लम्बी कविता ‘देह’ का यह सातवाँ भाग : शरद कोकास

*लम्बी कविता ‘देह’ का यह सातवाँ भाग प्रेषित कर रहा हूँ । इस भाग में ऐसे अनेक शब्द हैं जिनका संदर्भ जानकर आप कविता का बेहतर आनन्द ले सकते हैं सो फुटनोट्स में वे संदर्भ मैंने दिए हैं । इस भाग में कविता एक नया मोड़ लेती है, उम्मीद है आपको अच्छी लगेगी .

*शरद कोकास की लम्बी कविता ‘देह’*

भाग सात 

***

यूँ सृजन के सुख से अभिभूत होती रही यह देह
खेत की तरह बीजों के लिए बिछती रही
उड़ती रही धुआँ बनकर कारखानों की चिमनियों से
धूप में जलती रही पलती रही दिमाग़ों में
जननी का दुलार जनक का प्यार लिए
मित्रों की शुभकामनाओं बुज़ुर्गों के आशीष की रोशनी में
अनवरत जारी रही उसकी यात्रा

जिसके हर पड़ाव पर अलग अलग आख्यानों में
इस देह की ही गाथा दर्ज है
नाना रुपों में घटनाओं में इतिहास के पन्नों पर
इसलिए कि जो कुछ भी घट चुका है दुनिया में
वह इस देह पर ही घटा है
सृजन से विनाश तक अनंत कथाएँ उत्कीर्ण हैं इसकी त्वचा पर
पत्थर की किसी आदिम कब्र के नीचे दबी है यह
उसकी पसलियों में भाले के निशान हैं

करोड़ों चीखें अटकी हैं इसके कंठ में
अपने असमय विनाश के विरोध में बाहर आने को व्यग्र
बेबीलोन(2) के किले से कुरुश(3) का सर पुकारता है
मुक्त करो मुझे रक्त से भरे चमड़े के इस थैले से
हवांगहो(4) के तट पर खुदी कब्र से एक दास की आवाज़ आती है
ट्राय(5) के जले खण्डहरों से बाहर आती है इसकी दुर्गंध
आल्प्स(6) पर्वत की ढलानों से लुढ़कती है इसकी कराह

पानीपत हो करबला(7) हो सिकंदरिया(8) या समरकंद(9)
दुनिया के तमाम युध्दक्षेत्रों में जब रात होती है
अंधकार की पृष्ठभूमि में दिखाई देता है इसका अक्स
जिसके हाथ पांव और सर कटे हुए होते हैं

जिस रास्ते से गुज़रती है अंतहीन साम्राज्य की भूख
उस रास्ते के पेड़ों पर लटकी हुई है यह
अपनी शहादत में राहगीरों की संवेदना समेटती हुई
विद्रोह की आवाज़ में झूल रही है फाँसी के फंदे पर

हिरोशिमा और नागासाकी के पूजनीय स्मारकों में
पीढ़ियों में विकिरण के अंदेशे से ग्रस्त
इसकी ही अकथ पीड़ा है

गैसचेम्बरों(10) से निकलकर इसकी घुटन फैल रही है दुनिया में

उपनिवेशवादी गिध्दों की निगाह से बचती हुई
जालियाँवाला बाग के सूखे कुयें में मौज़ूद है यह

जाने कितनी तोपों के मुँह पर बंधी रस्सियों में
अभी चिपके हैं मांस के कुछ लोथडे
कितने हाथियों के पावों में इसका खून लगा है
जिसकी ताज़ी चमकती सतह पर
अन्याय का अक्स दिखाई देता है

वहीं तुर्कमान गेट(11) पर पिचके हुए बर्तनों के बीच
धोखा छल फरेब और अधूरे वादों के ज़ख़्म लिए
एक देह पड़ी है बुलडोज़र से कुचली हुई

एक देह ज़हरीली हवाओं में सांस लेती
भागती हाँफती दम तोड़ चुकी है
यूनियन कार्बाईड(12) के दरवाज़े पर

अपनी क्षत -विक्षत आँखों में आश्चर्य लिए
नरोड़ा पाटिया(13) की नूरानी मस्जिद के सामने पड़ी है यह

