MoEFCC और कोयला मंत्रालय की रिपोर्ट SECL और JSPL को रायगढ़ में पर्यावरण उल्लंघन का दोषी ठहराती है; ग्रामीणों ने सिफारिशों के तत्काल समयबद्ध कार्यान्वयन की मांग की.

12 .01.2018

भूमि अधिकार और आदिवासी समूहों ने पर्यावरण के उल्लंघन के खिलाफ लोगों के संघर्ष के प्रमाण के रूप में रिपोर्ट का स्वागत किया।

रिपोर्ट MoEF द्वारा दाखिल की गई थी और प्रतिवादी कंपनियों ने जवाब देने के लिए पांच हफ्ते के समय की मांग की है।

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रायगढ़, 11 जनवरी 2018: राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर गठित समिति ने South Eastern Coalfileds Limited (SECL) की गेरे IV/2 व IV/3 और खुली व भूमिगत खनन परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस समिति का नेतृत्‍व संयुक्त सचिव, कोयला मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन के वरिष्ठ वैज्ञानिक मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा किया गया। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में SECL और पिछले मालिक जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड दोनों को पर्यावरणीय उल्लंघन का दोषी ठहराया है। साइट विजिट करने और (मौजूदा संरक्षक, पूर्व मालिकों और स्थानीय निवासियों सहित) सभी हितधारकों के साथ बातचीत करने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट के निष्कर्ष में लिखा कि “JSPL ने पर्यावरण मंजूरी को गंभीरता से नहीं लिया और प्रमुख रूप से खनिज कोयले के दोहन पर फोकस किया। समिति द्वारा देखा गया कि कई पर्यावरण मंजूरी शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया।” इसके अलावा, समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि “पर्यावरण मंजूरी शर्तों के अनुपालन का मुद्दा नहीं उठाने के लिए संरक्षक भी जिम्मेदार है। उन्होंने जमीनी वास्तविकता के साथ पर्यावरण मंजूरी की शर्तों का मिलान नहीं किया और साइट पर काम करने के लिए निष्क्रिय तरीके से काम किया।” समिति ने सुझाव दिया है कि “मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय को छह महीने के बाद खदान का फिर से निरीक्षण करना चाहिए और अनुपालन दर्ज करना चाहिए। गंभीर गैर-अनुपालन पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट ने मौजूदा पर्यावरण प्रदूषण और इस क्षेत्र के निवासियों पर इसके प्रभाव के बारे में भी महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। वायु प्रदूषण के मुद्दे पर समिति ने कहा कि, “साइट विजिट के दौरान बारिश होने के बावजूद इस क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर काफी अधिक दिखाई पड़ा”। कोयला खानों में आग के मुद्दे पर समिति ने कहा कि, “आग लगने के कारण क्षेत्र में भारी धुआं दिखाई दे रहा है, जो कि वहां के निवासियों और उनके पशुओं और अन्य जीवित प्राणियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इसके परिणामस्वरूप परिवेश के तापमान में वृद्धि हुई है, यानी कि जमीन के करीब प्रदूषण बढ़ रहा है।” समिति ने यह भी पाया कि खनन गतिविधियों के कारण क्षेत्र में भूजल में कमी आई है। अपनी रिपोर्ट में समिति ने निवासियों के दावे की पुष्टि करते हुए कहा है कि “भूजल स्‍तर कम हुआ है, परिणामस्वरूप खदान का गंदा पानी सतह और भूजल दोनों ही पानी में पहुंच रहा है। नतीजतन, आसपास के गांवों में हैंडपंप सूख रहे हैं।”

