20.12.2017

अनुराग मिश्रा की पोस्ट

छतीसगढ़ राज्य को कार्पोरेट जगत की लुट का चारागाह बनाया जा रहा है लगता है छतीसगढ़ सरकार उद्योगपतियों को मुनाफा पहुंचाने इतनी उतावली है कि जैव विविधता से परिपूर्ण घने जंगलों और सोनाखान जैसे ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की उपेक्षा कर विरोध के बावजूद भी कसडोल विकासखण्ड अन्तर्गत वनक्षेत्र बाघमाडा के इलाके को सोने की खुदाई के लिए वेदांता कंपनी को दे दी जो दुर्भाग्यजनक है।

बारनयापारा अभ्यारण्य से लगे सघन वनक्षेत्रों को साधारण जंगल व जंगली जानवरों की रहवास स्थल को उनका पासिंग एरिया( आवाजाही एरिया) बता शासन के दबाव में वन्यप्राणी जीव बोर्ड भी एक तरह से अपना पल्ला झाड ली है जो दुखद है कल बलौदाबाजार जिला मुख्यालय पर इसके खिलाफ और वन भूमि पर आदिवासियों के हक की लडाई के लिये दलीत आदिवासी मंच के आह्वान पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन व रैली पश्चात कलेक्टर बलौदाबाजार को महामहिम राज्यपाल के नाम एक मांग पत्र सौंपा गया जिसमें वेदांता कंपनी को दिये गये खनन की अनुमति को रद्द करने की मांग भी की गई इस अवसर पर वसुंधरा सामाजिक सेवा संस्थान की ओर से साथियों सहित शामिल हुआ।इस अवसर पर आदिवासियों और किसानों के हितों की लडाई के लिए सदैव तत्पर रहने वाले आदरणीय आलोक शुक्ला (रायपुर) और आदरणीय सुरेन्द्र शर्मा जी भी उपस्थित थे।
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नई दुनिया की रिपोर्ट
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आदिवासियों ने सड़क पर उतर दर्ज कराया विरोध

Wed, 20 Dec 2017

छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह की जन्म-कर्म भूमि को विदेशी कंपनी वेदांता को सोना उत्खनन के लिए बेच देने का आरोप लगाते हुए खनन के विरोध में हजारों आदिवासी आज मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचे।

बलौदाबाजार। नईदुनिया न्यूज

छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह की जन्म-कर्म भूमि को विदेशी कंपनी वेदांता को सोना उत्खनन के लिए बेच देने का आरोप लगाते हुए खनन के विरोध में हजारों आदिवासी आज मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचे। बलौदाबाजार दशहरा मैदान में हुए इस महासम्मेलन के बाद रैली निकालकर राज्य सरकार के नाम अतिरिक्त कलेक्टर तीर्थराज अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि राज्य को कार्पोरेट जगत की लूट का चरागाह बनाया जा रहा है। इनकी मुनाफा पहुंचाने के लिए घने जंगलो, जल स्त्रोतों, ऐतिहासिक स्थलों में भी खनन की अनुमति देकर बर्बाद किया जा रहा है। सोनाखान के बाघमाडा और अचानकपुर में समृद्घ जंगल जिसमें सागौन, बांस तथा अनमोल वन औषधियो वाले समृद्घ जंगल सहित 1035 एकड़ के घने जंगल को मात्र 27 सौ सोना उत्खनन के लिये विदेशी कंपनी वेदांता को बेच दिया गया है। कानून के प्रावधान के अनुसार वैज्ञानिक प्रक्रिया को अपनाये बिना ही भय का माहौल तैयार कर जबरन गांव को विस्थापित करने की साजिश कर रही है। किसानों को उनकी उपज का सही दाम न मिलने से वह कर्ज की बोझ में दबकर आत्म हत्या करने के लिए विवश है। गांव में न ही 200 दिन की रोजगार गारंटी और न ही समय पर मजदूरी का भुगतान। लोग पलायन कर ईट भट्ठों में बंधवा मजदूरी करने विवश है। बलौदाबाजार के अंतर्गत सीमेंट फैक्ट्रियों में कार्यरत् मजदूरो को निकाला जा रहा है। हजारो की संख्या में नारेबाजी करते हुये दलित आदिवासी मंच के लोगो के जिला कार्यालय पहुंचने से पूर्व ही वहॉ पुलिस प्रशासन ने तगडी सुरक्षा व्यवस्था की हुई थी।

ज्ञापन सौंपने वालों में दलित आदिवासी मंच के ब्लॉक अध्यक्ष राजेन्द्र सिंग दीवान, उपाध्यक्ष तीजन बाई बरिहा, सचिव अमृत कैवत्र्य, संतोष, इन्द्र कुमार, केजूराम पैकरा, राज चन्द्र पटेल, श्याम लाल पोर्ते, भंवर सिंह, उत्तरा कुमार, लक्ष्मण सिंह, शत्रुहन बरिहा, पुनीराम कंवर, शिव कुमार कंवर, छोटे लाल, आशाराम, सुन्दर, ग्रहण, कन्हैया लाल पैकरा, शिव कुमार निषाद, कमल सांवरा, उर्मिला, सुख सिंग पैकरा, फुलसाय बरिहा, राजपाल, भारत लाल, मही सिंग धु्रव सहित हजारो की संख्या में दलित आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे। वंसुधरा समाज संस्थान कसडोल के अध्यक्ष अनुराग मिश्रा, सचिव सुनील तिवारी ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।

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