पत्थलगड़ी : 100 गांव के आदिवासियों ने शासन को दी चेतावनी : बिना ग्रामसभा की अनुमति के कुछ स्वीकार नहीं .: पांचवी अनुसूचि क्षेत्र में बगावती तेवर .: झारखंड .

रवि सिन्हा ,पत्रिका
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26.02.2018


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पत्थलगड़ी ,सरकारी योजनाओं का विरोध करने का आदेश .

झारखंड में आदिवासियों ने विरोध का नया तरीका निकाल लिया हैं,पत्तलगड़ी की प्राचीन परंपरा को उन्होंने हथियार के रूप में स्तेमाल करना शुरू कर दिया है . इसमे पिछले कुछ महीने में 100 से ज्यादा गांव जुड़ गये है ,इन लोगों के बगावती तेवर देख कर प्रशाशन सकते में है .इस अभियान मे गांवों की संख्या निरंतर बढ रही हैं.


सरकारी अधिकारियों को भेज रहे है ग्राम समादेश .

ग्राम समादेश में केंद्र सरकार , राज्य सरकार को कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन हो .CNT ,STPC एक्ट में सभी संशोधनों को रद्द करने ,भूमि अधिग्रहण रद करने को लिखा गया हैं .

,* यह मांगे नही मानने तक राष्ट्रीय त्योहारों ,चुनाव और सरकारी योजनाओं को न स्वीकार करने की बात कही गई है.
* कर्मचारियों को कुली मजदूर कहा गया है और बाहरी व्यक्तियों के आने जाने पर रोक लगा दी गई है .

पत्र भेजकर शासन को दी सूचना

पत्थलगड़ी के पहले ग्राम सभा ने स्पीड पोस्ट से प्रशाशन को नियम के अनुसार सूचित किया है ,पत्र को ग्रामसभादेश का नाम दिया गया हैं , संबंधित सभा ,जाति ,आय,आवसीय ,जन्म मौत, आचरण तथा अन्य सभी तरह के प्रमाण पत्र देने के अधिकार की बात की है .


क्या है पत्थलगड़ी की परंपरा .

पत्थलगड़ी में ग्रामसभा की ओर से गांव की ओर से एक पत्थर गाड़ने की परम्परा है ,जिसमे सबसे पहले ग्राम सभा का नाम फिर ग्राम सभा के सर्व शक्तिसम्पन्नता की घोषणा ,पारम्परिक कुढ़ प्रथा और ग्रामसभाओं के अधिकार की जानकारी होती है .
इसमे लिखा होता है कि सम्विधान के अनुछेद 244 (1) के अनुसार देश के नौ राज्य पांचवी अनुसूची क्षेत्र के तहत आते हैं ,जिसके अनुसार अधिकारियों को जानकारी दी जाती हैं कि लोकसभा या विधानसभा का कोई भी आदेश यहाँ लागू नहीं होता .

माओवादियों के उकसाने की आशंका

सरकारी क्षेत्रों में कहा जा रहा हैं की इस पहल के पीछे माओवादीयों का हाथ हो सकता हैं .

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