पिछली और मौजूदा खदान संचालक कंपनी द्वारा हरित पट्टी की शर्तों के अनुपालन न करने के बारे में समिति की टिप्‍पणियां क्षेत्र के निवासियों की शिकायतों की पुष्टि करती हैं। समिति ने कहा है कि “हरित पट्टी का विकास पिछली और मौजूदा खदान संचालक कंपनी दोनों के द्वारा उपेक्षित किया गया है। वे हरित पट्टी की अवधारणा के बारे में स्पष्ट नहीं हैं और वृक्षारोपण को लेकर हमेशा भ्रमित होते हैं। जैसे कि नाम अपने आप ही हरित पट्टी का अर्थ समझाता है, यानी प्रदूषण को कम करने के लिए गतिविधि क्षेत्र के आसपास पेड़ों की एक पट्टी। हरित पट्टी के विकास के संबंध में पर्यावरणीय शर्तों का अनुपालन न करने की जिम्‍मेदारी JSPL पर ज्यादा है। पिछले और मौजूदा खदान संचालक, दोनों ही इस महत्वपूर्ण शर्त का अनुपालन न करने के लिए जिम्मेदार हैं। किसी ने भी इस शर्त को गंभीरता से नहीं लिया। यदि इस शर्त को गंभीरता से लिया गया होता, तो स्थिति इतनी खतरनाक नहीं होती।”

समिति ने निम्नलिखित कार्रवाइयों की सिफारिश की है:
1. मौजूदा संरक्षक को पर्यावरण मंजूरी शर्त के अनुसार और पिछले मालिक के बदले में हरित पट्टी का विकास करना चाहिए।
2. गांवों और खान सीमा के बीच 500 मीटर की न्यूनतम दूरी हो और खानों से होने वाला वायु प्रदूषण गांवों को प्रभावित नहीं करेगा को सुनिश्चित करने के लिए अन्य उपयुक्त उपाय किए जाने चाहिए। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक दिशानिर्देश है जिसे पहली बार दिया गया है।
3. मौजूदा संरक्षक को अपनी लागत पर आसपास के सभी गांवों में स्थायी रूप से एक डॉक्टर नियुक्त करना चाहिए। ग्रामीणों को मुफ्त में दवाएं प्रदान करना चाहिए और आवासीय क्षेत्रों में हवा की गुणवत्‍ता जांचने के लिए निगरानी स्टेशन स्थापित करना और उनका रखरखाव करना चाहिए।
4. पर्यावरण मंजूरी शर्तों का अनुपालन नहीं करने के लिए एनजीटी पहले आवंटिती पर उपयुक्त दंड लगा सकता है।

प्रभावित गांवों और समुदायों ने समिति की रिपोर्ट और टिप्पणियों का स्वागत किया है। “ये निष्कर्ष पर्यावरण की शर्तों के अनुपालन में गंभीर उल्लंघन, गंभीर वायु प्रदूषण, भूजल में कमी, खदान में लगी आग और इस क्षेत्र के लोगों और पशुओं के स्वास्थ्य पर भारी प्रभाव के हमारे दावों को सही साबित करते हैं।

हम समिति की रिपोर्ट का स्वागत करते हैं और अब राज्य प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल से आग्रह करते हैं कि इन सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खनन गतिविधियों से कोई और नुकसान न हो।
हम सरकार से यह भी सुनिश्चित करने के लिए आग्रह करते हैं कि इस क्षेत्र में खदानों का विस्तार या नई खदान शुरू न की जाए जब तक कि इन सभी उल्लंघनों को सही नहीं किया जाता है और प्रतिकूल असर ठीक नहीं हो जाते हैं।”
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट यहां से डाउनलोड की जा सकती है:
https://pfcollectiveindia.files.wordpress.com/2018/01/moefcc-report-raigarh.pdf

11/1/2019 की एनजीटी सुनवाई में प्रतिवादी कंपनियों ने जवाब देने के लिए 4 हफ्ते का समय मांगा है। अदालत ने डीजीएमएस को भी रिपोर्ट की जानकारी देने के लिए कहा हैं.

 

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Land rights and Adivasi groups welcome the report see as a validation of peoples struggles against environmental violations.

Report was filed by the MOEF and the respondent companies ask for five weeks to respond.

