रामविचार नेताम के बाद अब नंदकुमार साय ने भी भूराजस्व संहिता का किया विरोध ,कहा आदिवासी हैं इसके खिलाफ : वापस ले सरकार .

6.01.2018

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छतीसगढ़ सरकार द्वारा हाल ही में भूराजस्व संहिता मे संशोधन का आदिवासी समाज मे विरोध बढता जा रहा हैं ,इस संशोधन से सरकार आदिवासियों से उनकी जमीन सहमति से शासकीय योजना के लिये ले सकेगी ,इसके पहले विभिन्न प्रावधानों के तहत आदिवासी की ज़मीन कोई गैर आदिवासी नहीं ले सकते थे .

अभी तक विभिन्न आदिवासी संगठन और जन संगठन इसका विरोध कर रहे हैं अब विरोध के स्वर भाजपा के आदिवासी नेताओं के भी सुनाई देने लगे हैं. पूर्व ग्रहमंत्री राम विचार नेताम के वाद अब जन जाती आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और छतीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने इस संशोधन को आदिवासियों के खिलाफ बताया है और कहा है कि आदिवासियों के जमीन  खरीदी की संशोधन का नियम गलत है…इसलिए सरकार को आदिवासी समाज के हित में सरकार को नियम इस कानून को वापस लेना चाहिये। उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठ नेताओं ने उनसे अपनी नाराजगी जाहिर की है, समाज में इस कानून को लेकर नाराजगी है’

नंदकुमार साय ने कहा कि आयोग छतीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी करेगा और जबाब मांगेगा कि आदिवासियों की जमीन इसके पहले गलत तरीकों से ले ली जाती थी इसलिए विभिन्न प्रावधान किये गए थे जिसमें जमीने वापस भी ली जाये लेकिन इस संशोधन ने तो आदिवासियों की जमीन को छीनने का रास्ता आसान बना दिया है.
छतीसगढ़ सरकार और भाजपा के साथ संघ भी आदिवासी समाज के इस विरोध से चिंतित है .
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