एक अंधे आदिवासी को पुलिस द्वारा प्रत्यक्षदर्शी गवाह बनाने की कहानी ,लिंगराम कोडपी की जुबानी : सुकमा पुलिस का कारनामा .

सुकमा 15.01.2018

यह उस गाँव की कहानी है जिस गाँव में 24 अप्रेल 2017 को 25 C. R. P. F. के जवान शहीद हुए थे। यह अंधा व्यक्ती माड़वी नंदा पिता गंगा उसी गाँव का रहने वाला हैं। उसे दन्तेवाड़ा जिला सत्र न्यायालय में उसकी बेटी लखे लेकर आयी हैं।

चिन्तागुफ़ा की पुलिस ने नक्सल केस में आदिवासियों के खिलाफ में एक अंधा आदिवासी को गवाह बना दिया। क्या कहे ये छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग सुकमा जिले की कानून हैं। सुकमा जिले का एस. पी. मीणा अपने आप को आदिवासी कहता है जो की राजस्थान का रहने वाला हैं। आप सब देखिये एक आदिवासी अपने ही समाज का कैसे शोषण करता हैं। चंद पैसे और सरकार से तमगे लेने के लिये देखिये कैसे -कैसे आदिवासियों के साथ पुलिस खेल खेलती हैं।

आप कभी भी मुझ पर यकीन नहीं करेंगे लेकिन वास्तविकता यहीं हैं। इस सच्चाई को आप ठुकरा नहीं सकते। यह लड़ाई जल,जंगल ,जमीन , की हैं, भारत देश में जैसे-जैसे आबादी बढ़ती चली जायेगी वैसे वैसे आदिवासी मरते जाएंगे। आदिवासियों को सरकार नहीं मार रही हैं बल्की आप खुद अपने आप के नस्ल को समाप्त कर रहे हैं। वह भी सिर्फ चंद पैसे और तमगों के लिये। आप सब इस वीडियो को देख कर हस रहे होंगे, आप सब के लिये यह एक तमासा हैं। फेसबुक में देखेंगे, कमेंट करेंगे, भूल जाएंगे,अपसोस करेंगे बस इतना ही ज्यादा से ज्यादा कमेंट में चार गाली पुलिस को देगे इससे ज्यादा आप क्या कर सकते हैं।

भाई साहब यह भारत देश के आदिवासी आपके भी भाई हैं। लेकिन आपने तो आदिवासियों को अपना दुशमन मान लिया और नक्सल के नाम पर हर दिन एक एक कर मार रहे हो। जिम्मेदार कोई नहीं आप सब हैं, क्योंकि की आप सब छत्तीसगढ़ राज्य को भारत देश का हिस्सा नहीं समझते। आप सब आदिवासियों को अपना समझते तो जरूर आदिवासी मरने से बचते। बहुत कम लोग हैं जो आदिवासियों को अपना समझते हैं लेकिन उन्हें भारत सरकार नक्सली समर्थक कहती हैं। मैं जानता हूँ इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप मुझे शाबासी नहीं बल्की गाली देने वाले हैं। लेकिन उन गालियों का मैं तहे दिल से स्वागत करता हूँ, क्यों की मैं जानता हूं की यह आप सब के लिये एक कड़वा सच हैं। इस वजह से आप गालियां देगे। आप यह वीडियो देख कर अंदाजा लगा सकते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर क्षेत्र की पुलिस क्या करती हैं। आप खुद सोचिये।

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लिंगराम कोडपी की रिपोर्ट

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