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Raigarh, 11 January 2018: A report of the National Green Tribunal ordered expert committee, led by Joint Secretary, Ministry of Coal and Senior Scientist Ministry of Environment, Forest & Climate Change (MoEFCC) inspecting Gare IV/2 and IV/3, open cast and underground mining projects of M/s South Eastern Coalfileds Limited (SECL) has come down heavily on the environmental violations of SECL and the previous owners M/s Jindal Steel and Power Ltd. The committee in its report after a site visit and interaction with all stakeholders (including the current custodian, previous owners and local residents), concluded that, “M/s JSPL has not taken the environmental clearance seriously and focused primarily on exploitation of mineral coal. It was seen by the Committee that many of the environmental clearance conditions were not complied with.” Further, the committee in its report also remarked that, “the custodian akin is also responsible for not taking up the issue of compliance of environmental clearance conditions. They have not compared the environmental clearance conditions with the ground realty and acted passively to work on the site.” The committee has suggested that the “Regional Office of the Ministry should re-inspect the mine after six months and report compliance. It at that stage serious non compliance reported stringent action be initiated against them.”

The Expert Committee report also made significant observations about the existing environmental pollution and its impact on the residents in the region. On the issue of air pollution, the committee observed that, “despite rain on the day of the site visit the levels of air pollution in the area appeared to be on very higher side”. On the issue of fires in the coal mines the committee observed that, “Due to fire raging, the area is witnessing heavy smoke, which is adversely affecting the health of inhabitants and their livestock and other living beings. It is also resulting in to increase in ambient temperature due to inversion, i.e. trapping of pollution close to ground”. The committee also observed that the ground water in the region has severely depleted due to mining activities. In its report, the committee confirms residents claims stating that, “The water tables have been punctured as a result the mine drainage is very common resulting both surface and also ground water. As a result, the hand pumps in the surrounding villages are reported drying.”

The committee’s observations about the non-compliance of the condition on green belt in previous and current proponents corroborated the complaints of the residents in the region. The committee observed that, “the development of green belt has been neglected both by the earlier proponent and the new custodian akin. They are not clear about the concept of greenbelt and always confusing with plantation. As the name itself explain the meaning of green belt ,i.e. a belt of plants around the activity area to attenuate the pollution. The liability for non-compliance of environmental condition with regard to development of green belt is lies more with M/s JSPL. Both, the proponent and custodian akin are responsible for non-compliance of this important condition. No one has taken up this condition seriously. If this condition was taken up seriously, the situation would not have been so alarming.”

The Committee has recommended the following actions:

Present custodian should develop a green belt in compliance to the EC condition and at the cost of the previous owner.

A minimum distance of 500 meters from the mine boundary and the villages and other suitable measures to ensure that the air borne pollution from the mines do not affect the villages. This is ia very significant as this is a guideline that has been given for the first time.

The present custodian, at its own cost, should be required to depute a Doctor on a permanent basis to all villages in the vicinity. Provide medicines free of cost to the villagers and install and maintain Air Quality Monitoring station in the residential areas.

The NGT may impose suitable fine to the earlier allottee for non complaince of Environment Clearance conditions.

The affected villages and communities have welcomed the committee’s report and observations. “These findings vindicate our claims of serious violations in compliance of environmental conditions, severe air pollution, depleting ground water, mine fires and heavy impact on the health of the people and livestock in the region.

We welcome the committee’s report and now urge the state administration and the National Green Tribunal to ensure that these recommendations are implemented in the time-bound manner to ensure that there is no further damage from mining activities on our health and environment.

We also urge the government to ensure that no further expansion or new mines are started in the region until all these violations are corrected and adverse impacts reversed”.

The Expert Committee report can be downloaded from here:

https://pfcollectiveindia.files.wordpress.com/2018/01/moefcc-report-raigarh.pdf

In the ngt hearing of 11/1/ /2019The respondent companies have asked for time 4 weeks time to respond. The court has also asked for DGMS to be also apprised of the report.

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