्ग दर्शन के वकील साथियो ने इस आंदोलन को भरपूर समर्थन दिया और हाइकोर्ट में याचिका दायर करने का फ़ैसला किया गया.

 

कल दिनांक 27/2/2018 को अनिश्चित कालीन धरना में बैठे साथियो के साथ कसडोल से अनुभागीय अधिकारी श्री पैकरा जी धरना स्थल पहुच कर संघर्ष रत साथियो के साथ चर्चा किया गया साथ ही संघर्ष रत साथियो द्वारा दस सूत्री मांगों को लेकर अनुभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया अनुभागीय अधिकारी द्वारा आश्वासन दिया गया कि एक महीने के अंदर सारी कार्यवाही  किया जाएगा अभ्यारण के संघर्षशील साथियो द्वारा कहा गया कि अगर एक महीने के अंदर कारवाही नही होता है तो बार क्षेत्र के वनवासियों के द्वारा फिर से उग्र आंदोलन किया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी

आज दिनांक 28/2/18 को धरने के समाप्ति सभा किया गया दलित आदिवसी मंच से केजू राम पैकरा ने कहा कि वन विभाग द्वारा 10 गांव में 147बोर करवाया गया अलग अलग व्यक्ति के नाम से 2007 में लेकिन लोगो को पता ही नही है आज उसका वन विभाग द्वारा नोटिस दिया जा रहा है पैसा वसूली के डेढ़ लाख से ऊपर का हम सभी गांव वालो भी आंदोलन करने को तैयार है वह विभाग वाले पैसे खा कर दोष हम पर लगा रहा है जिसमें राजनांदगांव के किसान नेता सुधेष टेकाम ने कहा कि धरना  की समाप्ति है लेकिन संघर्ष समाप्त  नही हुआ है.

गांव गांव में वन यात्रा कर सामुदायिक वन अधिकार का दावा करेंगे व वन अधिकार कानून के बारे में प्रचार प्रसार कर वनाआधिकार मान्यता कानून का लाभ उठायेगे तेंदू पत्ता खुद संग्रह करेंगे अंत मे उन्हों ने कहा कि हम चरण पादुका नही लेंगे वन अधिकार लेंगे भीमलाल नेताम राष्ट्रीयअध्यक्ष आदिवशी भारत महासभा के द्वारा सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि सदियो से वनवासियों के साथ जुर्म होते आ रहे है जो वनों को सवार सजाया देश आजाद हो गई लेकिन वनवाशी आजाद नही नही हुए है आज भी वन विभाग के द्वारा जुल्म व दमन के नीचे पीस रहे है बहुत शाहा है अब ना सहेंगे अपना अधिकार ले के रहेंगे.

एमनेस्टी इंटरनेशनल से मनोहर चौहान ने वन अधिकार कानून का किस तरह से प्रसाशन द्वारा खिलवाड़ किया जा रहा है ग्राम सभा को सामुदायिक न दे कर वन विभाग के द्वारा बनाये गए वन प्रबंधन के नाम से दिया जा रहा है वन अधिकार कानून का क्रियांवयन न कर लोगो के अधिकारों से वंचिति किया जा रहा है विस्थापित ग्राम श्रीरामपुर से मकरदम श्रीराम बरिहा ने कहा की सरकार धोखा दे कर विस्थापन किया है हमारे साथ बहुत बड़ा छल हुआ है आज भी हमारा जमीन बंजर है पानी के लिए तरस रहे है रोजगार के लिए तरस रहे 75%लोग पलायन कर चुके है आप लोग धोखे में मत आना अपना गांव घर जमीन जंगल मत छोड़ना.

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन से आलोक सुक्ला अनिश्चित कालीन धरना सभा मे कहा सरकार अंग्रेजो के द्वारा बनाये कानून 1927 को अमल कर रही है इन सब कानून को खात्मा कर सरकार ने यह महसूस किया कि वनवाशियो के साथ जो इतिहासिक अन्याय हुआ है उस अन्याय को खत्म करने के लिए वनाआधिकार मान्यता कानून 2006 लाया गया इस कानून का 11 वर्ष पूरे होने के बावजूद सरकार इस कानून का धरातल पर कोई अमल नही हो रहा है सरकार आदिवसियों को उनके अधिकारों से वंचित कर रहा है.

आज के सभा का मुखिया अतिथिि  निर्दलीय विधायक  विमल चोपड़ा ने 37दिन के संघर्ष को बधाई देते हुए कहा कि आज प्रसासन में बैठी सरकार गरीबो के आवाज को बंद कर रही है उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित कर रही है पूँजी पतियो को पनाह दे रही है आज हमारे देश में कुछ ही लोगो के पास पैसा है जिसके दम पर सरकार व सासन चल रही है हम आप के संघर्ष में साथ है जो रोड़ से जेल की लड़ाई लड़ने में आप लोगो के साथ है मैं प्रसासन से बात करूंगा धरना यहाँ जरूर बन्द हो गया लेकिन लड़ाई यह बंद नही हुआ है हमारा संघर्ष जारी रहेगा बार अभ्यारण संघर्ष समिति के अध्यक्ष अमरध्वज यादव सब को धन्यवाद देते हुए कहा कि अनिश्चित कालीन धरना को समापन किया गया.

आज के सभा को वकील शोभा व दलित आदिवासी मंच के सयोजिक राजिम केतवास सौर यादव ने सम्बोधित किया संचालन पुरषोतम प्रधान ने किया

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  • देवेंद्र
    दलित आदिवासी मंच
    अमरध्वज यादव
    बार संघर्ष समिति वनांचल क्षेत्र

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