25.01.2018

बहुत से दोस्तों ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया है,हैरत जताई है कि ‘पद्मावत’ पर हो रही हिंसा को राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने ‘कंडेम’ नहीं किया है। उसकी आलोचना नहीं की है। यह कोई नई बात नहीं है।यह बात पिछले 15-20 साल से खुलकर सामने आ चुकी है कि पूरे देश को धर्म, जाति, संप्रदाय और क्षेत्र के मुद्दों पर इतना हिंसक और उत्पाती बना दिया गया है और लोगों के अंदर बदला लेने की भावना इतनी ज्यादा बढ़ा दी गई है कि वह अमानवीयता की सभी सीमाएं पार कर गई है। सरकार और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना जो बाबरी मस्जिद गिराते समय देखी गई थी बढ़कर अब हजार गुना अधिक हिंसक हो गई है, विध्वंसकारी हो गई है। पूरे उत्तर भारत में केवल हिंदू मुसलमान ही नहीं बल्कि विभिन्न जातियां एक दूसरे के खून की प्यासी बना दी गई हैं। ऐसे हालत में लोकतंत्र को भी चलना है । मतलब लोगों के वोट भी लेने हैं और वोटों का समीकरण भी देखना है। अब कम से कम उत्तर भारत किसी सिद्धांत और कार्यक्रम पर नहीं केवल घृणा और हिंसा के आधार पर वोट करता है। कांग्रेस को भी वोट चाहिए और वोट देने वाली जनता कहीं बाहर से नहीं आएगी, यही जनता होगी । इसलिए यहां की जनता के उन्माद पर उंगली उठाने की हिम्मत किसी में नहीं है क्योंकि उन्माद, हिंसा, घृणा को इतना बढ़ा दिया गया है कि शायद अब कोई सुप्रीम कोर्ट या सरकार या राजनीति उसका सामना नहीं कर सकती। और इस आधार पर चलने वाला लोकतंत्र लोगों के लिए कितना कल्याणकारी होगा इसकी कल्पना की जा सकती है। अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि लोकतंत्र की विफलता हमें कहां ले जाएगी है।

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(एक राजनीतिक विश्लेषण)