इसकी बेबसी का सौंदर्य दिखाई देता है कश्मीर की वादियों में
मंदिर की घंटियों और अज़ानों में इसीका आर्तनाद सुनाई देता है

अब भी इस अग्निदग्धा की बू आती है
हवस के तंदूर(14) पर सिंकी रोटियों में

जंगलों में पेड़ों पर लटक रही है यह
पड़ी है पटरियों के किनारे क्षत -विक्षत
फेंक दी गई है किसी चलती बस(15) से नीचे

संवेदना का सर्वस्व लुट जाने की व्यथा लिए
किसी खूनी दरवाज़े(16) के पास अपनी जड़ता में
कमोबेश निर्जीव सी पड़ी है एक सजीव देह
अपने पौरुष में अहंकार की बुलंदियाँ छूती एक देह
जिसे भोगकर कब की जा चुकी है

*शरद कोकास*

 

*कविता में प्रयुक्त शब्दों के सन्दर्भ और इतिहास*

2. *बेबीलोन* – 2300 ईसा पूर्व में स्थापित प्राचीन मेसोपोटामिया सभ्यता का एक प्रसिद्ध शहर
3. *कुरुश* – ई.पू.576 में पर्शिया का सम्राट सायरस द ग्रेट ,ईरान की सम्राज्ञी टामरिस ने प्रतिशोध में जिसका सर काटकर खून से भरे मर्तबान या चमड़े के थैले में डुबो दिया था ।
4. *ह्वांगहो* – चीन की पीली नदी जिसके किनारे अनेक कब्रें मिली हैं।
5. *ट्राय* – होमर (800 ई.पू.) के महाकाव्य ‘इलियड’ में वर्णित यूनान का प्रसिद्ध नगर जहाँ के राजकुमार पैरिस द्वारा स्पार्टा की रानी हेलेन का अपहरण किया गया फलस्वरूप भयंकर युद्ध हुआ ।
6. *आल्प्स* यूरोप की बारह सौ किलोमीटर लम्बी पर्वत श्रंखला जो फ़्रांस,जर्मनी,इटली,स्वित्ज़रलैंड जैसे देशों से होकर गुजरती है।
7. *कर्बला* –इराक की राजधानी बगदाद से 100 कि.मी.उत्तर पूर्व में एक क़स्बा जहाँ 680 ईसवी में हजरत पैगम्बर के नवासे इमाम हुसैन और उनके परिवार की शहादत हुई ।
8. *सिकंदरिया* –ई.पू.331 में सिकंदर द्वारा मिस्त्र में बसाया शहर।
9. *समरकंद* – चौदहवीं सदी में तुर्की मंगोल बादशाह तैमूर द्वारा स्थापित शहर। वर्तमान में उजबेकिस्तान में है ।
10. *गैस चेंबर* –हिटलर (1889-1945) के प्रसिद्ध गैस चेंबर।
11. *तुर्कमान गेट* –दिल्ली की वह मशहूर जगह जहाँ अप्रेल 1976 में इमरजेंसी के दौरान झुग्गियों को हटाने के लिए बुलडोज़र चलाये गए थे और विरोध करने वालों की हत्या कर दी गई थी ।
12. *यूनियन कार्बाइड* – 2 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में हुआ गैस काण्ड
13. *नरोड़ा पाटिया* –अहमदाबाद की वह जगह जहाँ 2002 के दंगों में हजारों लोग मारे गए ।
14. *तंदूर कांड* – 2 जुलाई 1995 को घटित दिल्ली का नैना साहनी हत्याकांड जिसमे उसे मारकर उसकी देह के टुकड़े टुकड़े कर उसे तंदूर में जला दिया गया था ।
15. *निर्भया हत्या काण्ड* – 16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली में घटित ।
16. *खूनी दरवाज़ा* –हत्याओं के लिए प्रसिद्ध दिल्ली का वह ऐतिहासिक स्थल जहाँ शाह ज़फर के बेटों को मारा गया, अभी दिसम्बर 2002 में तीन युवकों द्वारा एक मेडिकल छात्रा के बलात्कार के बाद इसे बंद किया गया ।)

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