क्या हुआ कोरेगांव में.

श्रेयांत की आँखों देखी रिपोर्ट

दिनांक 1 जनवरी 2018 को हम लोग, कोरेगांव विजय के 200 वर्ष पूरे होने की विजय मनाने और सैनिकों को नमन करने मुम्बई से निकले।

मुम्बई से जिस बस से हम लोग निकले वह उत्तर प्रदेश से यहाँ जीविका कमाने आये लोगों द्वारा की गई थी। करीब 25 लोग जिसमें महिलाएं बच्चे सभी थे, के साथ सुबह 6 बजे निकल लिया गया।

मुम्बई पुणे एक्सप्रेस वे पर केवल नीला-पंचशील झंडा लगी हुई गाड़ियां अधिक दिख रही थी।
जैसे जैसे पुणे के पास पहुँचा गया, जाम की स्थिति अधिक हो आयी।

किसी तरह जाम से बचते-बचाते सबसे पहले हम लोग संभाजी महराज की समाधी के पास पहुँचे।
फिर, वहां से लगभग 4 किलोमीटर और दूर रह जाता है, विजय स्तम्भ फिर भयंकर जाम लगा था उस रास्ते पर।

जैसे तैसे 1 घंटे में हम लोग, कोरेगांव आते है बस को पार्किंग में लगा कर उतरते है तो देखते है कि कुछ गाड़ियों के शीशे टूटे हुए है।

फिर हम कोरेगांव बाजार से विजय स्तम्भ की तरफ बढ़ते है, जो कि भीमा नदी के उस पार है।

लेकिन रास्ते, में देखते है कि सारी दुकानें बंद और लोग छत पर से पहले से जमा किये गए पत्थर विजय स्तम्भ की तरफ बढ़ने वालों लोगों पर फेंक रहें है।

उसी बीच दंगाइयों ने कई गाड़ियों को आग के हवाले किया, और अचानक से भगदड़ मच गई, ऊपर से पत्थर फेंकने वाले अलग नीचे से लाठी डंडा लेकर दौड़ने वाले अलग दंगाई।

हम लोगों को भी वहाँ से हुई पत्थरबाज़ी और भगदड़ के कारण निकलना पड़ा, बाज़ार से बाहर तक लोगों ने अपने घरों पर भगवा झंडा लगाए हुए और नवयुवक मोटरसाइकिल से भगवा झंडा लिए घूम रहे थे।

बाजार से बाहर आने के बाद कोरेगांव का पूरा आसमान काले धुएं से भर गया।

किसी तरह खेतों खलिहानों से होते हुए, हम लोग लगातार 2.30 घंटे भर और 8 किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल तय कर श्रीकापुर के पास पहुंचे, और वहां से चाकन के लिए बस में बैठे और रास्ते में भयंकर जाम लगा हुआ था।

हमको वहाँ से पुणे पहुँचने में 6 घंटे से भी अधिक का समय लग गया।

रात्रि 12 बजे, बिना शहीदों को नमन किये, बिना विजय स्तम्भ तक पहुँचे हम मुम्बई वापस आ गए।

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