उस पीठ से और कैसे आदेश की अपेक्षा की जा सकती है जिसकी अध्यक्षता निर्लज्ज व्यक्ति दत्तू कर रहे थे –जस्टिस काटजू

उस पीठ से और कैसे आदेश की अपेक्षा की जा सकती है जिसकी अध्यक्षता निर्लज्ज व्यक्ति दत्तू कर रहे थे –जस्टिस काटजू

संजीव भट्ट की याचिका पर अपमानजनक फैसला-काटजू



जस्टिस काटजू ने कहा कि उस पीठ से और कैसे आदेश की अपेक्षा की जा सकती है जिसकी अध्यक्षता निर्लज्ज व्यक्ति दत्तू कर रहे थे, जिन्होंने खुलेआम मोदी की प्रशंसा की थी और जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने गुजरात के बर्खास्त आईपीएस अफसर संजीव भट्ट की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के विरुद्ध याचिका को खारिज करने को अपमानजनक फैसला बताते हुए प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू की कड़ी आलोचना की है।
बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधान न्यायाधीश एच एच दत्तू और न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की पीठ ने कहा था कि यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर और प्रतिद्वंदी राजनीतिक दल के नेताओं और गैर सरकारी संगठनों की सलाह से कदम उठाया और न्यायमूर्ति नानावटी आयोग के समक्ष अपने बयान दर्ज कराते समय इस संबंध में ई मेल भेजे कि प्रतिद्वंदी राजनीतिक दल के वकील द्वारा उसका पूरी तरह शोषण नहीं हो।
शीर्ष अदालत ने भट्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह और अन्य वकीलों के इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था कि इस मामले की जांच राज्य पुलिस से लेकर विशेष जांच दल को सौंप दी जाए। भट्ट ने 2011 में दायर याचिका में सीबीआई जांच का अनुरोध किया था लेकिन नई अर्जी में उन्होंने कहा कि चूंकि यह जांच एजेन्सी केन्द्र के नियंत्रण में है, इसलिए उन्हें निष्पक्ष जांच के प्रति आशंका है।
अदालत ने नौ साल बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा 27 फरवरी, 2002 को बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में मौजूद रहने का दावा करने और अपने अधीनस्थ को गवाही देने के लिये बाध्य करने पर भट्ट की आलोचना की थी।

जस्टिस काटजू ने कहा कि उस पीठ से और कैसे आदेश की अपेक्षा की जा सकती है जिसकी अध्यक्षता निर्लज्ज व्यक्ति दत्तू कर रहे थे, जिन्होंने खुलेआम मोदी की प्रशंसा की थी और जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।
इस संबंध में जस्टिस काटजू ने अपना वक्तव्य हस्तक्षेप को भेजा है, उसे हम नीचे मूल रूप में प्रकाशित कर रहे हैं।

Outrageous verdict in ex-IPS officer Sanjiv Bhatt’s petition against BJP chief Amit Shah

जस्टिस काटजू का मूल वक्तव्य 

Outrageous verdict
What other verdict is to be expected from a bench presided over by that shameless man Dattu, who openly praised Modi, and against whom there are serious allegations of corruption ?
In fact long before he was appointed Chief Justice of India I sent to the then Union Law Minister, Mr. Ravi Shanker Prasad, a copy of a dossier ( I still have a copy with me ) containing prima facie documentary proof of his massive corruption ( I also gave copies of the dossier… to Mr. Shanti Bhushan, senior member of the Committee on Judicial Accountability, media representatives etc). These include photocopies of a large number of sale deeds of plots of land in Bangalore in the name of his wife Gayathri ( who must be privy to his prima facie corruption ) showing her name but as daughter of K.G. Guruvayya, instead of wife of Dattu, and as an agriculturist. Why did the lady conceal her marital status ?
Many of these plots were purchased in violation of the Karnatak Land Reforms Act.
Dattu got himself allotted one plot in a scheme in which Karnatak High Court employees alone could get a plot. A high court judge is not an employee. He got another plot in a scheme whose bye laws say that a person who or whose wife has a plot in Bangalore

Justice Markandey Katju- former Justice of the Supreme Court of India.

Justice Markandey Katju- former Justice of the Supreme Court of India.
cannot be allotted a plot. A large number of other illegal acquisitions of wealth are mentioned in the dossier.
Dattu has built a palatial house in Bangalore on 1200 sq.m. land which must be costing 50 crores. Where did he get the money for this.
I requested all persons to whom I gave copies of the dossier that at least they should investigate the facts mentioned in the dossier, but nothing was done.
My guess is that when Ravi Shankar Prasad, the then Union Law Minister received the diossier I sent him, he must have shown it to Modi and Arun Jaitley, and then they must have blackmailed Dattu by showing him the dossier, and telling him to do as they say, otherwise they will expose him. How else is one to explain Dattu’s effulgent praise of Modi openly ? And how else is one to explain this latest outrageous judgment ?
A bench led by Chief Justice H L Dattu also lifted a stay on Bhatt’s trial in two cases and junked his petition which had initially sought taking away the probe from…

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