विज्ञान कथायें ः क्या आप जानते हैं मातृसत्तात्मक युग में मनुष्य का पहला कैलेण्डर सूर्य या चन्द्रमा से नहीं बल्कि स्त्री के रजस्वला होने की अवधि से बना था ? शरद कोकास

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*कैलेण्डर की कथा*

*लेख – शरद कोकास*

?आश्चर्य होगा आपको यह जानकर , लेकिन सबसे पहले ऐसा ही हुआ था । इस पृथ्वी पर जब मनुष्य का जन्म हुआ तो उसने सर्व प्रथम सूर्य को पूर्व से निकलते और पश्चिम में अस्त होते देखा , लेकिन सूर्य तो रोज एक जैसा ही होता था सो उसका ध्यान चंद्रमा पर गया जो अमावस्या के अगले दिन से बढ़ कर पूर्णिमा तक पहुंचता और फिर घटकर अमावस्या तक आ जाता इस अवधि को उसने एक महिना माना

?हजारों साल तक इस समय चक्र को ध्यान पूर्वक देखकर उसने जाना कि –

1⃣चाँद का एक दिन सूर्य के पूरे एक दिन ( सूर्योदय से सूर्योदय ) के बराबर नहीं होता

2⃣सूर्य के 365 दिन होते हैं और चाँद के सूर्य की तुलना में 354 दिन । इस तरह 12 महीनों का एक वर्ष हुआ

3⃣लेकिन एक समय जब मातृसत्तात्मक व्यवस्था थी तब साल तेरह महीने का होता था .और यह स्त्री के रजस्वला चक्र की अवधि के अनुसार होता था अर्थात प्रत्येक 28 दिन में एक चक्र और साल में 13 चक्र अर्थात 28 गुणित 13 = 364 दिन।

4⃣यह गणना सूर्य और चाँद पर ही आधारित थी और बारह पूर्ण चंद्रमा (354 दिन ) की गणना के बाद उसमे दस दिन और कुछ घंटे जोड़े जाते थे । 365 वे दिन , रानी अपने लिए एक ‘ पवित्र राजा ‘ का चयन करती थी और उससे शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करने के पश्चात् उसकी बलि चढ़ा दी जाती थी ।

5⃣अगले दिन से फिर एक नया वर्ष प्रारंभ हो जाता था । यह तेरहवां माह पुरुष बलि के अलावा सूर्य की मृत्यु का माह माना गया इसलिए 13 को अशुभ संख्या माना गया

6⃣योरोप के लोगों द्वारा एक मिलेनियम तक 13 माह का साल मनाया गया । मात्र सत्ता युग की समाप्ति के बाद चाँद से वर्ष की गणना का प्रारंभ हुआ । बाद में लगभग सभी प्राचीन सभ्यताओं में चाँद की गणना प्रारंभ हुई ।

7⃣12 पूर्णिमा और 12 अमावस्या एक वर्ष ( सूर्य के 354 दिन ) में मानी गईं ।

8⃣इसी के साथ कुछ सभ्यताओं में सूर्य से भी गणना प्रारंभ हो गई और चाँद से वर्ष की गणना कुछ सभ्यताओं के धार्मिक कार्यों में जारी रही , शेष सभी जगह सूर्य के दिनों की गणना से 365 दिन का वर्ष माना गया ।

9⃣इसे एडजस्ट करने के लिए ( 365- 354.253 something = 10.345 ) अर्थात यह शेष बचे दस , सवा दस दिन मिलकर तीन साल में 30 दिन हो जाते हैं इसलिए हर तीन साल बाद एक माह जोड़ा गया ।आप देखते होंगे कि हिन्दू धर्म में हर तीन साल बाद एक अधिक मास या खर मास जोड़ दिया जाता है और फिर सारे त्यौहार ऋतुओं के अनुसार चलने लगते हैं ।

1⃣0⃣अगर ऐसा न करते तो चाँद और सूर्य के कैलेण्डर बराबर नही चलते . हालाँकि मुहम्मद साहब के निर्देशानुसार मुहर्रम माह से प्रारंभ होने वाले हिजरी कैलेण्डर में ऐसा नहीं किया गया सो वह 354 दिनों का ही रहा .. सो ईद हर साल 10 दिन कम होती चली जाती है और दीवाली तीन साल दस –दस दिन कम होने के बाद 13 माह वाले चौथे साल फिर पहले की तारीख में आ जाती है ।

(सन्दर्भ :Robert Graves – The Greek Myth,page 9 )

_ *शरद कोकास* , दुर्ग ( छत्तीसगढ़ )
☎ 9425555160 व्हाट्स एप 8871665060

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