? भाषान्तर में आज ग्वाटेमाला के क्रांतिकारी कवि ओटो रेने केस्तिओ की एक चर्चित कविता ” तटस्थ बुद्धिजीवी ” का छायानुवाद : मणिमोहन . प्रस्तुति : डिग्री प्रसाद चौहान

?  भाषान्तर में आज  ग्वाटेमाला के क्रांतिकारी कवि ओटो रेने केस्तिओ की एक चर्चित कविता  ” तटस्थ बुद्धिजीवी ” का छायानुवाद  : मणिमोहन .  प्रस्तुति : डिग्री प्रसाद चौहान

? भाषान्तर में आज ग्वाटेमाला के क्रांतिकारी कवि ओटो रेने केस्तिओ की एक चर्चित कविता ” तटस्थ बुद्धिजीवी ” का छायानुवाद : मणिमोहन . प्रस्तुति : डिग्री प्रसाद चौहान

तटस्थ बुद्धिजीवी
———————-
एक दिन
मेरे मुल्क के
तटस्थ बुद्धिजीवियों को
कटघरे में खड़ा कर
सवाल करेंगे
हमारे सार्वधिक
साधारण जन ।

उनसे पूछा जाएगा
उन्होंने क्या किया
जब उनका मुल्क मर रहा था
धीरे – धीरे
जैसे मद्धिम आग
थोड़ी और अकेली ।

कोई नहीं पूछेगा उनसे
उनकी वेशभूषा के बारे में ,
दोपहर के भोज के बाद
उनकी लम्बी झपकी के बारे में ,
कोई नहीं जानना चाहेगा
” व्यर्थता के विचार ” पर
उनकी अनुर्वर बहसों के बारे में ,
कोई परवाह नहीं करेगा
उनके वित्त सम्बन्धी उच्च ज्ञान की ।

उनसे कोई सवाल नहीं किया जाएगा
ग्रीक पौराणिक कथाओं पर ,
या उनकी आत्म घृणा पर
जब उनके भीतर
कोई मरना शुरू करता है
एक कायर की मौत ।
कुछ भी नहीं पूछा जाएगा
निरे झूठ की छाया में पैदा हुए
उनके मूर्खतापूर्ण
औचित्य के बारे में ।

उस दिन
साधारण जन आएंगे ।

वे लोग जिन्हें
तटस्थ बुद्धिजीवियों की
किताबों और कविताओं में
कहीं कोई जगह नहीं ,
परन्तु जो रोज़ उनके घर
दूध , ब्रेड और अंडे पहुंचाते हैं ,
जो उनकी गाड़ियाँ चलाते हैं ,
उनके बगीचों और कुत्तों की
देखभाल करते हैं
उनके सारे काम करते हैं ,
और यही लोग पूछेंगे :

जब गरीब ख़स्ताहाल थे
आप क्या कर रहे थे
जब कोमलता और जीवन
उनकी देह से गायब हो गए थे ?

मेरे प्यारे मुल्क के
तटस्थ बुद्धिजीवियों
तुम कोई जवाब नहीं दे पाओगे ।

एक गिद्ध
चुप्पी का
खा जाएगा तुम्हारी हिम्मत और चतुराई ।

तुम्हारी अपनी दयनीयता
नोंच लेगी तुम्हारी आत्मा ।

और तुम्हारी बोलती
बन्द हो जाएगी
अपनी ही शर्म से ।

अनुवाद : मणि मोहन

CG Basket

Related Posts

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account