? पर्यावरणीय संवेदनशील हसदेव अरण्य में 4000 मेगावाट अल्ट्रा पॉवर प्लांट की स्थापना विनाशकारी कदम .: वन, पर्यावरण एवं आदिवासियों के हितों को देखते हुए राज्य सरकार निरस्त करें यह परियोजना : छतीसगढ.बचाओ आंदोलन .

?  पर्यावरणीय संवेदनशील हसदेव अरण्य में 4000 मेगावाट अल्ट्रा पॉवर प्लांट की स्थापना विनाशकारी कदम .: वन, पर्यावरण एवं आदिवासियों के हितों को देखते हुए राज्य सरकार निरस्त करें यह परियोजना :  छतीसगढ.बचाओ आंदोलन .

? पर्यावरणीय संवेदनशील हसदेव अरण्य में 4000 मेगावाट अल्ट्रा पॉवर प्लांट की स्थापना विनाशकारी कदम .: वन, पर्यावरण एवं आदिवासियों के हितों को देखते हुए राज्य सरकार निरस्त करें यह परियोजना : छतीसगढ.बचाओ आंदोलन .

27.02.2028
रायपुर

भाजपा शासित केंद्र और राज्य सरकार ने जनविरोधी व पर्यावरण के लिए घातक निर्णय लेते हुए छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में 4000 मेगावाट अल्ट्रा पॉवर प्लांट की स्थापना का निर्णय लिया हैं l इस परियोजना हेतु जिला कलेक्टर अंबिकापुर के द्वार दिनांक 23 फरबरी 2018 को आदेश जारी किया गया, जिसमे 6 गाँव की जमीन खरीद बिक्री पर पूर्णत प्रतिबंध लगा दिया गया हैं l इस परियोजना को राजस्थान में बिजली की आवश्यकता पूरी करने के लिए शासकीय उपक्रम राजस्थान राज्य विधुत उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा स्थापित किया जायेगा .

प्रस्तावित परियोजना स्थल हसदेव अरण्य क्षेत्र में हैं जो सघन वन, जैव विविधता से परिपूर्ण एवं कई महत्वपूर्ण वन्यप्राणियों सहित हाथियों का माइग्रेटरी कोरिडोर भी हैं l यह क्षेत्र मिनीमाता बांगो बांध का केचमेंट भी हैं जिससे प्रदेश में 4 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई होती हैं l इस सम्पूर्ण वन क्षेत्र को पर्यावरणीय महत्वता के कारण 2009 में खनन परियोजनाओं से मुक्त रखते हुए नो गो क्षेत्र घोषित किया गया था l इतने महत्वपूर्ण व समृद्ध वन क्षेत्र में 4 हजार मेगावाट क्षमता के पॉवर प्लांट की स्थापना पर्यावरण के लिए गंभीर संकट के साथ हजारों आदिवासी परिवारों की आजीविका को खत्म करेगा l इसके साथ ही प्रदेश में जल संकट की स्थिति लगातर बढती जा रही हैं l पहले से ही ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर प्रतिबन्ध लगाकर उधोगों को पानी दिया जा रहा हैं l यदि यह परियोजना स्थापित हुई तो सरगुजा सहित कोरबा एवं जांजगीर जिलो में भी भारी जल संकट पैदा होगा .

केंद्र व राज्य के इस निर्णय का छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन एवं हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने पुरजोर तरीके से विरोध करता हैं एवं इस विनाशकारी परियोजना को निरस्त करने की मांग करता हैं l आज देश में बिजली की उपलब्धता सरप्लस हैं l कुल स्थापित क्षमता 3,34,399 मेगावाट हैं जबकि पीक डिमांड लगभग 1 लाख 64 हजार मेगावाट हैं l केंद्र सरकार के स्वयं के विजन डॉक्यूमेंट 2030 में स्पष्ट रूप से यह कहा गया की सिर्फ पाईपलाइन परियोजना को छोड़कर अन्य नई बिजली परियोजना की आवश्यकता नहीं हैं .

सरगुजा में पूर्व प्रस्तावित अल्ट्रा मेगा पॉवर परियोजना को 2013 में ही निरस्त कर दिया गया था, फिर अचानक से बिना किसी पूर्व एमओयू के इस नई परियोजना को स्वीकृति क्यों दी जा रही हैं ? स्पष्ट रूप से एक बड़े कार्पोरेट घराने को फायदा पहुचाने, छत्तीसगढ़ की बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा को लुटने के मकसद से एक शासकीय उपक्रम को सामने रखकर यह परियोजना स्थपित की जा रही हैं l पहले से ही उस क्षेत्र में गलत तथ्यों के आधार पर खनन परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई हैं जिसकी वन अनुमति को माननीय नेशनल ग्रीन द्वारा निरस्त किया गया हैं और वर्तमान में माननीय सुप्रीम कोर्ट के स्टे आर्डर से खनन कार्य जारी हैं जिसमे हसदेव अरण्य के वन क्षेत्र का सतत विनाश जारी हैं l
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छत्तीशगढ़ बचाओ आंदोलन
आलोक शुक्ला नंदकुमार कश्यप 9977634040 9406213116

हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति
उमेश्वर सिंह अर्मो 08959195176

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