भू राजस्व संहिता में संशोधन का निर्णय आदिवासी, किसान विरोधी हैं इसे शीघ्र वापिस लिया जाए , छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन.

रायपुर. 21.12.2017

छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा में आज एक और जन विरोधी निर्णय लेते हुए आदिवासियों से जमीन छीनने का रास्ता साफ किया हैं जिससे आसानी से अपने चहेते कार्पोरेट को जमीन उपलब्ध करवाया जा सके।
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में संशोधन पूर्णतः आदिवासी विरोधी निर्णय हैं क्योंकि इससे आदिवासी की जमीनों को जबरन छीनने का रास्ता बनाया गया हैं।

यह संशोधन 2013 के केंद्रीय भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कानून, तथा पांचवी अनुसूची और पेसा कानून के प्रावधानों के विपरीत हैं, क्योंकि पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में बिना ग्रामसभा की सहमति के भूमि अधिग्रहण की प्राक्रिया संपादित नही की जाती परन्तु इस संशोधित प्रावधान से जमीन लेने पर ग्रामसभा की कोई जरूरत नही होगी। इसके साथ ही 2013 के कानून के मुख्य प्रावधान जिसमे सामाजिक समाघात अध्यन और पुनर्वास के प्रावधान से भी बचा जा सकेगा। इस संशोधन से एक सवाल यह भी खड़ा होता हैं कि जब पूर्व ही कलेक्टर की अनुमति से आदिवासी की जमीन खरीदने का प्रावधान विधमान हैं तो इस संशोधन की आवश्यकत्ता क्यो?

ज्ञात हो कि 2016 में राज्य सरकार ने आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति बनाई हैं जिसमे किसानों से सीधे जमीन खरीद की जा रही हैं यह प्रावधान भी इसी नीति के तहत आदिवासियों से जमीन खरीदनेे का मार्ग प्रशस्त करेगा। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन राज्य सरकार के इस आदिवासी किसान विरोधी निर्णय का पुरजोर तरीके से विरोध करते हुए इसे शीघ्र वापिस लेने की मांग करता हैं। प्रवधान के वापिस नही लिए जाने के स्थिति में व्यापक जनांदोलन के साथ इसे माननीय न्यायालय में भी चुनोती दी जाएगी।
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आलोक शुक्ला
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलनके

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