8 जनवरी को रायपुर में किसान संकल्प सम्मेलन : कॉमरेड हन्नान मोल्ला महासचिव अखिल भारतीय किसान सभा, योगेन्द्र यादव स्वराज आंदोलन, देवेंद्र शर्मा सामाजिक कार्यकर्ता, अरविंद नेताम ,डॉ.सुनीलम एवं कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे .21 किसान संघठनो की अपील.

8 जनवरी को रायपुर में किसान संकल्प सम्मेलन : कॉमरेड हन्नान मोल्ला महासचिव अखिल भारतीय किसान सभा, योगेन्द्र यादव स्वराज आंदोलन, देवेंद्र शर्मा सामाजिक कार्यकर्ता, अरविंद नेताम ,डॉ.सुनीलम एवं कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे .21 किसान संघठनो की अपील.

27.12.2017 रायपुर

संकल्प किसान सम्मेलन के आयोजित संघटनो की ओर से आलोक शुक्ला, सुदेश टीकम , नंद कश्यप ,रमाकांत बंजारे , ने जानकारी देते हुये बताया कि 8 जनवरी 2018 को रायपुर के गांधी मैदान में विशाल किसान संकल्प का आयोजन किया गया है जिसमे प्रदेश के हजारों किसान सम्मलित होंगे .उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख किसान नेता हन्नान मुल्ला ,योगेंद यादव ,कृषि वैज्ञानिक देवेन्द्र शर्मा और आदिवासी नेता अरविंद नेताम औऱ डॉ. सुनीलम आदि उपस्थित रहेंगे .

आगे उन्होंने कह कि कुछ वर्षों से हमारे देश का किसान और कृषि दोनों ही गहरे संकट में है l वर्ष 2003 से लगभग 6 लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्याएं की हैं l यह जानते हुए कि देश में कृषि के अतिरिक्त अन्य कोई क्षेत्र ऐसा नहीं हैं जो कृषि पर निर्भर जनसंख्या को रोजगार उपलब्ध करा सके, वाबजूद उसके केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा किसान विरोधी नीतियों को अपनाया और थोपा जा रहा हैं l ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले हमारे छत्तीसगढ़ में भी किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार बदहाल होती जा रही हैं, जिससे पिछले कुछ वर्षो से किसान आत्महत्याएं बढ़ी हैं l बेतहाशा बढ़ती लागतें एवं फसलों के सही दाम नहीं मिलने के कारण कड़ी मेहनत के बाद भी 99 फीसदी किसान और ज्यादा गरीब व क़र्ज़ के जाल में फंसते जा रहे हैं l

भू-मंडलीकरण, उदारीकरण के प्रारंभिक दौर से बहुराष्ट्रीय कंपनियों व कार्पोरेट घरानों के मुनाफे के लिए शुरू हुई नीतियों ने भारतीय कृषि को तबाह किया हैं l भारत में किसानों की हालत सुधारने और कृषि संकट से उबरने के लिए स्वामीनाथन आयोग का गठन हुआ जिसने 2006 में अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपी l इसमें इतिहास में पहली बार किसान के श्रम को भी एक मूल्य की तरह देखा गया और फसलों के मूल्य निर्धारण में इसे लागत में जोड़ने की सिफारिश की गयी l किसानों को क़र्ज़ व गरीबी से उबारने के लिए लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने सहित अन्य प्रोत्साहन देने की सिफारिश की गई, परंतु सरकारें इन सिफारिशों को लागू करने में विफल रही हैं l भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने एवं किसानों को बोनस देने का वादा किया था, लेकिन 2014 में केन्द्र में सरकार बनाने और छत्तीसगढ़ में तीसरी बार सत्ता में आने के बाद भी उसने अपना वादा पूरा नहीं किया l

इस वर्ष छत्तीसगढ़ में गंभीर सूखे की स्थिति हैं, किसान को कर्ज चुकाना तो दूर की बात हैं उसे अपना जीवन यापन करना भी मुश्किल हो रहा हैं l इन परिस्थितियों में छत्तीसगढ़ के किसानों ने राज्य सरकार को उनका वादा याद दिलाते हुए सूखा राहत राशि, बोनस, कर्जमाफी और समर्थन मूल्य देने की मांगो पर किसान संकल्प यात्रा का आयोजन किया तो 8 जिलों में धारा 144 लगाकर किसानों के ऊपर दमनात्मक कार्यवाही करते हुए नियम विरुद्ध गिरफ्तारियां की l राज्य सरकार किसानों को राहत देने के बजाये उद्योगपतियों को हजारों करोड़ की सब्सिडी दे रही है कुछ समय पूर्व ही मौजूदा सरकार ने राज्य को प्राप्त होने वाले राजस्व में से केवल 4 चुनिन्दा खनन कंपनियों को 3000 करोड़ रूपये की छूट स्टाम्प ड्यूटी में दी गई l सिर्फ चुनावी फायदे के लिए 1200 करोड़ रूपये मोबाइल वितरण के लिए आवंटित किया गया l इतना ही नही प्रदेश के 20 हजार गाँव को मिलने वाले 14 वें वित्त आयोग की राशि में अवैधानिक ढंग से कटौती करते हुए 600 करोड़ रूपये मोबाइल टावर लगाने टेलीकाम कम्पनियों को दिया जा रहा हैं l

हाल ही में एक और जन विरोधी व उद्योग के हित में निर्णय लेते हुए आदेश जारी किया गया जिसमें ग्रीष्मकालीन धान की फसल एवं सिंचाई पर पाबंदी लगाते हुए उद्योगों को पानी पर पहली प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया । इस आदेश का पालन नही करने वाले किसानों को जेल भेजने का भी प्रावधान रखा गया l यह आदेश स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि राज्य में जल उपयोग की प्राथमिकता में सिंचाई को अंतिम पंक्ति में रखते हुए औद्योगिक जल उपयोग को पहली प्राथमिकता दी गई हैं l सरकार के इस आदेश से न सिर्फ किसान बल्कि पानी पर निर्भर मछुवारा समुदाय की भी आजीविका संकट में है l

घने वन क्षेत्रों के आदिवासी किसानों को खनन, बांध व उद्योग के नाम पर विस्थापित किया जा रहा हैं l पांचवी अनुसूची, पेसा एवं वनाधिकार मान्यता कानून के प्रावधानों का उल्लंघन कर आदिवासियों के जंगल, जमीन को विधिविरुद्ध तरीके से पूंजीपतियों को दिए जाने का कार्य स्वयं राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा हैं l यहाँ तक कि वर्ष 2013 में बने भू –अधिग्रहण व पुनर्वास कानून में कंपनियों के पक्ष में संशोधन करते हुए उसे कमजोर करने के प्रयास किये जा रहे हैं l केंद्र में भाजपा सरकार ने आते ही पहला काम इसी कानून को कमज़ोर करने संबंधी अध्यादेश लाने का किया जिसका पुरजोर विरोध देश भर के जन आन्दोलनों ने किया और तीन -तीन बार अध्यादेश लाने के बाद भी सरकार अब तक इसमें विफल रही l हालांकि राज्य सरकारों को यह छूट मिली हुई है कि वो अपने मुताबिक़ इस कानून में संशोधन करें जिसका फायदा उठाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बहुत से संशोधन किये हैं l

आज देश भर में किसान आक्रोशित हैं और अलग- अलग राज्यों में इस आक्रोश का प्रदर्शन भी आंदोलनों के रूप में हो रहा है l हाल ही में राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडू और के किसानों के संघर्ष चर्चा में रहे l दिल्ली में देश भर के किसानों ने एक साथ आकर किसान संसद लगाई l यह इन आन्दोलनों का दबाव ही था कि इन राज्य सरकारों को सीमित ही सही पर किसानों की मांगों को मानना पड़ा l छत्तीसगढ़ में ही, तमाम दमन के बाद अंततः राज्य सरकार को एक वर्ष के बोनस की घोषणा करना पड़ी l

इस आन्दोलन को और धारदार बनाने के लिए आगामी 8 जनवरी को किसान संकल्प सम्मेलन का आयोजन किया गया है ताकि वहां से अपनी मांगों को पूरा करवाने तक किसान सतत संघर्ष जारी रखें l आप अपील हैं कि किसान संकल्प सम्मलेन में शामिल होकर इसे सफल बनाये l
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आयोजन संघठन

छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन, जिला किसान संघ राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (मजदूर कार्यकर्त्ता समिति), अखिल भारतीय किसान सभा (छत्तीसगढ़ राज्य समिति), छत्तीसगढ़ किसान सभा, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति (कोरबा, सरगुजा), किसान संघर्ष समिति (कुरूद), आदिवासी महासभा (बस्तर), दलित आदिवासी मजदुर संगठन (रायगढ़), दलित आदिवासी मंच (सोनाखान), संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा (कांकेर), पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति (बंगोली, रायपुर), भारत जन आन्दोलन सरगुजा व गाँव गणराज्य अभियान (सरगुजा), जनाधिकार संगठन (कांकेर), मेहनतकश आवास अधिकार संघ (रायपुर), जशपुर जिला संघर्ष समिति, भारतीय खेत मजदूर यूनियन (छत्तीसगढ़ राज्य समिति), राष्ट्रिय आदिवासी विकास परिषद् (छत्तीसगढ़ इकाई, रायपुर), छत्तीसगढ़ किसान महासभा, उर्जाधानी भू–विस्थापित कल्याण समिति (कोरबा), आदिवासी दलित मजदुर किसान संघर्ष (रायगढ़), उधोग प्रभावित किसान संघ (बलोदाबाजार)

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