भोपाल में कुलभूषण की मां या पत्नी नहीं है यहां तो साजिद की बहन शबीना है . ठीक वैसा ही अनुभव बस देश हमारा है .

अशोक कुमार पांडेय की वाल से

इस साल गुज़री बकरीद के ठीक अगले दिन मेरा भोपाल, उज्जैन वग़ैरह जाना हुआ था. उज्जैन में मेरी मुलाक़ात शबीना से हुई जिनका भाई मुहम्मद साजिद 2011 के भोपाल सेंट्रल जेल में बंद है. साजिद सिमी का विचाराधीन क़ैदी है.

तीन बहनों में साजिद इकलौता भाई है. तीनों बहनें और उसकी मां भोपाल सेंट्रल जेल में उससे मिलने जाया करते हैं.

साजिद की बहन शबीना सुबह सात बजे अपनी मां के साथ घर से निकली थी, 12 बजे भोपाल पहुंचीं और शाम पांच बजे मुलाक़ात हुई.

शबीना ने कहा कि उनकी मुलाकात में जानबूझकर देरी की जाती है ताकि उज्जैन जाने वाली ट्रेन छूट जाए और हमे स्टेशन पर अगली ट्रेन का इंतज़ार करना पड़े.

शबीना ने मुझसे बातचीत में कहा कि मुलाक़ात में बहुत परेशानी होती है.

हमारा बुर्क़ा, हिजाब, दुपट्टा वगैरह उतरवा दिया जाता है.

तलाशी ले रही कांस्टेबल हमें ऐसी जगहों पर जान-बूझकर छूती हैं जिसके बारे में हम खुलकर नहीं बता सकते.

बकरीद के मौक़े पर शबीना साजिद के लिए गोश्त बनाकर ले गई थी. मगर जेल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए गोश्त खिलाने से मना कर दिया.

फिर शबीना दौड़कर नज़दीक की दुकान से आलू की सब्ज़ी लेकर आई और उसे खिला पाई.

शबीना के मुताबिक इस तरह की मानसिक प्रताड़ना का मकसद यही होता है कि हम साजिद से मुलाक़ात करने आना बंद कर दें.

साजिद से इनकी मुलाक़ात टफन ग्लास से होती है और बातचीत के लिए फोन होता है.

ठीक उसी तरह जैसे कूलभूषण से उनके परिवार ने की है.

साजिद के परिवार के तथ्य मोटामोटी वही हैं जो कुलभूषण के परिवार के हैं.

कुलभूषण के बारे में ये सारे तथ्य जानने के बाद से हम शोर मचा रहे हैं.

क्योंकि मामला ‘कुलभूषण’ का है और दुर्व्यवहार का आरोप पाकिस्तान पर है.

मगर साजिद के परिवार से जुड़े इन्हीं तथ्यों पर हम आंख मूंद लेते हैं.

क्योंकि मामला ‘साजिद’ का है और आरोप ख़ुद हमारे ऊपर है.

@Ashok Kumar Pandey की वॉल से

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