*छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन और छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने धरने में शामिल होकर किया किसानों का बढ़ाया मनोबल*

*निर्वाचित प्रतिनिधियों की उदासीनता से किसानों में भाजपा -कांग्रेस के खिलाफ असंतोष*

*आदर्श पुनर्वास नीति के अंतर्गत किसानों को मुआवजा राशि दिलाने के लिये प्रशासन की पहल शुरू*

*जेके लक्ष्मी सीमेंट कंपनी प्रभावित किसान संघर्ष समिति ने सौंपा धमधा एसडीएम को प्रभावित किसानों के नामों की सूची*

*नौकरी अथवा मुआवजा राशि मिलते तक जारी रहेगा किसानों का धरना*

*शासन -प्रशासन सब्र का इम्तहान न ले, आंदोलन तेज करने किसानों ने दी चेतावनी*

31.12.2017

जेके लक्ष्मी सीमेंट कंपनी प्रभावित किसान संघर्ष समिति द्वारा 22 दिसंबर से अहिवारा में जमीन के बदले में स्थाई नौकरी अथवा 1अप्रैल से राज्य सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम पारिश्रमिक की दर से क्षतिपूर्ति राशि देने की मांग को लेकर चलाये जा रहे अनिश्चितकालीन धरना के 9 वें दिन छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक राजकुमार गुप्त और छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के महासचिव रजा अहमद ने धरने में शामिल होकर संघर्षरत किसानों का हौसला बढ़ाया, उल्लेखनीय है कि जेके लक्ष्मी सीमेंट कंपनी द्वारा प्लांट और खदान के लिए किसानों की जमीन खरीदी गई थी किंतु प्रभावित किसानों के परिवार के किसी भी सदस्य को स्थाई नौकरी नहीं दिया है, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच की पहल पर आदर्श पुनर्वास नीति के अंतर्गत प्रभावित किसानों को नवंबर 2013 से नौकरी के एवज में राज्य सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम पारिश्रमिक की दर से क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किया जा रहा था, जिसे मार्च 2017 के बाद देना बंद कर दिया गया है, इसकी जानकारी शासन- प्रशासन को समय समय पर दिया गया था और क्षतिपूर्ति राशि 1 अप्रैल से राज्य सरकार द्वारा घोषित बढ़े हुए न्यूनतम पारिश्रमिक की दर से दिलाने की मांग की गई थी किंतु बंद भुगतान अब तक शुरू नहीं होने से किसानों में आक्रोश है और प्रभावित किसानों ने 22 दिसंबर से अहिवारा में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है,

किसानों क्षेत्रीय विधायक सांवला राम डेहरे से भी गुहार लगाया था किंतु उन्होने मदद करने में अपनी असमर्थता व्यक्त कर दिया, किसानों के धरना स्थल के सामने से पूर्व नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे भी गुजरे किंतु उन्होने भी संघर्षरत किसानों की सुध नहीं लिया, संसदीय सचिव लाभचंद बाफना अहिवारा के निवासी होने के बावजूद भी किसानों के संघर्ष के प्रति उदासीन है जिसके कारण किसानों में भाजपा -कांग्रेस के प्रति आक्रोश है,

धरने के 9 दिन बाद प्रशासन ने प्रभावित किसानों की सुध ली है,मांगे जाने पर संघर्ष समिति ने प्रभावित किसानों की सूची घमघा के एसडीएम राजेश पात्रे को सौंप दिया है, उन्होने शासन के नियमों और नीतियों का पालन कराने का भरोसा दिया है,

प्रभावित किसानों ने शासन प्रशासन को आगाह किया है कि वे सब्र का इम्तहान न ले, समय आने पर आंदोलन को तीव्र करने से भी किसान पीछे नहीं हटेंगे, नौकरी अथवा क्षतिपूर्ति राशि मिलने तक किसानों का संघर्ष जारी रहेगा,
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*राजकुमार गुप्त, संयोजक,
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन*