सिरपुर में तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय बुद्धिस्ट सेमिनार एन्ड कल्चरल फेस्टिवल:.समाज के प्रबुद्धजनों का हृदय से आभार : SCSTOBC&Minorities संयुक्त मोर्चा छतीसगढ़

सिरपुर में तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय बुद्धिस्ट सेमिनार एन्ड कल्चरल फेस्टिवल:.समाज के प्रबुद्धजनों का हृदय से आभार : SCSTOBC&Minorities संयुक्त मोर्चा छतीसगढ़

26.12.2017

सिरपुर में तीन दिवसीय अंतराष्ट्रीय बुद्धिस्ट सेमिनार एन्ड कल्चरल फेस्टिवल में हजारों की संख्या में पहुँचकर आपने छतीसगढ़ के घर- आँगन में 2500 साल पहले फले- फुले एक महान सभ्यता को अंतराष्ट्रीय पहचान दिलाने में जो भूमिका निभाया है उसके लिये संयुक्त मोर्चा छतीसगढ़
हृदय से आभार व्यक्त कर रहा है।

आपने संयुक्त मोर्चा द्वारा समाज हित मे किये गये हर एक आंदोलन को तन,मन,धन से सहयोग किया है सिरपुर का अंतराष्ट्रीय सम्मेलन भी हमारे लिये एक अपने प्राचीन संस्कृति और सभ्यता को बचाने के लिये आन्दोलन का एक हिस्सा था।

इस सम्मेलन में दुनिया के लगभग 30-35 देश के विद्वान भाग लिये । वही छतीसगढ़ के माननीय मुख्य मंत्री डॉ रमनसिंह जी ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा है कि *सिरपुर न केवल छतीसगढ़ की धरोहर है अपितु देश और दुनिया की धरोहर है* माननीय मुख्यमंत्री जी के इस उद्गार ने हमारे प्राचीन धरोहर के महत्व को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है। उन्होंने यह स्वीकार किया है कि दुनिया के समक्ष *सिरपुर* को सही रूप में नही रख पाये है ।उन्होंने यह भी कहा है कि *सिरपुर* को इंटरनेशनल बुद्धिस्ट सर्किट में संम्मिलित करने के लिये कोई कमी नही रखेंगे।

इस आयोजन के प्रणेता हमारे कमांडेंड साहब नरेंद्र सिंह जी के कुशल मार्ग दर्शन और बेहतरीन रणनीति और प्रोजेक्ट प्लान ने और आपके अमूल्य उपस्थिति ने *सिरपुर* को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाया है।

छत्तीसगढ़ के कल्चरल टीम राऊत नाचा, सुवा नृत्य, पंथी, कर्मा, और भगवान बुद्ध पर आधारित नाटक *बुद्ध ही बुद्ध* ने अपने अमित छाप छोड़ा है।

बुध्द ही बुध्द नाटक इन्दिरा कला संगीत विश्व विद्यालय खैरागढ़ ने किया था .

सिरपुर। को हमारे छतीसगढ़ के मूलनिवासी समाज SCSTOBC&Minoritie। ने जिस सहजता से स्वीकार करके इस सम्मेलन में भाग लिये वह अद्भुत था। हमने बनी बनाई एक धारणा कि बुद्ध को मानने वाले एक खाश वर्ग के लोग है को इस सम्मेलन में भाग लेकर तोड़ दिया है ।बुद्ध हमारे प्राचीन संस्कृति,सभ्यता ,और गौरवशाली इतिहास की पहचान है जो लिखित में मिलता है ।शिलालेखो में मिलता है कि हमारे पूर्वज कितने महान थे । हमें हमारे विलुप्त प्राचीन धरोहर के सहारे अपने भविष्य को महान बनाना है। छतीसगढ़ के हर वर्ग अपने पूरे परिवार और बच्चों के साथ *सिरपुर* देखने आये और बच्चों को अपने प्राचीन धरोहर से परिचित कराये।

*सिंगापुर से आये अजय रंगारी के उद्बोधन — हम नही तो कौन ? और आज नही कब ? इस दो वाक्य ने हमारे भावी पीढ़ी को ऐसा सोचने के लिये प्रेरित किया कि यदि हम अपने विकाश के लिये इन दो वाक्य को अपने गुरु मंत्र बना ले तो हमे आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता*

*वही एक महान भंते जी ने तथागत बुद्ध के 2500 साल पहले के एक सिद्धान्त ने सबको चौका दिया कि सूर्य पूर्व से न ऊगता है और न पश्चिम में डूबता है यह बोलकर एक नये सिद्धान्त को दुनिया के समक्ष लाया कि हम अपने बने- बनाये किसी धारणा पर पुनर्विचार करने के लिये कब और किस तरह परिवर्तित करने के लिये बाध्य होंगे कि यह सोच नही सकते इसलिये हमे परिवर्तन के लिये हमेशा तैयार रहना चाहिये*

आपसे आग्रह है कि आप इस थ्योरी पर चिंतन कीजिये कि

हमारे पृथ्वी ब्रम्हांड का एक ग्रह है और हमारे पृथ्वी जैसे लाखों ग्रह सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगा रहे है फिर सूर्य का उगना और डूबना सत्य नही है .
इसलिये
भगवान बुद्ध ने सत्य को परिभाषित करते हुये कहा है कि —
सत्य वह नही है जिसे आपने किसी किताब और ग्रंथ में पढ़ा है,या किसी ने हमे ऐसा बताया है,या हमारे गुरुओं ने हमे ऐसा सिखाया है,या अपने माता- पिता ने ऐसा कहा है , या हमने ऐसा स्वमं से ऐसा मा न लिया है ?

*सत्य वह है जिसे आप विज्ञान के कसौटी पर कसो — जिसे हम बहुत ही सरल शब्दों में बोल सकते है — जानो, छानो तब मानो*
इस तीन शब्द में पूरा विज्ञान समाहित है ।
*निरीक्षण*
*परीक्षण*
और
*अवलोकन*

*सिरपुर* को अंतराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिये समस्त आयोजक साथियों का शुक्रिया और इस महानतम आयोजन में आपके अमूल्य आगमन के लिये आप सबको सादर धन्यवाद।

हम उन सभी अतिथियों के आभारी है जो भारत से बाहर रह कर भी भगवान बुद्ध की धरती से प्यार करते है और आप बुद्ध की धरती छतीसगढ़ के *सिरपुर* में आये जहाँ भगवान बुद्ध आये थे, चीन से व्हेनसांग एक यात्री के रूप में आये थे और उन्होंने अपनी लेखनी से हमारे सिरपुर के धरती के नीचे दबे इतिहास को सहेजकर रखे और हमे हमारा इतिहास वापस कराया हम उनको धन्यवाद करते है नमन करते है और नमन करते है भंते नागर्जुन को जिन्होंने सिरपुर में बहुत समय रहकर ध्यान साधना किये छतीसगढ़ की धरती को ज्ञानवान बनाये ।

*एक बार फिर से पुनः आप सभी मूलनिवासी साथियों का हम आभार व्यक्त कर रहे है*

*रामकृष्ण जांगड़े,एडवोकेट , संयोजक
SCSTOBC&Minorities, संयुक्त मोर्चा छतीसगढ़

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