तमोर पिंगला में अवैद्ध कटाई का मामला, ग्रामीणों ने किया चक्का जाम और कार्यालय का घेराव

तमोर पिंगला में अवैद्ध कटाई का मामला, ग्रामीणों ने किया चक्का जाम और कार्यालय का घेराव

Posted on 21-December-2017
गरजा छत्तीसगढ़ से चन्द्रिका कुशवाह की रिपोर्ट

चन्द्रिका कुशवाहा- पोड़ी मोड़(प्रतापपुर)।

तमोर पिंगला में पेड़ों के अवैद्ध कटाई और लकड़ी की तस्करी के मामले में अब तक जांच और कार्यवाही न होने से नाराज ग्रामीणों ने आज रमकोला में चक्का जाम के साथ स्थानीय कार्यालय का घेराव किया,उन्होंने मामले में लिप्त उच्च अधिकारियों के साथ स्थानीय कर्मचारियों पर कार्यवाही की मांग की। ग्रामीणों ने कुएं में गिरकर घायल हथिनी को जहर देकर मारने के आरोप लगा रेंजर को घेर लिया,नायब तहसीलदार श्री पड़वार प्रतापपुर द्वारा कलेक्टर के निर्देश पर स्वतंत्र जांच टीम गठित कर जांच कार्यवाही के आश्वासन के बाद करीब चार घण्टे बाद आन्दोलन समाप्त हुआ,ग्रामीणों ने ज्ञापन दे कार्यवाही न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच के लिए जांच होने तक दोषी अधिकारियों को निलंबित कर रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कार्य बंद करने की मांग की।

गौरतलब है कि हाल ही में मामला सामने आया था कि तमोर पिंगला अभ्यारण्य में नियम कानून को ताक में रख वाईल्ड लाईफ के अधिकारियों ने रेस्क्यू सेंटर निर्माण के लिए सैंकड़ों पेड़ कटवा दिए जबकि अभ्यारण्य क्षेत्र में पेड़ काटे ही नहीं जा सकते। इतना ही नहीं रमकोला कार्यालय परिसर में आरा लगा इनकी चिराई भी करा दी ताकि उन्हें पटरा और चौखट के रूप मेंबेचा जा सके। यह मामला सामने आने के बाद अभ्यारण्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विभागीय संलिप्तता से लकड़ी तस्करी की बातें भी सामने आ रही हैं,मामला खुलने के बाद विभाग में हड़कम्प मच गया था क्योंकि दूरस्थ होने का फायदा उठा विभागीय लोग अब तक बिना किसी रोक टोक के तस्करी में लगे हुए थे। इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद अब तक बड़े पैमाने पर कार्यवाही हो जानी थी किन्तु कार्यवाही की बजाय विभाग मामले को दबाने में लगा है जिससे स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ते जा रहा है।

कार्यवाही न होने से नाराज ग्रामीणों ने आंदोलन करने का निर्णय लिया था और रमकोला में चक्का जाम व कार्यालय घेराव का ज्ञापन कलेक्टर सुरजपुर के नाम सौंपा था। तय कार्यक्रम के अनुसार ग्रामीणों ने आज रमकोला तमोर पिंगला कार्यालय के बाहर मुख्य सड़क में चक्का जाम किया,इस दौरान उन्होंने रमकोला कार्यालय का घेराव भी किया । कार्यक्रम को कई वक्ताओं ने सम्बोधित करते हुए अधिकारियों पर मनमानी और पेड़ों की तस्करी का आरोप लगाते हुए जंगल बेच आदिवासी संस्कृति के साथ खिलवाड़ के आरोप लगाए।उन्होंने कहा कि रेस्क्यू सेंटर निर्माण के लिए अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और कार्यालय परिसर में आरा लगा चिराई कराने की बातें सामने आ गयी हैं जो क्षेत्र में तस्करी को बातों को प्रमाणित कर रहा है लेकिन दोषियों पर कार्यवाही की बजाए शासन प्रशासन उन्हें बचाने में लगा है जो किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान उपस्थित नायब तहसीलदार श्री पड़वार ने आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास भी किया लेकिन वे नहीं माने और वे इस बात पर अड़े रहे कि तत्काल दोषी रेंजर व अन्य कर्मचारियों को निलंबित किया जाए और रेस्क्यू सेंटर का कार्य बंद कराया जाए ताकि जांच निष्पक्ष और ईमानदारी से हो सके तथा जांच टीम गठित कर मामले में उच्च अधिकारियों की संलिप्तता की जांच और कार्यवाही की जाए। नायब तहसीलदार के काफी समझाने के बाद ग्रामीण उनके आश्वासन पर कि कलेक्टर के निर्देश पर स्वतंत्र जांच टीम गठित की जाएगी और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी के बाद आंदोलन समाप्त हुआ तथा कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

