कोरेगांव हमले के खिलाफ वामपंथी दलों भाकपा-माले लिबरेशन, भाकपा, माकपा, एसयूसीआई(सी)’ और छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने किया प्रतिरोध


4.01.201

*महाराष्ट्र के भीमा कोरेगाँव में अपने पूर्वजों का शौर्य दिवस मनाने इकट्ठा हुए दलितों पर हिंदुवादी संगठनों द्वारा किए गए बर्बर हमले के खिलाफ वामपंथी दलों भाकपा-माले लिबरेशन, भाकपा, माकपा, एसयूसीआई(सी)’ और छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने आज पावरहाउस भिलाई के अंबेडकर चौक पर संयुक्त रूप से प्रदर्शन कर उक्त घटना के खिलाफ तीखा आक्रोश जताया। उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि एक बार फिर से भाजपा का दलित-प्रेम का ढोंग उजागर हो गया है। घटनाक्रम से लगता है कि महाराष्ट्र की भाजपा सरकार नया पेशवा-राज चला रही है। ऊना और सहारनपुर की कड़ी में ही भीमा-कोरेगाँव की घटना को भी सुनियोजित रूप से सरकारी संरक्षण में अंजाम दिया गया है जो घोर निंदनीय है।*

*वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक वर्ष एक जनवरी को दलित-बहुजन भीमा-कोरेगाँव में 1818 के युद्ध की पुण्यतिथि मनाने के लिए इकट्ठा होते हैं। इस युद्ध में ब्रिटिश बम्बई नेशनल इन्फैंट्री, जिसमें ज्यादातर दलित सैनिक थे ने पेशवा की सेना को हराया था। इसलिए इस दिवश को दलित समुदाय के लोग ब्राम्हण पेशवाओं के खिलाफ विजय दिवस के रूप में मनाते आए हैं। इस साल उसके 200 वर्ष पूरे हुए, इस कारण इसका कहीं अधिक महत्व था।*

*प्रदर्शन पश्चात छावनी के थाना प्रभारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई है कि– महाराष्ट्र की फड़नवीस सरकार को तत्काल बर्खाश्त किया जाये। घटना की न्यायिक जाँच कराई जाये और सभी हमलावरों व दोषियों के खिलाफ रासुका के तहत कड़ी कार्रवाई की जाये।*

*विरोध-प्रदर्शन को भाकपा-माले नेता बृजेंद्र तिवारी, अशोक मिरी, ऐक्टू नेता श्याम लाल साहू, भाकपा नेता विनोद सोनी, सीपीएम नेता शांत कुमार, सीटू नेता डीवीएस रेड्डी, एसयूसीआई (सी) के नेता आत्मारामसाहू और दलित शोषण मुक्ति मंच के नेताद्वय आनंद रामटेके और बेदन लाल गेंड्रे ने संबोधित किया।*

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