अस़गर वजाहत की दस लघु कथायें : भय का दर्शन

2.02.2018
अ.व.

1.
– गुरु जी मेरी लोकप्रियता कम हो रही है।
– कैसे राजन?
– लोग मेरी बात नहीं सुनते।
– तुम कैसे बात करते हो?
– जैसे आप से बात कर रहा हूं।
– नहीं नहीं इस तरह कोई तुम्हारी बात नहीं सुनेंगा।
– फिर क्या करूं गुरुजी?
– कान खोल कर सुन लो। तुम्हारी बात लोग उस समय तक नहीं सुनाएंगे जब तक तुम उनको डराओगे नहीं।

2.
– लोगों को कैसे डराया जा सकता है राजगुरु?
– आदमी को डराना तो संसार का सबसे सरल काम है राजन। किसी भी चीज से लोगों को डराया जा सकता है।
– जैसे?
– जैसे मरे हुए चूहे से डर दो।
-और?
– जैसे पानी से डरा दो।
– और?
-जैसे आग से डरा दो । डर तो बहुत ही उत्तम भाव है राजन।
– कैसे?
– डर से ही लोगों में एकता आती है।
– मैं यही करना चाहता हूं राजन।

3.
– डराने का सबसे उत्तम विषय क्या है राजगुरु ?
– इसका एक ही सिद्धांत है राजन।
– क्या सिद्धांत है राजगुरु?
– पहले पता करना चाहिए किसको क्या सबसे प्रिय है।
– उस से क्या होगा ?
– उसी से सब कुछ होगा राजन। उसी से सब कुछ होगा।

4.
– तुम को सबसे अधिक प्रिय क्या है राजन?
– मुझे सबसे अधिक प्रिय है मेरी सत्ता।
– अगर तुम्हें डरा दिया जाय कि तुम्हारी सत्ता चली जाएगी तो ?
– मैं बहुत डर जाऊंगा ।
– बस यही सिद्धांत है। यही सिद्धांत है। इस को पकड़ लो।

5.
– लोगों को सबसे प्यारा क्या होता है राजन?
– धर्म ।
– तुम्हें लोगों से कहना पड़ेगा कि उनका धर्म खतरे में है।
– पर किसी का धर्म खतरे में कैसे हो सकता है राजगुरु? सबको अपने अपने धर्म पर चलने की आज़ादी है । जो जितना चाहे धर्म करें, कौन उसे रोक सकता है।
– हां तुम ठीक कहते हो किसी का धर्म खतरे में नहीं हो सकता।
-तब लोगों को कैसे समझाया जाएगा कि उनका धर्म खतरे में है?
– डर होता नहीं, डर पैदा किया जाता हैराजन, यह बात गांठ में बांध लो।

6.
– आप तो ज्ञान का सागर है राजगुरु। यह बताइए कि डर किस तरह पैदा किया जाता है?
– हज़ार मुंह से बोल कर भी और चुप रह कर भी।
– चुप रहने से कैसे डर पैदा होता है राजगुरु?
– चुप्पी एक संदेश है राजन।
– और बोलना
– हज़ार मुंह से बोलना उससे बड़ा संदेश है।और वही संदेश है।

7.
– डर के और क्या क्या लाभ हैं राजगुरु?
– भय के अनगिनत लाभ हैं राजन ।
– क्या?
– पहला लाभ यह कि लोग तुम्हारी बात सुनते हैं।
– और ?
– और दूसरा लाभ यह है कि लोग संगठित होते हैं।
– और?
– तीसरा लाभ यह है कि लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है
– और
– उसके बाद लोग तुमसे सुरक्षा की मांग करते हैं।
-सुरक्षा की मांग?
– हां हां इसमें डरने की क्या बात है राजन। जनता को सुरक्षा देना सदा लाभकारी होता है।

8.
– भय के और क्या लाभ है राजगुरु?
– भय का एक और बहुत बड़ा लाभ है।
– वह क्या है?
– राजन, भय शत्रु पैदा करता है।
– शत्रु?
– हां रजन शत्रु।
– उससे क्या होता है राजगुरु?
– उसी से सब कुछ होता है राजन।
– क्या?
– यदि शत्रु न हों तो मित्र बनाना बहुत मुश्किल हो जयेगा राजन।

9.
– शत्रु होने से और क्या लाभ होते हैं राजगुरु?
– शत्रु होने से घृणा का भाव पैदा होता है।
– घृणा का भाव?
– बहुत उत्तम, सर्वोच्च होता है घृणा का भाव।
– कैसे राजगुरु?
– इससे बदला लेने की भावना पैदा होती है।
– बदले की भावना?
– हां प्रतिशोध की भावना।

10.

– प्रतिशोध की भावना से क्या लाभ होता है राजगुरु?
– सबसे बड़ा लाभ इसी भावना से होता है।
– कैसे?
– इस तरह कि प्रतिशोध में आदमी अंधा हो जाता है।
– अंधा हो जाता है, तो उस से क्या लाभ?
– उसी से तो लाभ होता है। अंधे लोगों से सत्ता को जितना लाभ पहुंचाता है उतना आंख वालों से नहीं पहुंचता।

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