ग्रामीणों ने इस दौरान जमकर नारेबाजी की और कार्यवाही न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। इस दौरान कंवल साय पोया,पारसनाथ मार्को,करमचंद कोरचा,जंगसाय पोया,रामजीत टेकाम,शिवमोहन कोर्राम,धर्मसाय मराबी,रूपचंद मराबी,राजकुमार नेती, शिवलाल जगत,धनुर्धारी आयाम,मदन नेताम,अमृत,जीवनदास आयाम,लक्ष्म नेटी, सुखदेव पोया,रामकेलि,महावीर पवले,हरवंश बैगा,भोलाप्रसाद पटेल,राजकुमारी मरावी,पार्वती ,धनपतिय,रैमुन्न,राधे कुंवर,नारायण सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे,किसी भी अप्रिय घटना से निपटने भारी संख्या में रमकोला पुलिस मौजूद थी।


हथिनी को जहर देकर मारने का आरोप

चक्का जाम के दौरान उपस्थित बड़ी संख्या में महिला और पुरुषों ने कुछ दिन पूर्व हथिनी की मौत के मामले में अधिकारियों पर उसे जहर देकर मारने का आरोप लगाया और
नारेबाजी करते हुए वहां उपस्थित रेंजर को घेर लिया। इस दौरान स्थिति तनाव पूर्ण हो गयी और तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ,ग्रामीणों ने कहा कि अधिकारियों ने जान बूझकर हथिनी को जहर देकर मारा है क्योंकि घायल हथिनी उनके लिए समस्या बन जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम में गलत रिपोर्ट दी गयी है,पीएम के दौरान केवल विभाग के लोग ही थे और डॉक्टर भी उन्हीं के लोग थे। इस मामले की भी स्वतंत्र जांच और पुनः पोस्टमार्टम कराने की मांग ग्रामीणों ने की।
लंबे समय से तस्करी के आरोप

ग्रामीणों ने इस दौरान तमोर पिंगला अभ्यारण्य के अधिकारी कर्मचारियों पर लंबे समय से क्षेत्र में लकड़ी की तस्करी के आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के साथ इनके रिश्तेदार क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं तथा अभ्यारण्य के अंदरूनी हिस्से में पेड़ों की कटाई करा पिकप व अन्य गाड़ियों में लोड कर ले जाते हैं। इन्हीं के द्वारा जंगल के अंदर आरे लगवा इनकी चिराई कराई जाती है,केवल रमकोला ही नहीं वरन जजावल और खोंड क्षेत्र में भी सभी सक्रिय हैं,वह भी कई वर्षों से। ईमानदारी से जांच हो तो अभ्यारण में घटते जंगल से सब् स्पष्ट हो जाएगा।उन्होंने कहा कि रेंजर के साथ विभाग के कुछ लोगों का काम ही केवल लकड़ी बेचना है जिसमें योगेंद्र तिवार,अशोक पटेल व अन्य के नाम बार बार .

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चन्द्रिका कुशवाहा whatsupno.9754897792 के समाचार द्वारा

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